14 अगस्त 2026 :वर्ष की गणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि (शाम 06:48 तक) और शुक्रवार का दिन है। आज सुबह 09:29 तक परिघ योग रहेगा, जिसके बाद शिव योग शुरू होगा। नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (देर रात 03:43 तक) रहेगा। राहुकाल सुबह 10:25 से दोपहर 12:03 तक & नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी & अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 से दोपहर 12:52
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:29 से सुबह 05:09 & राहुकाल: सुबह 10:25 से दोपहर 12:03 & सूर्योदय- सुबह 04:48 बजे सूर्यास्त- शाम 07:01 बजे & सुबह की पूजा/ध्यान का समय (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 04:29 बजे से 05:09 बजे तक & इस नक्षत्र से संबंधित मुख्य पौधा पलाश (ढाक) या अशोक का पेड़

नक्षत्र से संबंधित वृक्ष की पूजा करने से पीड़ा से राहत BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN 9412932030
सावन के इस समय में मौसम और प्रकृति दोनों में बदलाव स्पष्ट & दक्षिणायन चल रहा है। पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र रात 3:44 AM तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में इस नक्षत्र को रचनात्मकता, सुख-सुविधा और सामाजिक संबंधों जैसे विषयों से जोड़ा जाता है। इसके बाद अगले नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा।
शिव योग में शत्रु के विरूद्ध किए गए कार्य में सफलता मिलती है अर्थात शत्रु पर विजय अवश्य मिलती है। वही अगर शिव योग की बात करें तो – इस योग में किय गये सभी कार्यों में, विशेषकर कि मंत्र प्रयोग में सफलता मिलती है। वहीं परिघ योग सभी अच्छे कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से कार्यों में रुकावटें या विलंब आ सकता है। इस दिन महादेव और माँ शक्ति की आराधना करने से भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। शुक्रवार के दिन शिवलिंग पर दूध एवं बेलपत्र चढ़ाने तथा माँ लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक परिघ योग रहेगा, उसके बाद शिव योग & 14 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि और शुक्रवार का दिन है। द्वितीया तिथि शुक्रवार को शाम 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। 14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक परिघ योग रहेगा, उसके बाद शिव योग लग जायेगा। साथ ही शुक्रवार को देर रात 3 बजकर 43 मिनट तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:49 ए एम से 05:34 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 05:12 ए एम से 06:19 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:18 पी एम से 01:09 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:51 पी एम से 03:43 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:08 पी एम से 07:30 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 07:08 पी एम से 08:15 पी एम
समय का हमारे जीवन पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। जब हम कोई भी नया काम सही और शुभ समय पर शुरू करते हैं, तो उसमें सफलता मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। 14 अगस्त 2026 (शुक्रवार / Friday) को श्रावण (सावन) महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। आइए इसे बिल्कुल आसान और सरल भाषा में समझते हैं कि आज आपके काम के लिए कौन सा समय अच्छा है और किस समय से आपको बचना चाहिए।
आज शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि शाम 6:48 PM तक रहेगी। शुक्ल पक्ष की शुरुआत के बाद आने वाली द्वितीय तिथि को धार्मिक परंपराओं में बढ़ते चंद्र पक्ष की निरंतरता से जोड़ा जाता है। आज की तिथि के दौरान नियमित पूजा, पारिवारिक कार्य और दैनिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है। आज शुक्रवार है, जिसे शुक्र ग्रह से संबंधित दिन माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्रवार को सौंदर्य, सुख-सुविधा, कला, रिश्तों और भौतिक जीवन से जुड़े विषयों के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से भी शुक्रवार को देवी उपासना का महत्व रहता है।
14 अगस्त का दिन शुक्ल पक्ष की बढ़ती तिथि के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आज केवल शुभ समय देखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और दिशाशूल को एक साथ देखकर दिन की योजना बनाना अधिक उपयोगी रहेगा। सावन मास होने के कारण यदि आज पूजा या धार्मिक अनुष्ठान का विचार है, तो अपनी सुविधा के अनुसार शुभ मुहूर्त को प्राथमिकता देकर दिन को व्यवस्थित किया जा सकता है।
नक्षत्र से संबंधित वृक्ष की पूजा करने से पीड़ा से राहत
ज्योतिष के अनुसार 9 ग्रहों का प्रभाव मानव ,जीवो, पेड़ पोधो, सब पर पड़ता है। हर ग्रह का एक नक्षत्र होता है। परन्तु हर नक्षत्र का एक वृक्ष होता है । नक्षत्रो के माध्यम से भी ग्रहों के कुप्रभाव को सही किया जासकता है।
कोई भी व्यक्ति अपने नक्षत्र के अनुसार वृक्ष की पूजा करके अपनें नक्षत्र को ठीक कर सकता है। यदि जन्म नक्षत्र अथवा गोचर के समय कोई नक्षत्र पीड़ित चल रहा हो तब उस नक्षत्र से संबंधित वृक्ष की पूजा करने से पीड़ा से राहत मिलती है।
1
अश्विनी नक्षत्र का वृक्ष :– केला, आक, धतूरा ।
2
भरणी नक्षत्र का वृक्ष :–केला, आंवला।
3
कृत्तिका नक्षत्र का वृक्ष :– गूलर ।
4
रोहिणी नक्षत्र का वृक्ष :– जामुन ।
5
मृगशिरा नक्षत्र का वृक्ष :– खैर।
6
आर्द्रा नक्षत्र का वृक्ष :– आम, बेल ।
7
पुनर्वसु नक्षत्र का वृक्ष:– बांस ।
8
पुष्य नक्षत्र का वृक्ष :– पीपल ।
9
आश्लेषा नक्षत्र का वृक्ष :– नाग केसर और चंदन।
10
मघा नक्षत्र का वृक्ष :– बड़।
11
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का वृक्ष :- ढाक।
12
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का वृक्ष :- बड़ और पाकड़।
13
हस्त नक्षत्र का वृक्ष :– रीठा।
14
चित्रा नक्षत्र का वृक्ष :– बेल।
15
स्वाति नक्षत्र का वृक्ष :– अर्जुन।
16
विशाखा नक्षत्र का वृक्ष :– नीम।
17
अनुराधा नक्षत्र का वृक्ष :– मौलसिरी।
18
ज्येष्ठा नक्षत्र का वृक्ष :– रीठा।
19
मूल नक्षत्र का वृक्ष :– राल का पेड़।
20
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का वृक्ष :– मौलसिरी/जामुन।
21
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का वृक्ष :– कटहल।
22
श्रवण नक्षत्र का वृक्ष :– आक।
23
धनिष्ठा नक्षत्र का वृक्ष :– शमी और सेमर।
24
शतभिषा नक्षत्र का वृक्ष :– कदम्ब।
25
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का वृक्ष :– आम।
26
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का वृक्ष :– पीपल और सोनपाठा।
27
रेवती नक्षत्र का वृक्ष :– महुआ।
इनकी पूजा करने से नक्षत्रों का दोष दूर हो जाता है। प्रतिदिन इन पेडो़ के दर्शन मात्र से नक्षत्र का दोष दूर हो जाता है