5 नवंबर 2026 गुरुवार, रमा एकादशी 10.36am & .. 

5 नवंबर 2026 (गुरुवार) विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी) मास: कार्तिक (कृष्ण पक्ष) तिथि: एकादशी सुबह 10:35 AM तक, इसके बाद द्वादशी तिथि आरंभ व्रत/त्योहार: रमा एकादशी व्रत और गोवत्स द्वादशी सूर्योदय: सुबह 06:36 AM सूर्यास्त: शाम 05:33 PM ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 AM से 05:44 AM अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 AM से 12:26 PM राहुकाल: दोपहर 01:27 PM से 02:49 PM By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & Founder Sadhak Bagla Mukhi Peeth Dehradun 9412932030

आज सुबह 10:36 बजे के बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। आज प्रदोष काल में गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) की पूजा की जाएगी। आज के दिन गाय और बछड़े की पूजा कर उन्हें भोजन कराया जाता है। घर से निकलने से पहले भगवान श्री विष्णु जी का ध्यान करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें, तत्‍पश्‍चात यात्रा के लिए प्रस्थान करें।

5 नवंबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की उदया तिथि एकादशी और गुरुवार का दिन है। कल एकादशी तिथि सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी, उसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। कल पूरा दिन पूरी रात पार कर के अगले दिन सुबह 5 बजकर 10 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। साथ ही कल 5 नवंबर को देर रात 3 बजकर 56 मिनट तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। कल रम्भा एकादशी का व्रत किया जायेगा। इसके साथ ही गोवत्स द्वादशी भी मनायी जायेगी।

  • कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि – 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक
  • वैधृति योग- 5 नवंबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के अगले दिन सुबह 5 बजकर 10 मिनट तक
  • उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र- 5 नवंबर को देर रात 3 बजकर 56 मिनट तक
  • 5 नवंबर विशेष- रम्भा एकादशी का व्रत, गोवत्स द्वादशी
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:52 ए एम से 05:44 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:18 ए एम से 06:36 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:43 ए एम से 12:26 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 01:54 पी एम से 02:38 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 05:33 पी एम से 05:59 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 05:33 पी एम से 06:52 पी एम
  • अमृत काल- 08:36 पी एम से 10:13 पी एम
  • सूर्योदय- सुबह 06:36 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 05:33 बजे

भगवान विष्णु यानी श्री केशव की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं। साथ ही मन की एकाग्रता बढ़ती है और काम में मन लगता है। इसके अलावा विवाह में हो रही देरी से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

वहीं, कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गोवत्स द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गाय-बछड़े की पूजा करने से व्यक्ति को हर सुख प्राप्त होता है। विशेष रूप से संतान सुख की कामना रखने वालों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि श्रीकृष्ण के जन्म के बाद मां यशोदा ने पहली बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी को ही गौमाता के दर्शन कर विधि-विधान से उनका पूजन किया था। इसलिए संतान सुख की कामना रखने वाले लोगों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। 

दीपावली साल 2026 में 8 नवंबर को मनाई जाएगी। दीपावली से ठीक एक दिन पहले यानि 7 नवंबर को तुला राशि में त्रिग्रही योग बनेगा। यह योग सूर्य-बुध और चंद्रमा की युति से बनने वाला है। आपको बता दें कि तुला राशि में सूर्य और बुध पहले से ही विराजमान हैं वहीं 7 नवंबर की शाम 5 बजकर 15 मिनट पर चंद्रमा कन्या से निकलकर तुला में गोचर कर जाएंगे और त्रिग्रही योग बनेगा। 

कार्तिक माह की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, कार्तिक अमावस्या का स्नान-दान 9 नवंबर 2026 को किया जाएगा। 

कार्तिक अमावस्या के दिन स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 1 मिनट से सुबह 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं विजय मुहूर्त का आरंभ दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर होगा और समाप्त दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर होगा।

पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत के शांति पर्व में भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कार्तिक अमावस्या का महत्व बताते हुए कहा है कि- यह मेरा प्रिय दिन है और इस दिन मेरी वंदना से मनुष्य के समस्त कष्ट दूर हो जाएंगे। इस साल कार्तिक अमावस्या दो दिन पड़ रही है जिस वजह से दिवाली पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा तो वहीं अमावस्या से जुड़ा स्नान-दान इत्यादि अनुष्ठान 9 नवंबर को किया जाएगा। 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या पर किए गए दान से न केवल मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।   कार्तिक अमावस्या के दिन स्नान-दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। ऐसे में अगर आप भी कार्तिक अमावस्या के दिन दान करना चाहते हैं तो इन चीजों का गरीब और जरूरतमंद को दान करें। इन चीजों का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल, राशि परिवर्तन और लग्न का विशेष स्थान :5 नवंबर 2026 को सूर्योदय के समय सूर्य तुला राशि में विराजमान रहेंगे। चंद्रमा सिंह राशि में रहेंगे। मंगल कर्क राशि में स्थित होंगे। वहीं बुध और शुक्र दोनों तुला राशि में रहेंगे। देवगुरु बृहस्पति सिंह राशि में रहेंगे। शनि देव मीन राशि में स्थित होंगे। इसके अतिरिक्त राहु कुंभ राशि में तथा केतु सिंह राशि में विराजमान रहेंगे। इस प्रकार दिन की ग्रह स्थिति में तुला, सिंह और अन्य राशियों का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, भगवान विष्णु की पूजा करना तथा जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 का यह 309वां दिन होगा। इस दिन दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। ऋतु शरद है।

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