3 जून को अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी (विभुवन संकष्टी) का व्रत, गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाएं, बड़े ग्रह राशि गोचर & कई ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन, ब्रह्मांड में ग्रहों का अनूठा दरबार सजेगा….

3 जून को अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी (विभुवन संकष्टी) का व्रत &  जून को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि बुधवार का दिन है। तृतीया तिथि बुधवार को रात 9 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। 3 जून को सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक शुभ योग रहेगा, उसके बाद शुक्ल योग लग जाएगा। साथ ही बुधवार देर रात 1 बजे तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। गणेश जी को 21 दूर्वा की गाठें भगवान गणेश का मंत्र का जाप करते हुए चढ़ाएं। साथ ही इस दिन मंदिर में या किसी जरूरतमंद को पीले फल, अनाज या पीले कपड़ों का दान करें। ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाएगी।

ब्रह्मांड में ग्रहों का अनूठा दरबार सजेगा…… BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob 9412932030; BAGLA MUKHI PEETH DDUN

2 जून को देवगुरु बृहस्पति का अपनी उच्च राशि में प्रवेश & ज्योतिष शास्त्र में यह अत्यंत ही दुर्लभ  & सूर्य, बुध, मंगल, गुरु और शुक्र जैसे 5 बड़े ग्रह राशि गोचर करने जा रहे हैं इसके अलावा कई ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन &  ग्रह-नक्षत्र और गोचर के लिहाज से जून का महीना अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने कई बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। 2 जून को देवगुरु बृहस्पति का अपनी उच्च राशि में प्रवेश । ज्योतिष शास्त्र में यह अत्यंत ही दुर्लभ घटना & इस महीने में सूर्य, बुध, मंगल, गुरु और शुक्र जैसे 5 बड़े ग्रह राशि गोचर & अलावा कई ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन 

अधिक मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी को विभुवन संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। अधिक मास में आने के कारण विभुवन संकष्टी को अत्यन्त दुर्लभ माना जाता है क्योंकि यह 3 साल के बात आती है। विभुवन संकष्टी किसी भी चंद्र माह में पड़ सकती है अतः इसके लिए कोई निश्चित माह निर्धारित नहीं है। लेकिन माह के परिवर्तित होने से इसके नाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, अतः किसी भी माह में अधिक मास पड़ने पर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विभुवन संकष्टी के रूप में ही मनाया जाता है। अधिक मास होने के कारण इस दिन किए गए जप, तप, पूजन और व्रत आदि का सामान्य संकष्टी के व्रत की तुलना में अनेक गुणा फल प्राप्त होता है। यह उत्तम व्रत सभी मनोरथ पूर्ण करने और समस्त कष्टों का निवारण करने वाला माना जाता है।

  • धिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि- 03 जून 2026 को रात 9 बजकर 22 मिनट तक
  • शुभ योग- 03 जून को सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक शुभ योग रहेगा, उसके बाद शुक्ल योग लग जाएगा।
  • पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र- 03 जून को देर रात 1 बजे तक
  • 02 जून 2026 व्रत-त्यौहार- संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत (विभुवन संकष्टी)
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ – जून 03, 2026 को 09:21 पी एम बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त – जून 04, 2026 को 11:30 पी एम बजे
  • संकष्टी के दिन चंद्रोदय का समय – 09:58 पी एम से 10:41 पी एम (4 जून 2026)

