21 जुलाई 2026 (मंगलवार) के पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है。 आज के दिन मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा。 आज का शुभ अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा और राहुकाल दोपहर 03:30 बजे से 05:00 बजे तक & सूर्योदय- सुबह 5: 36 बजे सूर्यास्त- शाम 7: 18 बजे & एक एकाक्षी नारियल लेकर, उस पर सात बार मौली लपेटकर देवी मां के सामने रखना चाहिए। जीवन की गति को सुगम बनाना चाहते हैं देवी मां के मंदिर में उनके निमित्त वस्त्र भेंट करने चाहिए और उनको कच्चे नारियल की गिरी का भोग लगाना चाहिए।

पार्वती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का एक साथ पड़ना अत्यंत शुभ संयोग है। इस दिन माता पार्वती और मां दुर्गा की पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ, ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जप तथा कन्याओं को भोजन कराने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT ; BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030

21 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और मंगलवार का दिन है। अष्टमी तिथि मंगलवार को पूरा दिन पार करके बुधवार सुबह 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। 21 जुलाई को शाम 6 बजकर 26 मिनट तक सिद्ध योग रहेगा। साथ ही मंगलवार को रात 8 बजकर 49 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 21 जुलाई को दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा।
21 जुलाई 2026, मंगलवार को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि प्रातः 5:16 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन पार्वती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का पावन संयोग बन रहा है, इसलिए माता पार्वती और मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

21 जुलाई को विवस्वत सूर्य देवता की पूजा का सप्तमी भी रहेगा। आज स्थायी जययोग….एवं द्विपुष्कर योग भी है। अर्थात जो कुछ भी करेंगे उसका दो गुना फल होता है। जैसे पूण्य करेंगे तो उस पूण्य…..का दो गुना फल होता है। सूर्य देवता के नक्षत्र परिवर्तन पुष्य नक्षत्र के सूर्य & अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है।। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि…… व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का……प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से……विख्यात मानी जाती है।
इस अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान. शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है।
प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाता है। इस दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है। मासिक दुर्गाष्टमी व्रत के दिन माता रानी की उपासना करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। साथ ही हर समस्या का समाधान भी निकल जाता है। मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने, दान करने और माता की उपासना करने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है
मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः. विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।
- आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि- 21 जुलाई 2026 को पूरा दिन पार करके बुधवार सुबह 5 बजकर 17 मिनट तक
- सिद्ध योग- 21 जुलाई को शाम 6 बजकर 26 मिनट तक
- चित्रा नक्षत्र- 21 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 49 मिनट तक
- 21 जुलाई 2026 विशेष- मासिक दुर्गाष्टमी व्रत
- ब्रह्म मुहूर्त 04:44 ए एम से 05:28 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:19 पी एम से 01:11 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:56 पी एम से 03:48 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:17 पी एम से 07:39 पी एम
- अमृत काल- 01:58 पी एम से 03:41 पी एम
21 जुलाई 2026 को मासिक दुर्गाष्टमी ; विशेष उपायों को करने से हर समस्या का समाधान
वर या वधू पाने में किसी प्रकार की परेशानी ; सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।। मंत्र जप के बाद मां दुर्गा को इलायची का भोग लगाना चाहिए।

बच्चे खूब तरक्की करें तो ; या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। जप के बाद देवी मां के आगे घी का दीपक जलाना चाहिए।
सुख-शांति गायब हो गई है तो : 2 कपूर और 12 लौंग लेकर कंडे उपले पर जलाकर परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए देवी दुर्गा से प्रार्थना
स्वास्थ्य को लेकर आपको कुछ परेशानी : ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।। जाप के बाद माता को पांच फलों का भोग लगाना चाहिए।
भय बना रहता है ” जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणी। जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तु ते।। जप के बाद मंदिर की घंटी बजानी चाहिए।
सुख की प्राप्ति करना चाहते हैं तो : देहि सौभाग्य मारोग्यं देहि मे परमं सुखम् रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषों जहि।। मंत्र जप के बाद देवी मां को प्रणाम करना चाहिए

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ मंत्र जाप के बाद देवी दुर्गा के आगे कपूर जलाना चाहिए। कपूर से उनकी आरती करनी चाहिए और उसके बाद हलवे और उबले हुये चने का भोग लगाना चाहिए।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी)…आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो।। by Chandra Shekhar Joshi Mob. 9412932030