2 जुलाई 26, गुरुवार और चंद्रमा का गोचर &  भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक & पीले चंदन का तिलक लगाएं & ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप & 31 July Not Fortget : why?

2 जुलाई 2026 आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस दिन का मुख्य आकर्षण शुभ कार्यों के लिए ‘गजलक्ष्मी योग’ का निर्माण है। दिन का सबसे शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त) दोपहर 11:58 से 12:53 तक, सूर्योदयप्रातः 05:27 बजे ^ सूर्यास्तसायं 07:24 बजे & अभिजीत मुहूर्तदोपहर 11:58 से 12:53 तक & ब्रह्म मुहूर्तप्रातः 04:06 से 04:46 तक & राहुकाल (अशुभ)दोपहर 02:10 से 03:54 तक & घर से निकलने से पहले दही या जीरा का सेवन & ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप by Chandra Shekhar Joshi ; Call us 9412932030

भगवान विष्णु को तुलसी की मंजरी अर्पित करें। & बीमार व्यक्ति को दवाई का दान , सात्विक भोजन करें। & श्रीविष्णु स्तोत्र का पाठ  &  भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। पीले चंदन का तिलक लगाएं।

2026 का सातवां महीना जुलाई शुरू हो गया है। इस महीने में योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, चातुर्मास की शुरुआत और गुरु पूर्णिमा जैसे व्रत-पर्व आएंगे।

02 जुलाई 2026, गुरुवार… 2 जुलाई दिन है गुरुवार और चंद्रमा का गोचर & 2 जुलाई गुरुवार और चंद्रमा का गोचर हो रहा है उत्तराषाढ़ा उपरांत श्रवण नक्षत्र से। चंद्रमा इस गोचर में सूर्य से अष्टम भाव में रहेंगे जिससे सम योग बनेगा यह योग धन, सुख और करियर में अनुकूल प्रभाव देने वाला है। और साथ ही चंद्रमा पर गुरु, शुक्र और बुध की भी पूर्ण दृष्टि हो रही है जो राजयोग कारक है। गुरुवार के दिन गुरु और शुक्र की युति होने से गजलक्ष्मी योग का भी संयोग प्रभावी होगा। 2 जुलाई का दिन कर्क और मकर राशियों के लिए भाग्यशाली रहेगा,

2 जुलाई का राशिफल पंचांग की गणना के अनुसार कर्क और मकर राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से लाभदायक रहेगा क्योंकि क्योंकि चंद्रमा कल उत्तराषाढ़ा उपरांत श्रवण नक्षत्र से मकर राशि में संचार करेंगे। चंद्रमा के इस गोचर से सम योग बनेगा क्योंकि चंद्रमा सूर्य से अष्टम भाव में रहेंगे। जबकि चंद्रमा पर कल गुरु, शुक्र और बुध की पूर्ण दृष्टि रहेगी। ऐसे में कल 2 जुलाई को राजयोग का निर्माण होगा। शुक्र और गुरु के साथ होने से गजलक्ष्मी योग का प्रबल संयोग भी कल उपस्थित रहेगा। 

2 जुलाई 2026 (गुरुवार) को आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 9:38 बजे तक है, इसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी। आषाढ़ मास भगवान श्री हरि विष्णु और सूर्य देव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इन दिनों विष्णु जी की पूजा विशेष फलदायी होती है।  गुरुवार को रात 12:21 बजे से अगली सुबह तड़के 2:06 बजे तक अमृत काल रहेगा, जबकि सुबह 4:13 से 5:01 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इस दिन सुबह 5:49 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 9:11 बजे चन्द्रोदय और सुबह 8:26 बजे चन्द्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं। चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर करेंगे और इसके बाद यह श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। वहीं, 2 जुलाई 2026 (गुरुवार) को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा। इस दिन वैधृति योग सुबह 11:09 तक रहेगा, उसके बाद विषकुंभ योग लगेगा। गुरुवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 से दोपहर 12:57 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है। वहीं, राहुकाल दोपहर 2:10 से 3:54 बजे तक रहेगा, गुलिक काल सुबह 8:57 से 10:41 बजे तक रहेगा, और सुबह 05:28 से 07:12 बजे तक यमगंड रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है। वहीं, 2 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा मकर राशि में गोचर करेंगे। 2 जुलाई 2026 (गुरुवार) को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना आवश्यक भी है, तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए।

  • 3 जुलाई (शुक्रवार) को संकष्टी चतुर्थी का व्रत है। इस दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन शाम को चंद्र दर्शन करके अर्घ्य भी दिया जाता है।
  • 10 जुलाई (शुक्रवार) को योगिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। मान्यता है कि यह व्रत पापों के अशुभ फलों को खत्म करता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनाए रखता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है।
  • 12 जुलाई (रविवार) को रवि प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस तिथि पर भगवान शिव और देवी पार्वती का विशेष अभिषेक किया जाता है। शाम को यानी प्रदोष काल में भी शिव पूजा खासतौर पर करनी चाहिए।
  • 14 जुलाई (मंगलवार) को आषाढ़ अमावस्या है। इस दिन पितर देवता के लिए धूप-ध्यान और तर्पण आदि शुभ काम करना चाहिए। इस तिथि पर नदी स्नान और दान-पुण्य करने की भी परंपरा है।

15 जुलाई से 29 जुलाई तक रहेगा आषाढ़ शुक्ल पक्ष

  • 15 जुलाई (बुधवार) से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि शुरू हो जाएगी। इस नवरात्रि में तंत्र-मंत्र से जुड़े साधकों द्वारा देवी सती की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। सामान्य भक्त देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। गुप्त नवरात्रि 23 जुलाई तक रहेगी।
  • 16 जुलाई (गुरुवार) को पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलेगी। इसी दिन कर्क संक्रांति भी है। सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन सूर्य पूजा के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए।
  • 17 जुलाई (शुक्रवार) को चतुर्थी व्रत किया जाएगा। यह व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने की कामना से किया जाता है।
  • 25 जुलाई (शनिवार) को देवशयनी एकादशी है। इस तिथि से चार महीनों के लिए भगवान विष्णु के विश्राम का समय शुरू हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु का विशेष अभिषेक करें, व्रत करें। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाते हैं, इन चार महीनों में पूजा-पाठ, जप, ध्यान करने की परंपरा है। यह भगवान विष्णु के विश्राम का समय है, इसलिए इन चार महीनों में विवाह, मुंडन, जनेऊ जैसे संस्कारों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। चातुर्मास 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ खत्म होगा।
  • 26 जुलाई (रविवार) को रवि प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन सुबह-शाम शिव जी का विशेष अभिषेक करें।
  • 29 जुलाई (बुधवार) को आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा है। इस दिन अपने गुरु का पूजन करना चाहिए। गुरु को उपहार भेंट करें।
  • 30 जुलाई (गुरुवार) से सावन मास शुरू हो जाएगा। सावन मास में भगवान शिव का पूजन रोज करना चाहिए। अगर विधिवत पूजा नहीं कर पाते हैं, तो शिवलिंग पर जल, बिल्व पत्र और चंदन चढ़ाकर भी सामान्य पूजा कर सकते हैं।

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