इनके सेवन से खतरनाक बीमारियो का हमला नही होगा

जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति की कोशिकाओं में कई तरह के बदलाव आते हैं। पुरानी कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं और नई कोशिकाएं यानि सेल्स जन्म लेते हैं। हमारे शरीर में रेड और व्हाइट दो तरह के सेल्स होते हैं जो शरीर को सुचारू रूप से चलाने का काम करते है। मगर कैंसर होने की स्थिति में यह सेल्स जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगते हैं। इससे ही शरीर में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी जन्म लेती है। कैंसर भी कई तरह के होते हैं जैसे त्वचा का कैंसर, ब्लड कैंसर, हड्डियों का कैंसर, ब्रेन कैंसर, स्तन कैंसर, फेफड़ों, गले, मुंह का कैंसर, पैनक्रियाटिक कैंसर इत्यादि। यदि आप नियमित रूप से स्‍वस्‍थ और पोषणयुक्‍त आहार का सेवन कर रहे हैं तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी आपसे दूर रहेगी। कैंसर के मरीज अपनी डाइट चार्ट में इन आहार को शामिल कर कैंसर की जटिलता को कम कर सकते हैं। 

 जानलेवा नहीं है स्तन कैंसर

स्तन कैंसर का नाम सुनते ही कैंसर पीड़ित और उनके परिवार वाले मरीज़ के जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ये धारणा सही नहीं है.भारत में हर साल स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में प्रति एक लाख में से तीस की औसत से इज़ाफ़ा हो रहा है. यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं. स्तन कैंसर को समझना आसान है, स्त्रियां खुद भी स्तन की जांच कर सकती हैं. स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकर या स्किन में बदलाव, स्तन का सख़्त होना, स्तन के निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे (अंडर आर्म्स) भी गांठ होना स्तन कैंसर के संकेत हैं. हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद ज़रूरी है, ताकि कहीं वो आगे चलकर कैंसर का रूप ना पकड़ ले. टाटा मेमोरियल सेंटर के डायरेक्टर और कैंसर विशेषज्ञ डॉ आरए बडवे के मुताबिक़, “स्तन में गांठ, सूजन या फिर किसी भी तरह का बदलाव महसूस हो तो डॉक्टर से संपर्क करें.” डॉ. बडवे कहते हैं, “स्तन कैंसर से डरे नहीं क्योंकि इसका निदान संभव है. अगर स्तन कैंसर पहले स्टेज में ही है, तो इसे जड़ से ख़त्म करना बहुत आसान है.” मुंबई में कैंसर के इलाज के लिए मशहूर टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के आंकड़ों के मुताबिक हर साल 4 हज़ार कैंसर के नए रोगी अस्पताल आते हैं. कैंसर विशेषज्ञ डॉ आरए बडवे के मुताबिक, “शराब, ध्रूमपान, तंबाकू के साथ-साथ बढ़ता वज़न, ज़्यादा उम्र में गर्भवती होना और बच्चों को स्तनपान ना करवाना स्तन कैंसर के प्रमुख कारण हैं.” इसलिए ज़रूरी है कि महिलाएं अपने वज़न को नियंत्रित रखें, गर्भधारण का समय निश्चित करें और कम-से-कम 6 महीने तक बच्चों को स्तनपान ज़रूर कराएं. ऐसा करने से स्तन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है. स्तन कैंसर का कारण आनुवंशिक भी हो सकता हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ़ 5-10 % महिलाओं में ही पाया जाता है.

सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मेहुल एस भंसाली कहते हैं, “बदलते दौर में अपने लाइफ़स्टाइल को ज़रूरत से ज़्यादा बदलना भी स्तन कैंसर का कारण बन सकता है.” उनकी सलाह है कि ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल वाले भोजन से दूर रहें और गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन ना करें. इसके अलावा 40 की उम्र के बाद साल में एक बार मेमोग्राफी ज़रूर करवाएं.  कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रेशमा पलेप के मुताबिक़, “अक्सर मेमोग्राफी टेस्ट का नाम सुनकर महिलाएं डरती हैं, लेकिन इस टेस्ट से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है.” वहीं डॉ अंजलि पाटिल का मानना है कि, “स्तन कैंसर के लक्षण सामने आते ही महिलाएं डर और शर्मिंदगी से इसका ज़िक्र नहीं करती. लेकिन लक्षण का पता चलते ही डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना ज़रूरी है.” डॉ अंजलि के मुताबिक़ कुछ महिलाएं तो सर्जरी के बाद बिल्कुल ठीक हो जाती हैं. लेकिन बाद में लापरवाही की वजह से इसका ख़तरा फिर से उभर आता है. स्तन कैंसर को लेकर जानकारी का अभाव भी इसके फैलने में अहम रोल निभा रहा है. डॉ आरए बडवे कहते हैं कि, “बॉयोप्सी टेस्ट से जानकारी मिल जाती है कि स्तन कैंसर है या नहीं. अगर स्तन में गांठ है तो उसका आकार कितना बड़ा है और यह किस तरह का स्तन कैंसर है ये जानने के बाद इलाज़ की प्रक्रिया आसान हो जाती है.”  डॉ बडवे बताते हैं कि स्तन कैंसर की 4 अवस्था होती है. स्तन कैंसर अगर पहले स्टेज में है तो मरीज के ठीक होने की उम्मीद 80% से ज़्यादा होती है. दूसरे स्टेज में अगर स्तन कैंसर है 60-70% तक महिलाएं ठीक हो जाती हैं, वहीं तीसरे या चौथे स्टेज में स्तन कैंसर है तो इलाज़ थोड़ा कठिन हो जाता है. इसलिए सही समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होता है. स्तन कैंसर से जूझ रही राखी शुक्ला कहती हैं, “स्तन कैंसर का नाम सुनते ही मैं बहुत घबरा गई थी. लेकिन डॉक्टरों ने मुझे समझाया है कि मैं स्तन कैंसर के शुरुआती दौर में हूं. इसलिए मैं ठीक हो जाऊंगी. जिसके लिए मुझे सिर्फ डॉक्टर के बताए गए तरीके और दवाइयों समय पर लेनी है.”

