13 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि & सोमवार, 13 अप्रैल को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी पर धनिष्ठा और शुभा योग का संयोग बनेगा। इस दिन चंद्रमा का गोचर शनि के स्वामित्व वाली राशि कुंभ में रहेगा। इस तिथि पर धनिष्ठा नक्षत्र और दूसरे तरह के योगों का संयोग रहेगा। भगवान विष्णु के नामों का जप और कीर्तन करें & राजनीतिक उथल-पुथल एवं प्राकृतिक आपदाओं की आशंका & राजनीतिक बदलाव होंगे। सत्ता संगठन में परिवर्तन होगा। 13 अप्रैल 2026 की वरुथिनी एकादशी बेहद खास & आने वाला समय आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। 13 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का सुनहरा अवसर & ‘वरुथिनी’ शब्द का अर्थ होता है रक्षा कवच। यानी यह एकादशी हमें पापों, कष्टों और नकारात्मकता से बचाने वाली ढाल है।
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By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & Bagla Mukhi Peeth ; 9412932030
मीन राशि और एकादशी तिथि दोनों के स्वामी भगवान विष्णु हैं. लिहाजा 13 अप्रैल 2026 को एकादशी पर 5 राशियों को श्रीहरि और लक्ष्मी जी का धन-सफलता और सौभाग्य का विशेष आशीर्वाद
13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी है और इस दिन मीन राशि में 4 ताकतवर ग्रह सूर्य, बुध, मंगल और शनि मिलकर चतुर्ग्रही योग बना रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में चतुर्ग्रही योग को बहुत शुभ माना गया है. उस पर सुख, सौभाग्य, सफलता देने वाले गुरु ग्रह की राशि में इस योग का बनना अत्यंत लाभदायी है. यह योग भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा दिलाएगा. जानिए एकादशी पर बन रहे चतुर्ग्रही योग का लाभ किन 5 भाग्यशाली राशियों को मिलने वाला है

चतुर्ग्रही योग मीन राशि में ही बन रहा है और इसके जातकों को धन लाभ कराएगा. साथ ही समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. लोग आपके रचनात्मक कार्यों से प्रभावित होंगे. 13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी है और इस दिन मीन राशि में 4 ताकतवर ग्रह सूर्य, बुध, मंगल और शनि मिलकर चतुर्ग्रही योग बना रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में चतुर्ग्रही योग को बहुत शुभ माना गया है. उस पर सुख, सौभाग्य, सफलता देने वाले गुरु ग्रह की राशि में इस योग का बनना अत्यंत लाभदायी है. यह योग भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा दिलाएगा. जानिए एकादशी पर बन रहे चतुर्ग्रही योग का लाभ किन 5 भाग्यशाली राशियों को मिलने वाला है.
चतुर्ग्रही योग मीन राशि में ही बन रहा है और इसके जातकों को धन लाभ कराएगा. साथ ही समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. लोग आपके रचनात्मक कार्यों से प्रभावित होंगे.
एकादशी व्रत करने से साधक के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. इस साल 13 अप्रैल 2026, सोमवार को वरुथिनी एकादशी है. वरुथिनी एकादशी पर शुभ योग और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है. वहीं सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है. सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें, बेलपत्र-धतूरा अर्पित करें.

दिवस विशेष – वरुथिनी एकादशी व्रत, श्री बल्लभाचार्य जयंती, पंचक, महापात रात्रि 12-12 से रात्रि 4-05 तक, वरुथिनी एकादशी की शुरुआत 12 अप्रैल रात 1:16 बजे से हो रही है और इसका प्रभाव 14 अप्रैल रात 1:08 बजे तक रहेगा।
व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा और पारण (व्रत खोलना) 14 अप्रैल को सुबह सूर्योदय से 8:31 बजे तक करना शुभ माना गया है।
भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि इस व्रत का फल 10,000 वर्षों की तपस्या और सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्वर्ण दान के बराबर होता है।
13 अप्रैल 2026, सोमवार विशेष रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। आज वरुथिनी एकादशी व्रत, शुभ योग और कई शुभ चौघड़िया बन रहे हैं, जो नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माने जाते हैं। वरुथिनी एकादशी का पर्व भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 13 अप्रैल को पड़ रही है और इस बार इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ ग्रह योग बन रहे हैं।
भगवान श्री विष्णु की उपासना करें। बंदर, पहाड़ी गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं। रोज उगते सूर्य को अर्घ्य देना शुरू करें। रविवार के दिन उपवास रखे। रोज गुढ़ या मिश्री खाकर पानी पीकर ही घर से निकलें। जन्मदाता पिता का सम्मान करें, प्रतिदिन उनके चरण छुकर आशीर्वाद लें । भगवान सूर्य की स्तुति आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें ।

