7 नवंबर 2026 (शनिवार) छोटी दिवाली;हनुमान जयंती& काली चौदस, मासिक शिवरात्रि और सर्वार्थ सिद्धि योग & हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नव निधि देने के साथ अजर-अमर रहने का वरदान भी मिला

7 नवंबर 2026 (शनिवार) 7 नवंबर 2026 विशेष- नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, हनुमान जयंती,  धन्वंतरि जयंती & 7 नवंबर 2026 (शनिवार) को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के साथ-साथ कुछ स्थानों और परंपराओं में हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) छोटी दिवाली के दिन कुछ जगहों पर हनुमान जयंती भी

माता सीता ने हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नव निधि देने के साथ अजर-अमर रहने का वरदान भी दिया था. मान्यता है कि यह आशीर्वाद कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन मिला था. इसी कारण इस तिथि को हनुमान जी के दूसरे जन्मोत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है. कुछ स्थानों पर इसे विजय अभिनंदन महोत्सव भी कहा जाता है.

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ – नवंबर 07, 2026 को 10:47 AM बजे चतुर्दशी तिथि समाप्त – नवंबर 08, 2026 को 11:27 AM बजे अभ्यङ्ग स्नान मुहूर्त – 05:41 AM से 06:38 AM नरक चतुर्दशी के दिन चंद्रोदय का समय – 05:41 AM

ऋतु: हेमंत / शरद अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:42 बजे से 12:26 बजे तक राहुकाल: सुबह 09:21 बजे से 10:42 बजे तक विशेष पर्व / योग: काली चौदस, मासिक शिवरात्रि और सर्वार्थ सिद्धि योग & शनिवार, 07 नवंबर को त्रयोदशी तिथि है, फिर इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। है।  इस तिथि पर चित्रा नक्षत्र और प्रीति योग का विशेष संयोग & सूर्योदय का समय- 06:41 सूर्यास्त का समय- 17:27

शनिवार को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इस दिन त्रयोदशी तिथि शनिवार को सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि 

7  नवंबर 2026 का पंचांग: 7 नवंबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की उदया तिथि त्रयोदशी और शनिवार का दिन है। त्रयोदशी तिथि शनिवार को सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। 7 नवंबर को धन्वंतरि जयंती है। शनिवार को देर रात 3 बजकर 28 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। साथ ही शनिवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के रविवार  सुबह 5 बजकर 53 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी भी है, जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है।। इसके अलावा शनिवार को हनुमान जयंती भी मनाई जायेगी।

चंद्रमा दिवाली से ठीक एक दिन पहले राशि परिवर्तन करेंगे। चंद्रमा का गोचर 7 नवंबर की शाम 5 बजकर 15 मिनट पर कन्या राशि से तुला राशि में होगा। चंद्रमा के इस गोचर के चलते कुछ राशियों को जीवन में सुखद फल 

नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा का विशेष महत्व है.  कुछ क्षेत्रों में माता काली और हनुमान जी की भी पूजा की जाती है.  इस दिन शाम को घर को घर के बाहर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं.  यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है. 

धार्मिक मान्यता है कि छोटी दिवाली पर दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था.  उसने अपनी ताकत के बल पर देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू कर दिया था.   उसने देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए थे और 16 हजार महिलाओं को बंदी बनाकर रखा था. नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी.  इसके बाद भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध करके नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से महिलाओं को मुक्त कराया…

मान्यता है कि नरकासुर के अंत के बाद लोगों ने दीप जलाकर खुशी मनाई थी.  तभी से कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई.  यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. 

नरक चतुर्दशी महत्व

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। अतः शनिवार नरक चतुर्दशी है। आज दिवाली उत्सव का दूसरा दिन है। इसे रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों में बताया गया है कि चतुर्दशी को लक्ष्मी जी तेल में और गंगा सभी जल में निवास करती हैं। लिहाजा इस दिन तेल मालिश करके स्नान करने पर मां लक्ष्मी के साथ गंगा मैय्या का भी आशीर्वाद मिलता है और व्यक्ति को जीवन में तरक्की मिलती है। कुछ जगहों पर तेल स्नान से पहले उबटन लगाने की भी परंपरा है।  नरक चतुर्दशी के दिन स्नान से पहले पूरे शरीर पर तेल मालिश करनी चाहिए और उसके कुछ देर बाद स्नान करना चाहिए।

इसके अलावा नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय नरकासुर के निमित्त चार दीपक जलाने की परंपरा है। ये दीपक दक्षिण दिशा में जलाये जाने चाहिए। साथ ही भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और शिव आदि देवी-देवताओं के मंदिरों में, मठों में, अस्त्रागारों में, यानि जहां पर अस्त्र आदि रखे जाते हों, बाग-बगीचों में, घर के आंगन में और नदियों के पास दीपक जलाने चाहिए। लिहाजा अपने जीवन में ऊर्जा के साथ ही नयी रोशनी का संचार करने के लिये आस-पास इन सभी जगहों पर दीपक जरूर जलाइये। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे माता सीता का एक खास वरदान जुड़ा हुआ है. हिंदू धर्म के विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में भगवान हनुमान की महिमा, उनकी भक्ति और चिरंजीवी होने का वर्णन मिलता है. रामायण में भी माता सीता और हनुमान जी की भेंट का प्रसंग मिलता है. कहा जाता है कि माता जानकी ने हनुमान जी को अजर-अमर रहने का आशीर्वाद दिया था. इसी वजह से कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. आइए जानते हैं कि माता सीता ने हनुमान जी को यह वरदान कब और क्यों दिया था.

हनुमान जयंती साल में पहली बार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता अंजनी और केसरी के घर हनुमान जी का जन्म हुआ था. उन्हें पवनपुत्र, अंजनी नंदन और बजरंगबली जैसे कई नामों से जाना जाता है.

हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार भी माना जाता है. इसलिए चैत्र पूर्णिमा का दिन उनके जन्मोत्सव के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है. इस दिन भक्त हनुमान मंदिरों में दर्शन करते हैं और बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल चोला चढ़ाते हैं. साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई गई थी. वाल्मीकि रामायण और शिव पुराण में हनुमान जी की महिमा और उनके दिव्य स्वरूप से जुड़े प्रसंग मिलते हैं. धार्मिक मान्यताओं में उन्हें भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना गया है.

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