30 जून 2026, मंगलवार& वर्षा ऋतु के पावन महीने ‘आषाढ़’ की शुरुआत & आषाढ़ मास का पहला दिन और मंगलवार का संयोग  & लाल पेड़े अर्पित करें & गुरुहरगोविन्द सिंह जी की जन्म जयन्ती

30 जून 2026, मंगलवार का दिन आषाढ़ कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा तिथि के साथ आरंभ हो रहा है। सूर्योदय के समय सूर्य मिथुन राशि में, चंद्रमा धनु राशि में तथा गुरु और शुक्र कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी की उपासना और जीवन में साहस, शक्ति व ऊर्जा की प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:05 से सुबह 04:45 तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:46 से दोपहर 03:42 तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:23 से शाम 07:44 तक।

30 जून 2026 (मंगलवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी。इस दिन सूर्योदय सुबह 05:12 बजे और सूर्यास्त शाम 06:53 बजे होगा। राहुकाल दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक रहेगा, जिसमें कोई भी नया कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है & 30 जून 2026 का दिन कई राशियों के लिए अलग-अलग संदेश लेकर आया है। आज ज्येष्ठ पूर्णिमा का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है, जिसका प्रभाव ग्रहों की चाल पर भी पड़ सकता है। कुछ राशियों के लिए यह दिन धन-लाभ, करियर में प्रगति और रिश्तों में मिठास लेकर आ रहा है, जबकि कुछ जातकों को सेहत और घर-परिवार से जुड़े मामलों में थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत होगी। 

तिथि: आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा (रात 01:54 बजे तक, उसके बाद द्वितीया)
नक्षत्र: मूल (रात 08:35 बजे तक, उसके बाद पूर्वाषाढ़ा)

अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:58 से 12:54 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 से 03:40 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:53 से 07:15 तक

राहुकाल: दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक

30 जून 2026 दिन मंगलवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है।। आज के विषय में लिखा है:-आषाढमासे प्रथमे च पक्षे निरभ्रदृष्टे रविमंडले च। विद्युन्नगर्जत्यथ नैव….. मेघोमासद्वयं तत्र न वर्षणंस्यात्। अर्थात:- ऐसा माना जाता है, कि आषाढ़ मास आते-आते ही बादल…… का आकास में आना और विद्युत की गर्जना हो जानी चाहिए, अन्यथा दो महीने तक वर्षा का अभाव….. हो जाता है। आज गुरुहरगोविन्द सिंह जी की जन्म जयन्ती है। सनातनियों को……. “गुरुहरगोविन्द सिंह जी के जन्म जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।

30 जून 2026 दिन मंगलवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है।। प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा….. तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है।। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात….. सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया….. गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि का निर्माण शुक्ल…… पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 0 डिग्री से 12 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में….. प्रतिपदा तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 181 से 192 डिग्री अंश तक होता है। प्रतिपदा तिथि के….. स्वामी अग्निदेव माने गए हैं। यदि प्रतिपदा तिथि रविवार या मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है।।

इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा प्रतिपदा तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है।। ऐसे समय शुभ कार्य करने की सलाह दी जाती है। सनातनी पञ्चांगों के अनुसार भाद्रपद माह की प्रतिपदा….. शून्य होती है। वहीं शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शिव का…….वास श्मशान में होता है। दूसरी ओर कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में शिव का पूजन करना चाहिए।। कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को जन्मा जातक धनी एवं बुद्धिमान होगा। उन पर माता की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है।। जातक चंद्रमा के बलवान होने के कारण मानसिक रूप से भी बलवान होते हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्ल पक्ष….. प्रतिपदा में जन्मा जातक बुरी लोगों की संगति में पड़कर बुरी आदतों के शिकार हो सकते हैं।

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