14 अप्रैल को ग्रहों के राजा सूर्य मेष राशि में (Sun Transit 2026) गोचर करेंगे। सूर्य आत्मा का कारक माना जाता है। सूर्य के मजबूत रहने से करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है। व्यक्ति ऊंचा मुकाम हासिल करने में कामयाब होता है। इसके लिए ज्योतिष लोगों को सूर्य मजबूत करने की सलाह देते हैं।
सूर्य को मजबूत करने के लिए रोजाना सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। साथ ही सूर्य चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा, पिताजी के साथ संबंध मधुर रखना चाहिए। पिता के आशीर्वाद से जातक अपने जीवन में खूब तरक्की और उन्नति करता है।
रुथिनी का पर्व भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 13 अप्रैल, सोमवार को पड़ रही है। इस बार यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और प्रभावशाली माना जा रहा है, क्योंकि ग्रहों की स्थिति एक दुर्लभ संयोग बना रही है। सूर्य, बुध, मंगल और शनि का मीन राशि में एक साथ आना जीवन में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। चंद्रमा और गुरु की स्थिति भी नए अवसर और तरक्की के द्वार खोल सकती है। हालांकि राहु और राज पंचक के प्रभाव के कारण हर कदम सोच-समझकर उठाने की जरूरत होगी, इसलिए यह एकादशी जहां लाभ और प्रगति के योग बना रही है, वहीं संयम बरतने की भी सलाह दे रही है।
चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित होंगे और मिथुन राशि में विराजमान गुरु की उन पर दृष्टि रहेगी। यह योग व्यक्ति के विचारों को स्पष्टता देता है और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाता है। ऐसे समय में मन अपेक्षाकृत शांत रहता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी समझदारी से काम ले पाता है। यह संयोग आध्यात्मिक झुकाव भी बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति भक्ति और आत्मचिंतन की ओर आकर्षित होता है।

वरुथिनी एकादशी के दिन सूर्य, बुध, मंगल और शनि जैसे प्रमुख ग्रह मीन राशि में एकत्र रहेंगे। मीन राशि को आध्यात्मिकता और आंतरिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इतने ग्रहों का एक साथ होना व्यक्ति को भीतर की ओर देखने और खुद को समझने का अवसर देता है। हालांकि बुध की स्थिति थोड़ी कमजोर मानी जा रही है, फिर भी अन्य ग्रहों का सहयोग इस समय को आत्मविकास के लिए अनुकूल बनाता है।
जहां एक ओर शुभ योग बन रहे हैं, वहीं राहु और राज पंचक की उपस्थिति यह संकेत देती है कि हर निर्णय सोच-समझकर लेना जरूरी है। जल्दबाजी या भावनाओं में आकर लिया गया फैसला नुकसान दे सकता है। इसलिए इस समय धैर्य और विवेक सबसे बड़ी ताकत होंगे।
ग्रहों के राजा कहे जाने वाले सूर्य देव 14 अप्रैल को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष राशि में सूर्य उच्च का फल देते हैं। ज्योतिष में सूर्य को एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। सूर्य को आत्मा और पिता का कारक भी कहा गया है। सूर्य शुभ होने पर व्यक्ति को उच्च पद की प्राप्ति होती है।
सूर्य 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेंगे। जहां पर ये इस राशि में 14 मई तक रहेंगे। मेष राशि सूर्यदेव की उच्च की राशि होते हैं और इस राशि के स्वामी ग्रह मंगल होते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कोई भी ग्रह जब अपनी उच्च राशि में रहता है तब इसका शुभ फल जातकों के जीवन पर पड़ता है। सूर्य के उच्च की राशि में गोचर करने से कई राशि के लोगों को फायदा मिलने के संकेत हैं।
सूर्य देव के मीन राशि में गोचर से मीन मलमास प्रारंभ हो जाता है । जिसकी वजह एक माह तक यानी सूर्य के मीन राशि में रहते विवाह आदि मंगल कार्यों पर रोक लग जाती है। सूर्य के मीन से निकलकर मेष राशि में गोचर के साथ मीन मलमास समाप्त हो जायेगा और इसकी वजह से रुके हुए मांगलिक कार्यक्रम, विवाह आदि फिर से शुरू हो जाएंगे।

द्वादशी पर पराया अन्न खाने से व्रत का पूरा पुण्य नष्ट हो सकता है। & गजेंद्र मोक्ष हमें सिखाती है कि जब जीवन में कोई सहारा नहीं बचता, तब भगवान का स्मरण ही अंतिम शक्ति बनता है। गजेंद्र ने संकट में भगवान को पुकारा और उन्हें मुक्ति मिली। यही इस एकादशी का सार है: पूर्ण श्रद्धा और समर्पण।