4 नवंबर 2026, बुधवार 11:03amरमा एकादशी प्रारंभ, पलाश के पेड़ की पूजा करनी चाहिए

4 नवंबर 2026, बुधवार विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि) मास एवं पक्ष: कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष सुबह 11:03 AM तक, इसके बाद एकादशी (रमा एकादशी) प्रारंभ , नक्षत्र: पूर्व फाल्गुनी (अगली सुबह 03:29 AM तक, उपरांत उत्तर फाल्गुनी) योग: ब्रह्म योग (सुबह 08:00 AM तक, उपरांत इंद्र योग) सूर्योदय: सुबह 06:35 AM सूर्यास्त: शाम 05:34 PM राहुकाल: दोपहर 12:04 PM से 01:27 PM तक ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 AM से 05:43 AM तक By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & Founder Sadhak; Bagla Mukhi Peeth Dehradun 9412932030

कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी रमा एकादशी 5 नवंबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।  भक्त इस दिन भगवान विष्णु सहित माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं उनके जीवन में सुख-सुविधाओं की कभी कमी नहीं होती।

गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं: बुधवार के दिन भगवान गणेश को 11 या 21 दूर्वा (घास) की गांठ अर्पित करें। इससे विघ्नहर्ता सभी बाधाएं दूर करते हैं। मंदिर में हरी मूंग की दाल या हरे वस्त्र का दान & गौमाता को अपने हाथों से ताजा हरा चारा या पालक खिलाएं। मंदिर में बैठकर “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र की कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें। हरा हकीक धारण करने या पूजा घर में रखने से मानसिक शांति मिलती है।

एकादशी तिथि समाप्त5 नवंबर 2026 को 10:35 AM बजे

भगवान विष्णु को पंचामृत में तुलसीदल डालकर जरूर चढ़ाएं। भगवान विष्णु और गणेश जी की आरती करें।

4 नवंबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि और बुधवार का दिन है। कल दशमी तिथि दोपहर पहले 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगी, उसके बाद एकादशी तिथि लग जाएगी। कल सुबह 8 बजकर 1 मिनट तक ब्रहम योग रहेगा, उसके बाद इंद्र योग लग जायेगा। साथ ही कल 4 नवंबर को देर रात 3 बजकर 30 मिनट तक पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र लग जायेगा। 

कार्तिक कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि – 4 नवंबर को दोपहर पहले 11 बजकर 04 मिनट तक ब्रह्म योग- 4 नवंबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट तक  पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र- 4 नवंबर को देर रात 3 बजकर 30 मिनट तक

ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:43 ए एम प्रातः सन्ध्या- 05:17 ए एम से 06:35 ए एम अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं विजय मुहूर्त- 01:54 पी एम से 02:38 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 05:34 पी एम से 06:00 पी एम

ब्रह्म योग रहेगा, उसके बाद इंद्र योग लग जाएगा। इंद्र योग के दौरान सरकारी कामों में सफलता जरूर मिलती है। साथ ही देर रात पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। यह 27 नक्षत्रों में से ग्यारहवां नक्षत्र है। इसका प्रतीक चिह्न चारपाई की आगे वाली पैर को माना जाता है। इस नक्षत्र की राशि सिंह है। साथ ही ढाक (पलाश) का पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र से संबंध बताया गया है। इस नक्षत्र में जन्में लोगों को पलाश के वृक्ष को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। इसकी लकड़ियों, फूलों या उससे बनी किसी अन्य चीज को उपयोग में नहीं लेना चाहिए। इसके बजाय पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोगों को पलाश के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।

एकादशी को रम्भा एकादशी भी कहते हैं। मान्यताओं अनुसार इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है। साथ ही जीवन के समस्त पापों का नाश हो जाता है। 

रमा एकादशी मंत्र

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
  • कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने । प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।
  • नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
  • ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरायेः अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय् त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्रीधनवन्तरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः ॥

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