22 जुलाई 2026 (बुधवार) के पंचांग के अनुसार, आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (पूरे दिन) है。 आज के दिन साध्य योग (शाम 06:42 तक) और स्वाति नक्षत्र (रात 11:04 तक) रहेगा सूर्योदय: सुबह 05:37 बजे सूर्यास्त: शाम 07:18 बजे राहुकाल: दोपहर 12:45 से 02:23 तक स्वाति नक्षत्र हिंदू ज्योतिष का 15वां नक्षत्र है。यह तुला राशि में स्थित है और इसके स्वामी ग्रह राहु हैं。इस नक्षत्र के देवता वायु और इसकी अधिष्ठात्री देवी सरस्वती हैं。 इसका प्रतीक हवा में झुकती हुई एक नई कोंपल है, और इसके देवता वायु हैं। पंचांगों के अनुसार, यह अधिकांश मुहूर्तों के लिए एक शुभ मुहूर्त है।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH Mob 9412932030
नक्षत्र: स्वाति (Swati) – रात 11:11 तक (इसके बाद विशाखा नक्षत्र) घर से निकलने से पहले धनिया या थोड़ा सा दही खाकर निकलें और भगवान गणेश जी की आराधना करें। स्वाती को अधिकांश शुभ कार्यों के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। इसीलिये यह शुभ मुहूर्त में स्वीकृत है। स्वाती नक्षत्र के निम्नलिखित गुण हैं – तारा संख्या : 1 स्वामी : वायु स्वभाव : चर आकृति : मूँगा मुख स्थिति : तिर्यंग मुख दृष्टि : सुलोचन वैदिक ज्योतिष के अनुसार स्वाति नक्षत्र पूर्णतः शुभ नक्षत्र माना जाता है। इसे शांति, संतुलन और स्वतंत्रता का प्रतीक माना गया है। इसके देवता पवन (वायु) देव और स्वामी ग्रह राहु हैं।

एक लाल कपड़े में थोड़ी सी हल्दी की गांठ, एक सिक्का, 5 लौंग और थोड़े से अक्षत बांधकर मां के चरणों में रखें। पूजा के बाद इस पोटली को अपनी तिजोरी या धन स्थान पर रख दें। इसके अलावा किसी जरूरतमंद को लाल वस्त्र, अनाज या फलाहार का दान बिना किसी को बताए गुप्त रूप से करें। इस उपाय से हर मनोकामना पूर्ति की लाभ मिलता है तथा घर में गुप्त शत्रुओं और गुप्त बाधाओं का नाश होता है व धन-धान्य के भंडार भरे रहते हैं।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और बुधवार का दिन है। नवमी तिथि आज पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल 7 बजकर 4 मिनट तक रहेगी। आज शाम 6 बजकर 42 मिनट तक साध्य योग रहेगा। साथ ही आज रात 11 बजकर 4 मिनट तक स्वाती नक्षत्र रहेगा। बता दें कि अभी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी चल रही है। ऐसे में देवी भगवती की उपासना करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी
22 जुलाई को गुप्त नवरात्रि 2026 की नवमी तिथि है। गुप्त नवरात्रि का समय तंत्र-मंत्र, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए खास होता है। इन दिनों मां दुर्गा की 10 महा विद्याओं की उपासना होती है। इन 10 महा विद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और देवी कमला के नाम शामिल हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में जितनी गुप्त रूप से साधना की जाती है, वह उतनी ही फलदायी साबित होती है।
गुप्त नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नवमी के दिन 9 कन्याओं और साथ में एक छोटे बालक को बटुक भैरव के रूप में घर बुलाकर पूजा करें। तथा कन्याओं के पैर धुलकर उन्हें हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद खिलाएं। अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर उनके चरण छूकर आशीर्वाद लें। इससे मां दुर्गा का साक्षात आशीर्वाद मिलता है और घर के सारे ग्रह-दोष शांत होते हैं।
नवमी के दिन किया गया हवन पूरे गुप्त नवरात्रि की साधना को पूर्णता प्रदान करता है। उपाय के तौर पर हवन सामग्री में थोड़ा सा गुग्गल, लोबान, अक्षत और कमलगट्टा मिलाएं। अंत में 108 बार कपूर और 2 साबुत लौंग के जोड़े से मां दुर्गा को आहुति दें। इस उपाय से घर की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर तुरंत समाप्त होती है तथा परिवार में सकारात्मकता आती है। साथ ही यह उपाय खासतौर पर मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।
