29 जून 2026 (सोमवार) ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा & संत कबीर दास जी की जयंती

29 जून 2026 (सोमवार) को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जो बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन स्नान-दान और व्रत का विशेष महत्व होता है। 29 जून 2026 (29 June 2026), सोमवार (Monday) को राहु काल (Rahu Kaal) 7:10 AM – 8:55 AM तक है।  भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का करें अभिषेक, हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर करें सुंदरकांड का पाठ by Chandra Shekhar Joshi 9412932030

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा 29 जून को है। इसी तिथि पर संत कबीर दास जी की जयंती भी मनाई जाती है। इस बार ज्येष्ठ मास बहुत खास रहा, क्योंकि अधिकमास के कारण यह लगभग 59 दिनों का महीना है। मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि पर देव पूजा, नदी स्नान, दान-पुण्य के साथ ही पितरों के लिए धूप-ध्यान भी खासतौर पर करना चाहिए।

29 जून 2026 का पंचांग मुख्य रूप से ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि, मूल नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग है। यह दिन स्नान-दान और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दिन की शुरुआत सूर्य पूजा से करनी चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और फिर ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं। इसके बाद घर के मंदिर में अपने इष्टदेव का पूजन करें। दोपहर में करीब 12 बजे पितरों के लिए धूप-ध्यान करने से उन्हें तृप्ति मिलती है। घर-परिवार के मृत सदस्यों को पितर देव माना जाता है। प्रसन्न पितरों का आशीर्वाद मिलने से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और उन्नति बनी रहती है।

29 जून 2026, सोमवार को शुभ मुहूर्त की तलाश में हैं? आज अभिजित मुहूर्त 11:56 AM से 12:52 PM तक है, जो दिन का सबसे auspicious time माना जाता है। इसके अलावा अमृत चौघड़िया (Amrit Choghadiya) के समय (5:26 AM – 7:10 AM, 5:38 PM – 7:23 PM, 2:55 AM – 4:11 AM) भी अत्यंत शुभ है। आज तिथि पूर्णिमा (Purnima) और नक्षत्र मूल (Mula) है

29 जून 2026 को वास्तु मुहूर्त (Vastu Muhurat) और गृह प्रवेश मुहूर्त (Griha Pravesh Muhurat) के लिए राहु काल (7:10 AM – 8:55 AM) से बचें। House warming muhurat के लिए अभिजित मुहूर्त (11:56 AM – 12:52 PM) सर्वश्रेष्ठ है। आज शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जो गृह प्रवेश के लिए अनुकूल मानी जाती है। योग शुक्ल (Shukla) का प्रभाव भी विचारणीय है।

29 जून 2026 को विवाह मुहूर्त (Vivah Muhurat) और शादी का मुहूर्त (Shadi ka Muhurat) देख रहे हैं? आज की तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र मूल, और शुक्ल पक्ष है। Marriage muhurat और wedding muhurat के लिए शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, और त्रयोदशी तिथियाँ शुभ मानी जाती हैं। आज की तिथि और पक्ष विवाह के लिए अनुकूल हो सकते हैं।

29 जून 2026 को व्यापार मुहूर्त (business muhurat) और दुकान खोलने का मुहूर्त (dukan kholne ka muhurat) के लिए अमृत चौघड़िया और शुभ चौघड़िया का समय सर्वोत्तम है। New venture muhurat के लिए राहु काल (7:10 AM – 8:55 AM), यमगण्ड (10:39 AM – 12:24 PM), और गुलिक काल (2:09 PM – 3:53 PM) से बचें। आज करण विष्टि (Vishti) है जो व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करता है।

29 जून 2026 को यात्रा मुहूर्त (Yatra Muhurat) और सफ़र का मुहूर्त (Safar ka Muhurat) के लिए चर चौघड़िया (Char Choghadiya) सबसे उपयुक्त है – यह विशेष रूप से travel muhurat के लिए शुभ माना जाता है। आज सोमवार है, राहु काल 7:10 AM – 8:55 AM है – इस दौरान यात्रा न करें। दिन की अवधि 13 घंटे 57 मिनट है। सूर्य राशि मिथुन (Gemini) और चंद्र राशि धनु (Sagittarius) में है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…

  • पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, अलकनंदा, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। अगर किसी कारणवश नदी तक जाना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के दौरान सभी पवित्र नदियों, तीर्थस्थलों और देवस्थानों का ध्यान करना चाहिए। ऐसे स्नान करने से भी तीर्थस्नान के समान पुण्य मिल जाता है। ऐसी मान्यता है।
  • पूर्णिमा पर सुबह जल्दी जागना चाहिए और सूर्योदय के समय सूर्यदेव की पूजा से करनी चाहिए। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करें।
  • इस दिन भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी का विधिपूर्वक अभिषेक करना चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में दूध लेकर उसमें थोड़ी-सी केसर मिलाएं और इस केसर मिश्रित दूध से भगवान का अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से पुनः अभिषेक करें। भगवान को पीले रंग के सुंदर वस्त्र अर्पित करें। सुगंधित पुष्पों से उनका श्रृंगार करें। इत्र चढ़ाएं। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं, धूप-दीप प्रज्वलित करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते हुए आरती करें। पूजा के बाद परिवार और अन्य लोगों में प्रसाद वितरित करें, स्वयं भी लें।
  • घर के मंदिर में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप बाल गोपाल की भी विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। बाल गोपाल का अभिषेक करके नए वस्त्र पहनाएं। पुष्पों से श्रृंगार करें। कृं कृष्णाय नमः मंत्र का जप करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ अर्पित करें, धूप-दीप जलाकर आरती करें।
  • भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा के साथ ही श्रीमद् भगवद् गीता, विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों का पाठ भी कर सकते हैं। ग्रंथों का पाठ अपने समय के अनुसार कर सकते हैं।
  • पूर्णिमा पर भगवान हनुमान की भी विशेष पूजा की जाती है। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर पर्याप्त समय उपलब्ध हो, तो सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।
  • इस तिथि पर भगवान शिव का भी विधिवत अभिषेक करना चाहिए। अगर समय कम हो, तो शिवलिंग पर जल और बिल्व पत्र चढ़ाकर भी पूजा कर सकते हैं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
  • ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। किसी गोशाला में गायों के लिए हरी घास का दान करें, उनकी देखभाल के लिए यथाशक्ति धन का दान करें। मंदिरों में पूजा सामग्री का दान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद और असहाय लोगों को धन, वस्त्र, अनाज, जूते-चप्पल अथवा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना चाहिए, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और समाज में सेवा का भाव बढ़ता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं…

  • पवित्र स्नान करें – इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा, अलकनंदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। यदि किसी कारण नदी तक जाना संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के समय पवित्र नदियों और तीर्थों का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।
  • भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें – पूर्णिमा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए भी श्रेष्ठ मानी जाती है। दक्षिणावर्ती शंख से केसर मिले दूध से अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं, पीले वस्त्र अर्पित करें, पुष्प चढ़ाएं और तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते हुए आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें।
  • बाल गोपाल का अभिषेक करें – घर के मंदिर में विराजमान बाल गोपाल का अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र पहनाएं। फूलों से श्रृंगार करें और तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग अर्पित करें। कृं कृष्णाय नमः मंत्र का जप करते हुए धूप-दीप और आरती करें।
  • दान-पुण्य करें – पूर्णिमा पर दान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन गोशाला में हरी घास या गायों की सेवा के लिए आर्थिक सहयोग देना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मंदिर में पूजा सामग्री, जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, धन, जूते-चप्पल तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है।
  • संत कबीर दास का स्मरण करें – ज्येष्ठ पूर्णिमा पर संत कबीर दास जी की जयंती भी मनाई जाती है। इस अवसर पर उनके दोहों का अध्ययन, सत्संग और उनके बताए सत्य, सादगी तथा मानवता के संदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए।

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