19 जून 2026 पंचांग, ग्रहों की चाल और बदलते ज्योतिषीय प्रभाव & जून में वट पूर्णिमा & 25 जून 2026 साल की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी एकादशी निर्जला एकादशी & 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा

 जून 19, 2026, शुक्रवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि  &  19 जून 2026 का पंचांग दिनभर के समय, ग्रहों की चाल और बदलते ज्योतिषीय प्रभावों की आसान जानकारी & धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय गणनाओं का सुंदर संगम & 19 जून 2026 को शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि है और स्कन्द षष्ठी का विशेष पर्व भी मनाया जाएगा। पंचांग में बताए गए ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र और योग व्यक्ति की दिनचर्या और मानसिक ऊर्जा पर प्रभाव डाल सकते हैं। कई लोग शुभ कार्यों, निवेश, यात्रा या पूजा-पाठ से पहले पंचांग देखना शुभ मानते हैं।

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी, सिद्धार्थि संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), ज्येष्ठ | पंचमी तिथि 05:00 PM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र आश्लेषा 10:06 AM तक उपरांत मघा | हर्षण योग 02:53 PM तक, उसके बाद वज्र योग | करण बव 05:54 AM तक, बाद बालव 05:00 PM तक, बाद कौलव 04:17 AM तक, बाद तैतिल | जून 19 शुक्रवार को राहु 10:47 AM से 12:28 PM तक है | 10:06 AM तक चन्द्रमा कर्क उपरांत सिंह राशि पर संचार करेगा | सूर्योदय – 5:45 AM सूर्यास्त – 7:10 PM

आज का पर्व एवं त्योहार : गणेश चतुर्थी आज की भद्रा : प्रातः 08 बजकर 15 मिनट से सायं 07 बजे तक। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, शुक्रवार, 19 जून का दिन वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन सूर्य एवं बुध मिथुन राशि में स्थित हैं, जबकि चंद्रमा, गुरु और शुक्र कर्क राशि में विराजमान होकर भावनात्मक संवेदनशीलता, पारिवारिक सुख तथा आध्यात्मिक उन्नति के संकेत दे रहे हैं। आश्लेषा नक्षत्र और हर्षण योग के प्रभाव से दिन में कार्यों में सफलता एवं उत्साह की संभावना बनी रहेगी।.. वर्षा ऋतु के इस दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा, अतः यात्रा करते समय उचित सावधानी एवं शास्त्रीय उपायों का ध्यान रखना लाभकारी होगा।.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन अन्न-धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे जीवन के कष्ट कम होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती हैं। इसके अलावा सफेद चीजों के दान के प्रभाव से मानसिक शांति जीवन में आती हैं। आप अपनी क्षमता के अनुसार दान कर सकते हैं। पूर्णिमा के दिन अन्न-धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे जीवन के कष्ट कम होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती हैं। इसके अलावा सफेद चीजों के दान के प्रभाव से मानसिक शांति जीवन में आती हैं। आप अपनी क्षमता के अनुसार दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन वट पूर्णिमा व्रत भी रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करें और अखंड सौभाग्य की कामना करें। इस तिथि पर सुहागिनों को श्रृंगार का समान दें। यह उपाय रिश्तों में प्रेम बढ़ाता है।

मान्यता है कि, इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, केले, बेसन के लड्डू  अर्पित करने से घर में बरकत बनी रहती है और शुभ फल मिलने लगते हैं। इसके साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य दें। इससे मानसिक तनाव कम होता है और चंद्र ग्रह मजबूत होता है। पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा से होता है, इसलिए इस दिन सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। यह मन को शांत करता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है।

साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। खास बात यह है कि इस दिन शुभ रवि योग का संयोग भी बन रहा है। मान्यता है कि, इस योग में पूजा-पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

साल की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी एकादशी निर्जला जून महीने में आने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। खास बात यह है कि, इस दिन शुभ रवि योग का संयोग भी बन रहा है। माना जाता है कि, यह योग बेहद प्रभावशाली होता है, इसमें पूजा-पाठ करने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं और सभी प्रकार के दोषों से राहत मिलती हैं। हालांकि, पूजा हमेशा संपूर्ण सामग्रियों के साथ करनी चाहिए, यह शुभ होता है। ऐसे में आइए निर्जला एकादशी की संपूर्ण पूजन सामग्रियों को जानते हैं।

साल की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी एकादशी निर्जला जून महीने में आने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। खास बात यह है कि, इस दिन शुभ रवि योग का संयोग भी बन रहा है। माना जाता है कि, यह योग बेहद प्रभावशाली होता है, इसमें पूजा-पाठ करने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं और सभी प्रकार के दोषों से राहत मिलती हैं। हालांकि, पूजा हमेशा संपूर्ण सामग्रियों के साथ करनी चाहिए, यह शुभ होता है। ऐसे में आइए निर्जला एकादशी की संपूर्ण पूजन सामग्रियों को जानते हैं।

निर्जला एकादशी पूजा सामग्री

  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, पीले पुष्प और भगवान को अर्पित करने के लिए पीले वस्त्र
  • मौसमी फल, पंचमेवा और मिष्ठान व पीला वस्त्र
  • जल से भरा कलश और कुछ आम के पत्ते
  • नारियल, तुलसी दल और पंचामृत
  • पान, लौंग, सुपारी और कपूर
  • हल्दी, कुमकुम, अक्षत और पीला चंदन
  • धूप, दीपक, तिल और पूजा की मौली 
  • दान के लिए चने की दाल, गुड़, पंखा, पानी का घड़ा और पीले फल
  • मिठाई और लड्डू

भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

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