18 अगस्त 2026 को मंगलवार का दिन है। इस दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि शाम 05:51 बजे तक रहेगी, और राहुकाल दोपहर 03:41 बजे से शाम 05:19 बजे तक रहेगा। इस दिन मंगला गौरी व्रत, अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:58 से दोपहर 12:51 तक अमृत काल: दोपहर 01:54 से दोपहर 03:22 तक & हनुमान जी का ध्यान और ‘ॐ हं हनुमते नमः’ मंत्र का जप & कल्कि जयंती & शुक्ल योग रहेगा और साथ ही स्वाती नक्षत्र & सूर्योदय- सुबह 05:51 बजे सूर्यास्त- शाम 06:58 बजे & नक्षत्र: स्वाति पूर्ण रात्रि तक

जयपुर में है भगवान कल्कि का 300 साल पुराना मंदिर, जयपुर में भगवान कल्कि का मंदिर स्थित है। यह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना जयपुर शहर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय के आदेश पर करवाया गया था। कलयुग के भगवान कल्कि का राजस्थान में करीब 300 साल पुराना मंदिर है। भारत के राजस्थान राज्य में स्थित है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिकता के लिए ही नहीं बल्कि अपने गूढ़ रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर उन प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है जो कलयुग के अंत और भगवान कल्कि के अवतार से जुड़े हैं। बता दें कि भगवान विष्णु के 10वें अवतार भगवान कल्कि को ही माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कलियुग के अंत में भगवान कल्कि अवतार लेंगे। मान्यता है कि करीब 18वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण किया गया था। जयपुर शहर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय के आदेश पर कल्कि मंदिर का निर्माण करवाया गया था। कुछ संदर्भों के अनुसार, कल्कि मंदिर का निर्माण 1727 ईस्वी में शुरू हुआ था हालांकि, कई जगहों पर इसके निर्माण 1739 ईस्वी में माना गया है।
श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को महिलाएं मंगला गौरी व्रत रखती हैं। यह व्रत माता पार्वती (मंगला गौरी) को समर्पित है। यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुयोग्य वर की प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। श्रावण शुक्ल षष्ठी का दिन भगवान विष्णु के भावी अवतार ‘कल्कि’ की जयंती के रूप में भी जाना जाता है।
सावन के माह में आने वाले मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मतानुसार इस दिन व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। विवाह में आ रही परेशानियों का अंत भी इस दिन व्रत रखने से होता है। वहीं जो कन्याएं अविवाहित हैं उन्हें योग्य वर की प्राप्ति इस दिन व्रत रखने से हो सकती है। इस दिन व्रत रखने वालों को मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए तभी इस व्रत का शुभ फल प्राप्त होता है।
सावन में भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो!; BY CHANDRASHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN 9412932030
ज्योतिषीय संकेत;आंदोलनों के तेज होने के संकेत: सूर्य के राशि प्रवेश के समय बनने वाले संक्रांति कुंडली से आने वाले 30 दिनों के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाक्रम का भविष्य कथन मेदिनी ज्योतिष के नियमों के अनुसार किया जाता है। भारत के मानक समय अनुसार आज सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर जब सूर्य ने सिंह राशि में प्रवेश किया तो संजोग से सूर्य की राशि का लग्न ‘सिंह’ ही उदय हो रहा था। सूर्य संक्रांति के समय चन्द्रमा का अपने मित्र बुध की राशि कन्या में होना तथा चित्रा नक्षत्र में स्थिति दोनों अगले कुछ दिनों में देश में आर्थिक मोर्चे पर बड़े बदलावों का ज्योतिषीय संकेत
- श्रावण शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि- 18 अगस्त को 2026 को शाम 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी
- शुक्ल योग- 18 अगस्त को आज देर रात 3 बजकर 23 मिनट तक
- स्वाती नक्षत्र- 18 अगस्त को पूरा दिन पूरी रात पार करके कल सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक
- 18 अगस्त 2026 विशेष- कल्कि जयंती और मंगला गौरी व्रत
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:50 ए एम से 05:35 ए एम
- प्रातः सन्ध्या – 05:13 ए एम से 06:20 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:17 पी एम से 01:08 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:50 पी एम से 03:40 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:04 पी एम से 07:27 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 07:04 पी एम से 08:12 पी एम
- अमृत काल – 09:19 पी एम से 11:02 पी एम
18 अगस्त 2026, मंगलवार को श्रावण शुक्ल षष्ठी तिथि रहेगी, जो शाम करीब 5:50 बजे तक रहेगी और इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। दिल्ली के पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा तुला राशि में रहेगा और स्वाति नक्षत्र का प्रभाव बना रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की यह स्थिति रिश्तों, साझेदारी, संतुलन और आपसी समझ से जुड़े मामलों को महत्वपूर्ण बना सकती है। वहीं मंगलवार का दिन साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है। ऐसे में आज कुछ राशियों को अपने प्रयासों में सफलता मिल सकती है, जबकि कुछ को धैर्य और समझदारी से फैसले लेने की जरूरत होगी।
इस मंदिर में भगवान कल्कि को उनके दिव्य घोड़े के साथ दर्शाया गया है। कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख किया गया है कि भगवान कल्कि अपने दिव्य घोड़े पर सवार होकर कलियुग का अंत करेंगे। भगवान कल्कि के घोड़े का नाम देवदत्त होगा। भगवान कल्कि के इस मंदिर में वास्तुकला में यह घोड़ा विशेष स्थान रखता है। यह घोड़ा मंदिर के गर्भगृह में मुख्य मूर्ति के साथ उकेरा गया है। भक्तों का मानना है कि इस घोड़े की पूजा करने से साहस की प्राप्ति होती है। बता दें कि इस मंदिर की दीवारों पर भगवान विष्णु के सभी अवतारों की नकाशी की गई है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में ध्यान और पूजा करने से आने वाले संकटों से राहत मिलती है। कल्कि मंदिर चौकड़ी मोदीखाना पुराना जयपुर में स्थित है। यह मंदिर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक खुलता है। इस मंदिर के पास हवा महल सिटी पैलेस, गोविंद देवजी मंदिर के पास है।
कुछ बड़ी उथल -पुथल के संकेत अगले 30 दिनों में मिल रहे हैं। केंद्र सरकार इन छात्र आंदोलनों से बड़ी असहज होगी ऐसा ज्योतिषीय संकेत मिल रहा है। 28 अगस्त की पूर्णिमा के दिन और 12 सितम्बर को बुध के उदय होने के समय भी देश के कई राज्यों में अच्छी बारिश होगी।