26 मार्च 2026, गुरुवार,अष्टमी सुबह 11:51 बजे तक, श्री राम नवमी/दुर्गाष्टमी: दोनों पर्वों का योग & 2 कपूर, 12 लौंग,गोबर के कंडे, पांच फलों का भोग, देवी के दर्शन & CS JOSHI HARDWAR ASHRAM AVAILABLE 10am

ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।। महाअष्टमी के दिन आपको 2 कपूर और 12 लौंग लेकर एक गोबर के कंडे या उपले पर जलानी चाहिए। एकाक्षी नारियल लेकर, उस पर सात बार मौली लपेटकर देवी मां के सामने रखना चाहिए।  महाअष्टमी के दिन लाल चंदन को घिसकर अपने स्नान के पानी में डालकर नहाना चाहिए। साथ ही देवी दुर्गा के दर्शन करें

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR Mob 9412932030 Bagla Mukhi Peeth Dehradun

देवी दुर्गा को इलायची का भोग & हलवे और उबले हुये चने का भोग लगाना चाहिए। मां दुर्गा को किसी भी पांच फलों का भोग लगाना चाहिए

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

विधेहि देवी कल्याणं विधेहि परमां श्रियम। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

26 मार्च 2026, गुरुवार को चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (महाष्टमी) है, जो सुबह 11:51 बजे तक रहेगी। इस दिन माता महागौरी की पूजा और कन्या पूजन किया जाएगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी, अभिजीत मुहूर्त: 12:02 PM से 12:52 PM। राहुकाल: 01:59 PM से 03:31 PM। सूर्योदय – 06:18 AM सूर्यास्त – 06:36 PM चन्द्रोदय – 11:59 AM ब्रह्म मुहूर्त – 04:45  AM से 05:31 AM गोधूलि मुहूर्त – 06:34 PM से 06:58 PM सर्वार्थ सिद्धि योग – 04:19 PM से 06:17 AM

तिथि: चैत्र शुक्ल अष्टमी (सुबह 11:48 बजे तक), तदोपरांत नवमी & महाष्टमी/नवरात्र 8वां दिन: मां महागौरी की पूजा।

 विधेहि देवी कल्याणं विधेहि परमां श्रियम। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

गुरुवार को चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार महाष्टमी इसी दिन मनाई जाएगी। नवरात्र के आठवें दिन देवी दुर्गा की आठवीं शक्ति माता महागौरी की उपासना की जाती है। इनका रंग पूर्णतः गोरा होने के कारण ही इन्हें महागौरी या श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है। इनके रंग की उपमा शंख, चन्द्र देव और कन्द के फूल से की जाती है। इनका वाहन बैल है। 

देहि सौभाग्य मारोग्यं देहि मे परमं सुखम् रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषों जहि।

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणी। जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तु ते।।

 या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।

सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥

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