26 मई 2026 को (अधिक) ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और मंगलवार का दिन है। एकादशी तिथि मंगलवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के बुधवार सुबह 6 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। 26 मई को देर रात 3 बजकर 11 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। साथ ही मंगलवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के बुधवार सुबह 5 बजकर 57 मिनट तक हस्त नक्षत्र रहेगा। 26 मई को ज्येष्ठ माह का चौथा बड़ा मंगल भी है, जिसे बुढ़वा मंगल भी कहते हैं।

शतहस्त समाहर सहस्त्रहस्त सं किर। कृतस्य कार्यस्य चेह स्फातिं समावह।।
अर्थात् सौ हाथों से धन अर्जित करो और हजारों हाथों से उसे योग्य और जरूरतमंद व्यक्तियों में वितरित करो। मोहिनी एकादशी आत्मशुद्धि, भगवान विष्णु की कृपा और सेवा-भाव का दिव्य पर्व है। इस दिन किया गया व्रत, पूजा और दान व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, सुख और शांति लाता है। इस मोहिनी एकादशी, व्रत के साथ दान का संकल्प लें और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करें। भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है, किंतु वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली मोहिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना गया है। यह दिन आत्मशुद्धि, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और दान-पुण्य के माध्यम से जीवन को पवित्र बनाने का दिव्य अवसर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है तथा उसे सुख, समृद्धि और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है वर्ष 2026 में मोहिनी एकादशी का प्रारंभ 26 अप्रैल 2026 को शाम 6 बजकर 6 मिनट से होगा और इसका समापन 27 अप्रैल 2026 को शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में व्रत और पर्वों की तिथि निर्धारण में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है। चूंकि एकादशी तिथि सूर्योदय के समय 27 अप्रैल 2026 को विद्यमान रहेगी, इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल दिन सोमवार को रखा जाएगा। कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि दान से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य कृपा का संचार होता है।
ब्रह्म मुहूर्त: 04:10 AM से 04:58 AM & राहु काल: 03:45 PM से 05:28 PM तक & सूर्योदय: सुबह 05:25 AM & सूर्यास्त: शाम 07:11 PM ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि- 26 मई 2026 को पूरा दिन पूरी रात पार कर के बुधवार को सुबह 6 बजकर 22 मिनट तक सिद्धि योग- 26 मई 2026 को देर रात 3 बजकर 11 मिनट तक हस्त नक्षत्र- 26 मई 2026 को पूरा दिन पूरी रात पार कर के बुधवार को सुबह 5 बजकर 57 मिनट तक 26 मई 2026 विशेष- चौथा बड़ा मंगल, ज्येष्ठ मंगलवार, बुढ़वा मंगल

- ब्रह्म मुहूर्त- 04:34 ए एम से 05:18 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:09 पी एम से 01:02 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:47 पी एम से 03:40 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:09 पी एम से 07:31 पी एम
एकादशी तिथि का प्रारंभ: 26 मई 2026, मंगलवार की सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि की समाप्ति: 27 मई 2026, बुधवार की सुबह 06:21 बजे यह एकादशी तीन वर्षों में केवल एक बार अधिक मास में
26 मई 2026 को ज्येष्ठ मास का चौथा बड़ा मंगल होगा। हनुमान जी को बनारसी पान और बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए। माना जाता है कि चतुर्थ बड़े मंगल पर की गई पूजा से पूरे महीने की भक्ति का फल मिल जाता है और आने वाले संकट टल जाते हैं। ॐ हं हनुमते नमः का जाप कम से कम 108 बार करें। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम या अधिकमास होने के कारण भक्तों को हनुमान जी की भक्ति के लिए अतिरिक्त समय मिल रहा है। अधिक मास के मंगल विशेष रूप से आध्यात्मिक उन्नति के लिए जाने जाते हैं।
ज्येष्ठ माह में हनुमानजी और मंगलदेवजी की पूजा का खासा महत्व रहता है। इन मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहते हैं। बुढ़वा मंगल के दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह जीवन में ऊर्जा, साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति को बढ़ाने वाले दिन भी है। इन दिनों बजरंगबली की भक्ति करना अत्यंत फलदायक माना गया है। 5 मई से शुरू हुए ज्येष्ठ मास में 8 बड़ा मंगल पड़ेंगे। यह महीना 23 जून को खत्म होगा। बड़ा मंगल के दिन विधि-विधान से हनुमान जी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से जीवन के सारे संकटों का समाधान तुरंत ही हो जाता है।
जेठ या ज्येष्ठ के महीने में आने वाले मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढवा मंगल’ कहा जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ के महीने में पुरुषोत्तम/अधिमास का दुर्लभ संयोग बना होने के कारण इस साल 4 की बजाय 8 बड़े मंगल पड़ेंगे, जो 5 मई से शुरू होकर 23 जून 2026 तक चलेंगे। यह दिन भगवान हनुमान जी की कृपा पाने के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन बजरंगबली की मुलाकात भगवान श्री राम से हुई थी।
बड़ा मंगल के दिन सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। यदि समय कम हो, तो कम से कम हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाएं। ध्यान रहे कि सिंदूर नारंगी रंग वाला हो। इससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। ठंडा पानी, शरबत और मीठे पूड़े खिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है। 11 पीपल के पत्ते लें, उन्हें साफ पानी से धोएं और उन पर चंदन से ‘श्री राम’ लिखें। इन पत्तों की माला बनाकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक तंगी दूर होती है। शाम के समय हनुमान मंदिर में जाकर चमेली के तेल का दीपक जलाएं। दीपक में लाल रंग की बत्ती या कलावा का प्रयोग करना और भी शुभ माना जाता है। हनुमान जी राम जी के परम भक्त हैं। उन्हें खुश करने का सबसे आसान तरीका है ‘राम-राम’ नाम का निरंतर जप करना। जहां राम का नाम लिया जाता है, हनुमान जी वहां स्वयं विराजमान रहते हैं। बड़ा मंगल के दिन बजरंग बाण का पाठ करना आपके लिए रक्षा कवच का काम करेगा। सामर्थ्य अनुसार अनाज, लाल कपड़े, या गुड़ का दान करें।
जय श्री राम! जय बजरंगबली!
क्यों कहलाती है ‘मोहिनी’ एकादशी?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब अमृत कलश प्राप्त हुआ। अमृत को प्राप्त करने के लिए देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई। देवता और असुर दोनों ही अमृत कलश को प्राप्त करना चाहते थे। एकाएक देखा गया कि असुर अमृत प्राप्त करने में आगे बढ़ रहे थे, इसे देखकर देवगण चिंतित हो उठे।
तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। उन्होंने श्रीहरि से इस समस्या से निकालने का अनुरोध किया। देवताओं की विनती पर भगवान विष्णु ने दिव्य मोहिनी रूप धारण किया।
एक ऐसा अद्भुत और मनमोहक स्वरूप, जिसे देखकर असुर मोहित हो गए। भगवान ने अपनी माया से असुरों को भ्रमित कर अमृत देवताओं को प्रदान कर दिया। इस प्रकार देवताओं ने अमृत पान कर अमरत्व प्राप्त किया।
मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यही मोहिनी स्वरूप इसी एकादशी तिथि पर धारण किया था। इसी कारण इस पावन तिथि को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। मोहिनी एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। शास्त्रों के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने से व्यक्ति को अनेक यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

कहा जाता है कि इस एकादशी का व्रत करने से-
- जीवन के दुख और कष्ट दूर होते हैं
- मन की अशुद्धियां समाप्त होती हैं
- पापों से मुक्ति मिलती है
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है
- मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है

धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने से सहस्त्र गौदान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है