1 अप्रैल, शुभ योग एक साथ & चैत्र पूर्णिमा दो दिनों की, हनुमान जी,श्री राम, माता सीता की विशेष कृपा, उपाय?  3 अप्रैल से वैशाख, 1 अप्रैल 2026 शुरुआत नहीं है,धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण  & 1 अप्रैल चन्द्रशेखर संस्थापक साधक बगला मुखी पीठ देहरादून नई दिल्ली उपलब्ध 9412932030

Chandra Shekhar Joshi
Awardy : Aadi Guru shankaracharya Sanatani Sewa Puruskar & Founder President & Sadhak
Mahamai Peetambra shree Bagla Mukhi Shakti Peeth
Dehradun Uttrakhand & President Uttrakhand: Rastriya shashkat Hindu Maha Sangh & President Uttrakhand: Rashtriya Saint Suraksha Parishad (HQ Gujrat)

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01 अप्रैल 2026 को चंद्रमा का गोचर बुध के स्वामित्व वाली राशि कन्या में होगा। इस दिन चतुर्दशी तिथि सुबह 07 बजकर 07 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद पूर्णिमा लग जाएगी। 01 अप्रैल को कई तरह के शुभ योग एक साथ बनेंगे & 1 अप्रैल 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन पूर्णिमा उपवास और पैन्गुनी उथिरम जैसे पावन पर्व मनाए जाते हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

चैत्र शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि – 1 अप्रैल को पूरा दिन पूरी रात पार करके 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक & ब्रह्म मुहूर्त: 04:39 ए एम से 05:25 ए एम तक प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:11 ए एम तक विजय मुहूर्त: 02:30 पी एम से 03:20 पी एम तक गोधूलि मुहूर्त: 06:38 पी एम से 07:01 पी एम तक सायाह्न सन्ध्या: 06:39 पी एम से 07:48 पी एम तक

चैत्र शुक्ल महीने की पूर्णिमा इस बार दो दिनों की पड़ रही है और जब पूर्णिमा दो दिनों की होती है तो पहले दिन व्रतादि की पूर्णिमा होती है। बता दें कि पूर्णिमा तिथि मंगलवार सुबह 10 बजकर 4 मिनट तक ही रहेगी। पूर्णिमा तिथि में पूर्ण चंद्रमा 1 अप्रैल की रात में उदयमान रहेगा। ऐसे में 1 अप्रैल 2026 को ही पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा और 2 अप्रैल के दिन उदया तिथि पूर्णिमा में स्नान दान किया जाएगा।

2 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। पूर्णिमा के दिन व्रत रखने के साथ ही स्नान-दान का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पूर्णिमा के दिन गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, धन, वस्त्र और तिल का दान करने से धन-धान्य में बरकत होती है। चैत्र पूर्णिमा का दिन अत्यंत ही लाभकारी माना गया है। ऐसे में इस दिन शाम या रात के समय इन कामों को करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। 

3 अप्रैल से वैशाख माह का आरंभ हो रहा है। धार्मिक दृष्टि से इस महीने का विशेष महत्व है। वैशाख मास में श्री विष्णु के मधुसूदन स्वरूप की पूजा करने का विधान है, इसलिए वैशाख मास का एक नाम माधव मास भी है। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में भी आया है- न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।  न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।।  अर्थात् माधवमास, यानी वैशाख मास के समान कोई मास नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। माधवमास में जो व्यक्ति श्रद्धाभाव से दान, जप, हवन और स्नान आदि शुभ कार्य करता है, उसका अक्षयफल उस व्यक्ति को प्राप्त होता है। वैशाख मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से अश्वमेघ के समान फल मिलता है यानी जीवन में आपकी तरक्की ही तरक्की होती है। तो आइए जानते हैं कि वैशाख माह में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

तुलसी पूजा

चैत्र पूर्णिमा के दिन शाम के समय तुलसी के पास घी का दीया जलाएं और तुलसी पूजन करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और घर में सौभाग्य-समृद्धि का आगमन होता है। इसके अलावा पूर्णिमा की सुबह तुलसी में जल भी जरूर चढ़ाएं। तुलसी में जल अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

रसोई घर में जलाएं दीया

रसोई घर वो जगह है जहां से पूरे परिवार का भरण पोषण होता है। रसोई घर में  मां अन्नपूर्णा का वास होता है। तो चैत्र पूर्णिमा के दिन रात के समय रसोई घर में दीया जरूर जलाएं। इससे आपका घर अन्न-धन से सदैव भरा रहेगा।

घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीया

चैत्र पूर्णिमा की रात घर के मुख्य द्वार पर दीया जलाएं। इस उपाय को करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है।  मुख्य द्वार पर दीया जलाने से आर्थिक तंगी दूर होती है और कभी पैसों की कमी नहीं होती है।

दीपदान

चैत्र पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में दीपदान अवश्य करें। पूर्णिमा के दिन दीपदान करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है। इसके साथ ही पूर्वजों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

चैत्र पूर्णिमा का व्रत हैं तो इस पौराणिक कथा का पाठ :