03 जून 2026 शुभ मुहूर्त 

  1. ब्रह्म मुहूर्त- 04:34 ए एम से 05:17 ए एम
  2. अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
  3. विजय मुहूर्त- 02:49 पी एम से 03:42 पी एम
  4. गोधूलि मुहूर्त- 07:12 पी एम से 07:34 पी एम
  5. अमृत काल- 07:37 पी एम से 09:24 पी एम
  • सूर्योदय- सुबह 5:22 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 7: 14 बजे
  • गुरु गोचर 2026
  • 2 जून 2026 को  02:25 ए एम बजे गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर & गुरु के इस गोचर से  बेहद शुभ हंस राजयोग का निर्माण हो रहा है, जो ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति देने वाला माना जाता है।
  • शुक्र गोचर  2026
  • 8 जून 2026 को शाम 5 बजकर 47 मिनट पर शुक्र कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र को सुख-वैभव, ऐश्वर्य और विलासिता का कारक माना जाता है। कर्क में गुरु पहले से मौजूद हैं इसलिए उनके साथ शुक्र की युति भी बनेगी। कर्क राशि में करीब 12 साल बाद गजलक्ष्मी राजयोग का निर्माण भी होगा, जो आर्थिक समृद्धि के द्वार खोलेगा।
  • सूर्य गोचर
  • जून में  ग्रहों के राजा सूर्य देव अपने मित्र ग्रह बुध की राशि मिथुन में गोचर करेंगे। 15 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर सूर्य मिथुन राशि में गोचर करेंगे। यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य मजबूत और उच्च स्थिति में हों, तो उसे समाज में भरपूर मान-सम्मान, उच्च पद-प्रतिष्ठा और सरकारी नौकरी की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही मजबूत सूर्य व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य भी प्रदान करता है।
  • मंगल गोचर
  • 21 जून 2026 को ऊर्जा और साहस के कारक मंगल देव अपनी स्वराशि मेष से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे।  21 जून को मंगल 12:07 ए एम बजे वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। 
  • बुध गोचर
  • 22 जून 2026 बुद्धि और व्यापार के कारक बुध देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन दोपहर 3 बजकर 41 मिनट पर बुध कर्क राशि में गोचर करें।
  • जून 2026 में ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन 
  • बुध नक्षत्र गोचर-  2 जून को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर बुध आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं।
  • सूर्य मृगशिरा नक्षत्र गोचर-  8 जून 2026 को दोपहर 1 बजकर 39 मिनट पर सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
  • सूर्य आर्द्रा नक्षत्र गोचर- 22 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में गोचर करेंगे।
  • मंगल नक्षत्र गोचर- 16 जून 2026 को सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर मंगल कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
  • गुरु नक्षत्र गोचर- 18 जून 2026 को रात 9 बजकर 32 मिनट पर गुरु का नक्षत्र परिवर्तन होगा। गुरु पुष्य नक्षत्र में गोचर करेंगे।
  • शुक्र पुष्य नक्षत्र गोचर-  11 जून 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर शुक्र पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 
  • शुक्र अश्लेषा नक्षत्र गोचर- 23 जून 2026 को मध्यरात्रि 2 बजकर 12 मिनट पर शुक्र अश्लेषा नक्षत्र में गोचर करेंगे।
  • राहु नक्षत्र गोचर- 30 जून 2026 को रात 11 बजकर 7 मिनट पर राहु धनिष्ठा में गोचर करेंगे।

संकष्टी चतुर्थी हर महीने में पड़ती है लेकिन अधिक मास में आने वाली संकष्टी का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिक मास हर तीसरे साल में आता है इसी कारण से इस महीने में आने वाले त्योहार दुर्लभ माने जाते हैं। इस बार अधिक मास ज्येष्ठ महीने में लगा है जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस बीच 3 जून में विभुवन संकष्टी चतुर्थी & विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से जन्म-जन्म के पापों से छुटकारा मिल जाता है और भगवान गणेश की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस संकष्टी का खास संयोग ढाई साल में सिर्फ एक बार बनता है। 

विभुवन संकष्टी चतुर्थी 3 जून 2026 की रात 9 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 4 जून की रात 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। चूंकि ये व्रत चंद्रमा के दर्शन करने के बाद खोला जाता है इसलिए भक्त 3 जून को व्रत रखेंगे और इसी रात चांद को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूर्ण करेंगे। बता दें 3 जून को चंद्रोदय समय रात 10:04 बजे का है। मोदक या बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाएं। फिर विभुवन संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें। इसके बाद गणेश जी की आरती करके उन्हें भोग लगाएं। रात को एक पात्र में दूध, गंगाजल और शहद मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद अपना व्रत खोल लें।

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