18 जून 2026 गुरुवार अत्यंत दुर्लभ और महाशुभ संयोग, गुरु ग्रह शनि के नक्षत्र पुष्‍य में प्रवेश & 18 अगस्त तक तक रहेंगे, दुर्लभ योग में उपाय, नकारात्मक ऊर्जा कोसों दूर & 21 जून को ज्योतिष की दुनिया में धमाकेदार और पावरफुल हलचल 

दुर्लभ योग में करें ये 5 उपाय केसर का तिलक:गुरु ग्रह का सीधा संबंध पीले रंग और खुशहाली से है। इस गोचर के दौरान रोज सुबह स्नान करने के बाद अपने माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं। इससे आपकी कुंडली में गुरु मजबूत होंगे, समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और नकारात्मक ऊर्जा आपसे कोसों दूर रहेगी।

हिंदू पंचांग के अनुसार आज शुद्ध ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति देव और जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए परम फलदायी माना जाता है। आज सुबह तक नक्षत्रों का राजा ‘पुष्य नक्षत्र’ भी विद्यमान रहेगा, जो इस दिन की शुभता को और बढ़ा रहा है। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 से सुबह 04:42 तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:20 से शाम 07:41 तक।  राहुकाल: दोपहर 02:07 से शाम 03:52 तक (गुरुवार को दोपहर के बाद राहुकाल होता है, इस दौरान शुभ कार्यों से बचें)।

विष्णु सहस्रनाम का पाठ: पुष्य नक्षत्र के देवता खुद बृहस्पति हैं और भगवान विष्णु इसके प्रधान देव हैं। इस गोचर अवधि में रोज या हर गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या उसे सुनें। अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ है या कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, तो इस उपाय से धन आगमन के नए रास्ते खुलेंगे।

 आज शुद्ध ज्येष्ठ मास का गुरुवार है, इसलिए आज भगवान विष्णु और केले के वृक्ष की पूजा करें। उन्हें पीले फल, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाएं। इस उपाय से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है, विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं और सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।

पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों का राजा और सबसे शुभ माना जाता है। जब यह नक्षत्र गुरुवार के दिन आता है, तो ‘गुरु-पुष्य योग’ का निर्माण होता है। इस महायोग में सोना (Gold), चांदी, भूमि, वाहन या किसी भी नए व्यापार की शुरुआत करना अत्यंत अक्षय फलदायी माना जाता है। इस दिन किए गए निवेश या खरीदारी में लगातार वृद्धि होती है।

 मंदिर में या किसी जरूरतमंद ब्राह्मण को पीले रंग की चीजें दान करें। दान में आप चने की दाल, केला, पीले वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें या हल्दी दे सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, गुरु के पुष्य नक्षत्र में रहने के दौरान किया गया पीली वस्तुओं का दान घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होने देता।

बृहस्पति यानी गुरु ग्रह 18 जून को शनि के नक्षत्र पुष्‍य में प्रवेश कर जाएंगे जहां वे 18 अगस्त तक रहेंगे। पुष्य को ‘नक्षत्रों का राजा’ माना जाता है, जिसके देवता स्वयं बृहस्पति हैं और स्वामी शनि देव हैं। चूंकि गुरु इस समय अपनी सबसे शक्तिशाली (उच्च) स्थिति में हैं, इसलिए यह नक्षत्र परिवर्तन अधिकांश राशियों के लिए सकारात्मक रहेगा। इससे कर्क, धनु, कन्या, वृश्‍चिक और मकर राशि को लाभ होगा। 

गुरुवार को सुबह उठकर केले के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें। जल में थोड़ी सी हल्दी, चने की दाल और गुड़ जरूर मिला लें। इसके बाद वहां शुद्ध घी का दीपक जलाकर गुरु के मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का जाप करें।

 गुरुओं का पैर छूकर आशीर्वाद लेना न भूलें। उनका सम्मान करने से देवगुरु बृहस्पति बिना किसी उपाय के ही शुभ फल देने लगते हैं!

विक्यूम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)

शक संवत: 1948 (परावभ)

महीना: शुद्ध ज्येष्ठ मास (शुक्ल पक्ष)

तिथि: तृतीया-चतुर्थी तिथि- शाम 06:41 तक (इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ)

नक्षत्र: पुष्य नक्षत्र- सुबह 10:14 तक (इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र प्रारंभ)

योग: वज्र योग- सुबह 09:12 तक (इसके बाद सिद्धि योग)

करण: गर- सुबह 06:36 तक (इसके बाद वणिज करण शाम 06:41 तक)

सूर्योदय: सुबह 05:23 एएम

सूर्यास्त: शाम 07:21 पीएम

चंद्रराशि: कर्क राशि (दिन-रात)

अभिजित मुहूर्त (दिन का सबसे श्रेष्ठ समय): दोपहर 11:54 से दोपहर 12:50 तक।

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