12 अगस्त 2026, बुधवार, श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या, तुलसी और पीपल की पूजा & उपाय करने से किस्मत तक बदल सकते हैं , सूक्ष्म उपाय

धार्मिक दृष्टि से हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व &  शुभ तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा & इस अमावस्या पर मुख्य रूप से तुलसी और पीपल के पेड़ की पूजा  & पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए भी सर्वश्रेष्ठ  & कुछ खास उपाय करने से किस्मत तक बदल सकते हैं & BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN UTTRAKHAND Mob. 9412932030

12 अगस्त 26: सूक्ष्म उपाय: 4 लौंग, 1 इलायची और 7 काली मार्च : सरसों के तेल का दीया गोधूली बेला में यह सामग्री डाल कर प्रज्ज्वलित करना है,,और पीपल के वृक्ष के नीचे रख कर कुछ विशेष उपाय का उच्चारण करना है ,,, उस श्लोक लिए संपर्क करे: 9412932030

  • श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि- 12 अगस्त को रात 11 बजकर 7 मिनट तक
  • व्यतिपात योग- दोपहर बाद 3 बजकर 26 मिनट तक
  • पुष्य नक्षत्र- 12 अगस्त को सुबह 8 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, उसके बाद आश्लेषा नक्षत्र लग जायेगा
  • 12 अगस्त 2026 विशेष- हरियाली अमावस्या
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:23 ए एम से 05:06 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 04:44 ए एम से 05:49 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त- 02:38 पी एम से 03:31 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:03 पी एम से 07:25 पी एम

व्यतिपात योग के दौरान कोई भी नया काम शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता है। इस योग के दौरान यदि आप किसी का भला करना भी चाहेंगे, तो उसकी नजर में आप ही बुरे बन सकते हैं। कल सुबह 8 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र लग जाएगा। आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में आश्लेषा नौवां नक्षत्र है। इसका अर्थ होता है- आलिंगन। इस नक्षत्र की राशि कर्क है और स्वामी ग्रह बुध हैं। पेड़-पौधों में आश्लेषा नक्षत्र का संबंध नागकेसर के पेड़ से बताया गया है। जिन लोगों का जन्म आश्लेषा नक्षत्र में हुआ हो, उन्हें नागकेसर के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। 

हरियाली अमावस्या 2026 पर सुबह और शाम तुलसी के सामने घी का दीपक जरूर जलाएं।  & पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक &  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप  & कच्चे चावल और थोड़ा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। & अर्घ्य देते समय ॐ सोम सोमाय नमः मंत्र का जाप &  लाल कपड़े में 11 गोमती चक्र, 7 कौड़ियां और एक श्री यंत्र रखें। इसके बाद इसे आप अपनी घर की तिजोरी या जहां भी धन और गहने रखते हैं उस स्थान पर रख दें। 

 सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को यानी बुधवार के दिन लगने जा रहा है। यह खग्रास सूर्य ग्रहण होगा जिसकी शुरुआत रात 09 बजकर 04 मिनट पर होगी, जबकि समाप्ति देर रात 01 बजकर 28 मिनट पर होगी। यह सूर्य ग्रहण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देगा। 

भारतीय समयानुसार 12 अगस्त 2026 को लगने वाले सूर्य ग्रहण का प्रारंभ रात 09:04 बजे से होगा और रात 11:16 बजे ग्रहण अपने चरम पर होगा। वहीं ग्रहण की समाप्ति देर रात 01:28 बजे होगी।  12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

सावन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि भी कहा जाता है। बुधवार का दिन बुद्धि के दाता भगवान गणेश और बुध देव की पूजा के लिए समर्पित होता है, जबकि सावन की चतुर्दशी तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए अति उत्तम मानी गई है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, और धतूरा अर्पित करने के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं, बुद्धि और व्यापार में वृद्धि होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

12 अगस्त 2026 को पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व रहेगा। सावन मास की यह अमावस्या धार्मिक अनुष्ठानों, पितरों के स्मरण और प्रकृति से जुड़े पर्वों के कारण खास मानी जाती है। आज हरियाली अमावस्या, श्रावण अमावस्या और दर्श अमावस्या जैसे अवसर भी हैं।

कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि रात 11:07 PM तक रहेगी। अमावस्या को भारतीय धार्मिक परंपरा में आत्मचिंतन, पितरों के स्मरण और विशेष पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन में पड़ने के कारण आज की अमावस्या का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

आज बुधवार है, जिसे बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है। शिक्षा, लेखन, संवाद और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े कार्यों के लिए बुधवार को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि अमावस्या के कारण आज धार्मिक गतिविधियों और पारंपरिक अनुष्ठानों का पक्ष भी प्रमुख रहेगा।

आज की अमावस्या केवल तिथि परिवर्तन का दिन नहीं है, बल्कि हरियाली अमावस्या और सावन की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा अवसर भी है। ऐसे में पूजा-पाठ के साथ प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी दिन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक

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