गुप्त नवरात्रि धन और समृद्धिदायक मानी जाती है। नवमी तिथि पर मां मातंगी के साथ-साथ धनलक्ष्मी को प्रसन्न करना बहुत शुभ होता है। इस दिन मां दुर्गा को 5 या 9 कमल के फूल या लाल गुलाब अर्पित करें और मखाने की खीर का भोग लगाएं। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है, रुका हुआ धन वापस मिलता है और तिजोरी में बरकत आती है।
स्वाति को एक स्वच्छ, गतिशील और सर्वथा शुभ नक्षत्र माना जाता है। इसका एकमात्र दृश्यमान नक्षत्र आर्कटुरस है, जो बूट्स नक्षत्र में स्थित चमकीला नारंगी-पीला विशाल नक्षत्र है, और चंद्रमा प्रत्येक नक्षत्र माह में एक बार तुला राशि के इस 13°20′ चाप को पार करता है। नामकरण के लिए, चारों पद क्रमशः रु, रे, रो और ता अक्षरों का उपयोग करते हैं – यही स्वाति नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चों को दिए जाने वाले जन्म-नक्षत्र नामों का आधार है।
राहु द्वारा शासित और लहराते पौधे द्वारा प्रतीकित स्वाति नक्षत्र स्वतंत्रता, अनुकूलनशीलता और आजादी का प्रतिनिधित्व करता है। हवा की तरह ही, इस नक्षत्र के जातक अपने जीवन में गति, लचीलापन और आत्म-अभिव्यक्ति की तलाश करते हैं। वे व्यक्तिगत निजता को महत्व देते हैं और जब उन्हें अपना मार्ग स्वयं चुनने की स्वतंत्रता दी जाती है तो वे फलते-फूलते हैं।
कहावत है कि जब स्वाति नक्षत्र में ओंस की बूँद सीप पर गिरती है तो मोती बनता है। इस दिवस पर बगला मुखी की स्तुति करने वाला जातक मोती के समान चमकता है। आ गया यह अदभुत अवसर
22 जुलाई 2026 का दिन आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी (भड़ली नवमी) का दिन भी है。हिंदू धर्म में “अबूझ मुहूर्त” & यह अवसर चूक न जाना : स्वाति नक्षत्र में होने वाली बारिश की बूंदों को वेदों में “अमृत समान” माना ; चन्द्रशेखर जोशी बगलामुखी पीठ से बताया कि
स्वाति नक्षत्र के देवता वायु है, वायु की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती है, स्वाति नक्षत्र में वायु देव की पूजा करने से देव शक्तियां अनुकूल होती है और असीम ज्ञान की प्राप्ति होती है
22 जुलाई 2026 को पड़ने वाले स्वाति नक्षत्र का ज्योतिष और अध्यात्म में अद्भुत महात्म्य है। इस दिन स्वाति नक्षत्र रात 23:02 बजे तक रहेगा。स्वाति नक्षत्र के देवता वायु देव हैं और इसकी अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती हैं। इस नक्षत्र को विद्या, ज्ञान और व्यापार में प्रगति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
स्वाति नक्षत्र आकाश मंडल में 15वाँ नक्षत्र होकर इसका स्वामी राहु यानी अधंकार है। यदि राहु के कारण आपके जीवन में उथल-पुथल मची है, तो बगलामुखी साधना (मंत्र जाप) करनी चाहिए。
राहु भगवान शिव का परम भक्त है。 इसलिए मां बगलामुखी या मां दुर्गा के साथ-साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाना राहु को नियंत्रित करने का सबसे सरल उपाय
पौराणिक मान्यता है कि जब इस नक्षत्र में बारिश की बूंदें सीप पर गिरती हैं, तो वे मोती बन जाती हैं。आप इस दिन होने वाली बारिश के जल को किसी कांच या तांबे के पात्र में एकत्र कर सकते हैं。इस जल को घर की तिजोरी में रखने से बरकत और आर्थिक समृद्धि बढ़ती है
स्वाति नक्षत्र का प्रतीक “हवा” (वायु) है, जो चारों ओर स्वतंत्र रूप से बहती है。चूंकि इसकी अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती हैं, इसलिए 22 जुलाई को विद्यार्थियों, लेखकों और ज्ञान के साधकों को माँ सरस्वती की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस दिन सरस्वती मंत्र का जाप करने से बुद्धि और स्मरण शक्ति में तीव्र वृद्धि होती है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस नक्षत्र के स्वामी राहु हैं,जो महत्वाकांक्षा, शोध (research) और तकनीकी कार्यों के कारक हैं。स्वाति नक्षत्र का प्रभाव आपके अंदर स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व गुण को मजबूत करता है。
कुंडली में राहु-केतु या शत्रु योग होने पर बगलामुखी साधना सुझाई जाती है।