चैत्र पूर्णिमा व्रत पौराणिक कथा

चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा, एक नगर में सेठ-सेठानी रहते थे। सेठानी भगवान विष्णु की परम भक्त थीं और रोजाना श्री हरि की भक्ति भाव से उपासना करती थी। लेकिन सेठानी का पूजा करना सेठ को बिल्कुल पसंद नहीं था। नारायण की भक्ति की वजह से एक दिन सेठ ने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद सेठानी घर से निकल कर जंगल की तरफ चली गई। जंगल में सेठानी ने देखा कि चार आदमी मिट्टी खोद रहे थे। तभी सेठानी ने उनके पास जाकर कहा कि मुझे भी काम पर रख लो। उन आदमियों ने सेठानी को नौकरी पर रख लिया। लेकिन काम के दौरान सेठानी के हाथ में छाले पड़ गए। तब उन चार आदमियों ने सेठानी से काम छोड़ने के लिए कहा। उन्होंने सेठानी से कहा कि आप हमारे घर का काम कर दो। सेठानी के मान जाने पर वे उसे अपने घर ले गए। वहां वे चारों आदमी चार मुट्ठी चावल लाते और उसे बांटकर खा लेते हैं। ये देख सेठानी को बहुत बुरा लगता। इसे देख सेठानी ने उन चारों आदमी को 8 मुट्ठी चावल लाने को कहा।  सेठानी के कहने पर चारों आदमी अगले दिन 8 मुट्ठी चावल लाए। उस आठ मुट्ठी चावल को सेठानी ने पका कर भोजन बनाया और उसे भगवान विष्णु को भोग लगाकर चारों आदमी को परोस दिया। जब चारों आदमी ने उस भोजन को खाया, तो वह भोजन उन लोगों को बहुत स्वादिष्ट लगा और उन्होंने सेठानी से कहा कि सुनों बहन आज जो तुमने खाना बनाया वह बहुत ही स्वादिष्ट है। यह सुनकर सेठानी ने कहा, यह भोजन भगवान विष्णु का झूठा है। इसी वजह से आप लोगों को यह बहुत स्वादिष्ट लग रहा है। 

सेठानी के जाने के बाद सेठ भूखा रहने लगा। आसपास के लोग उसे देखकर ताना मारते थे कि यह आदमी सिर्फ अपनी पत्नी यानि सेठानी की वजह से ही भोजन किया करता था। यह सुनकर सेट एक दिन अपनी पत्नी सेठानी को खोजने के लिए जंगल की तरफ निकल पड़ा। रास्ते में उसे वही चार आदमी मिट्टी खोदते हुए दिखाई दिए। उसे देखकर सेठ ने कहा सुनों भाई क्या तुम मुझे काम पर रख सकते हो। तब चारों आदमी ने उसे भी काम पर रख लिया। लेकिन मिट्टी खोदने की वजह से सेठ के हाथों में छाले पड़ने लगे और उसके बाल उड़ गए। यह देखकर उस चारों आदमी ने कहा, सुनों भाई तुम यह काम रहने दो। तुम अच्छे घर के लगते हो, तुम हमारे घर चलो वहां कुछ काम कर लेना। तब सेठ ने उन चारों की बात मान ली और वह उनके साथ उनके घर के तरफ चल पड़ा।

घर पहुंचने के बाद सेठ ने सेठानी को देखते ही पहचान लिया। लेकिन सेठानी घूंघट में थी इस वजह से वह अपने पति यानी सेठ को नहीं पहचान पाई। हर दिन की तरह इस दिन भी सेठानी ने भोजन बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाकर सभी को खाना परोस दिया। जैसे ही सेठानी सेठ को भोजन देने लगी तभी भगवान विष्णु ने सेठानी का हाथ पकड़ लिया और कहा ये तुम क्या कर रही हो। यह सुनकर सेठानी ने कहा, मैं कुछ नहीं कर रही हूं, मैं तो भोजन दे रही हूं भगवान विष्णु ने मेरा हाथ पकड़ लिया है।

तब चारों भाई ने सेठानी से कहा हमें भी भगवान विष्णु के दर्शन कराओ। ऐसा कहने पर सेठानी भगवान विष्णु से हाथ जोड़कर अनुरोध करने लगी हे, प्रभु आप मेरी तरह इन्हें भी दर्शन दें। तब भगवान विष्णु वहां प्रकट हो गए। यह देखकर सेठ ने सेठानी से क्षमा मांगी और उसे अपने घर साथ चलने को कहा। तब चारों भाइयों ने अपनी बहन को बहुत सारा धन देकर विदा किया। उसी समय से सेठ भी भगवान विष्णु के भक्त बन गया और उनकी पूजा श्रद्धा पूर्वक करने लगा। ऐसा करने से उसके घर में फिर से धन की बरसात हो गई। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से  सत्यनारायण भगवान, हनुमान जी के साथ प्रभु श्री राम और माता सीता की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।

वैशाख माह में क्या करना चाहिए?

  • वैशाख मास में जल दान अत्यंत ही पुण्यकारी माना जाता है। तो इस माह में  पानी के घड़े को दान करें। संभव हो तो सार्वजनिक जगह पर प्याऊ लगवाएं।
  • वैशाख माह में पंखा, छाता और चप्पल का दान करें। इसके अलावा वैशाख मास में सत्तू, खरबूजा  और अन्न का दान भी करें।
  • वैशाख में गंगा स्नान करना भी फलदायी होता है। अगर गंगा स्नान करना संभव नहीं है तो घर में नहाने वाली में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • वैशाख माह में भगवान विष्णु की उपासना बहुत ही फलदायी होता है। इस माह में प्रतिदिन नारायण की पूजा करें। रोजाना ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
  • तुलसी नारायण को अति प्रिय है तो वैशाख माह में तुलसी की पूजा जरूर करें। 
  • वैशाख माह में विष्णु जी के साथ ही माता लक्ष्मी की भी आराधना करें। घर में समृद्धि और संपन्नता बनी रहेगी।
  • वैशाख महीने में रोजाना सूर्यदेव और माता तुलसी को जल अर्पित करें।

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