वहीं बिहार के बेगूसराय से इलाज़ के लिए मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर आईं मनीषा सिंह मानती हैं, “बीमारी कोई भी हो मरीज़ को दिमाग़ी तौर पर स्थिर होना ज़रूरी है और मुझे उम्मीद है कि मैं बहुत जल्द ठीक हो जाऊंगी.” स्तन कैंसर के उपचार के लिए डॉक्टर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी करते हैं. माना जाता है कि इन थेरेपी के कुछ साइड इफ़ेक्ट्स भी होते हैं. टाटा मेमोरियल सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर और कीमोथेरेपी एक्सपर्ट डॉ. सुदीप गुप्ता ने   बताया, “कीमोथेरेपी से होने वाले साइड इफ़ेक्ट्स के बारे में पेशेंट्स को बताया जाता है. जैसे बालों का गिरना, लेकिन 6 महीनों में फ़िर से बाल आ जाते हैं. मरीज़ों को पौष्टिक आहार के अलावा फल और हरी सब्ज़ी का सेवन करना ज़रूरी है.”

कैंसर से बचाने वाले खाद्य-पदार्थ-

अदरक

अदरक में पाये जाने वाले एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स कैंसर के सेल्‍स से लड़ते हैं। नियमित रूप से अदरक खाने से कैंसर होने की संभावना कम होती है। इसके अलावा अदरक कोलेस्ट्राल का स्तर कम करता है। यह खून का थक्का जमने से रोकता है। इसमें एंटी फंगल और कैंसर के प्रति प्रतिरोधी होने के गुण भी पाए जाते हैं।

लहसुन

लहसुन बहुत महत्‍वपूर्ण औषधि है। लहसुन में एलियम नामक एंटीबायोटिक होता है जो कैंसर होने से बचाता है। लहसुन कई रोगों में भी फायदेमंद है। नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर कम या ज्यादा होने की बीमारी नहीं होती। गैस्टिक ट्रबल और एसिडिटी की शिकायत में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायक होता है। लहसुन की पांच कलियां खाने से दिल की बीमारी नही होती।

आंवला

आंवला विटामिन-सी का एक बहुत अच्छा स्रोत है। एक आंवला में 3 संतरों के बराबर विटामिन-सी होता है। आंवला कैंसर से बचाता है। आंवला खाने से लीवर को शक्ति मिलती है जिससे लीवर हमारे शरीर से टॉक्सिन्‍स को बाहर निकालता है। आंवले का जूस खून को साफ करता है। इसके अलावा यह कई अन्‍य रोगों के लिए भी फायदेमंद है।

ग्रीन टी

ग्रीन टी में पोलीफिनॉल पाया जाता है, यह एंटी-ऑक्‍सीडेंट है जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। चीनी के बिना चाय पीना सबसे अच्छा होता है, लेकिन अगर आप अपनी चाय को मीठा करना चाहते हैं तो इसमें शहद या मेपल सिरप की तरह एक न्यूनतम प्रसंस्कृत स्वीटनर का उपयोग करने का प्रयास कीजिए।

मशरूम

मशरूम भी कैंसर से बचाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसमें बीटा-ग्‍लूकण पाया जाता है। मशरूम में प्रोटीन भी होता है जिसे लेक्टिन कहते हैं। लेक्टिन कैंसर कोशिकाओं पर हमला करता है और उन्हें बढ़ने से रोकता है। मशरूम शरीर में इंटरफेरॉन के उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

ब्लूबेरी

डार्क-स्‍क्रीन फलों (स्ट्रॉबेरी, अंगूर आदि) में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है। जामुन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे अपने आहार में शामिल कर आप कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं।

फलियां

फलियों में उच्च फाइबर और प्रोटीन होता है, जो कोशिकाओं की रक्षा करने में मदद करते हैं। सेम, कैंसर कोशिकाओं द्वारा किए जा रहे हमले से स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है और साथ-साथ धीमी गति से हो रहे ट्यूमर के विकास को रोकने में भी मदद करता हैं। किसी इसके अलावा गाजर, स्क्वैश, अंडे, डेयरी उत्पाद, ब्रोकोली, फूलगोभी आदि को अपने आहार में शामिल करके कैंसर होने की संभावना को कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाने वाला अखरोट स्तन कैंसर को को बढ़ने से रोकने और इससे उबरने में भी मददगार साबित हो सकता है। ‘न्यूट्रिशन रिसर्च’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि अगर किसी में स्तन कैंसर की पुष्टि है तो करीब दो सप्ताह तक हर दिन दो औंस अखरोट खाने से उसके जीन व्यवहार में उल्लेखनीय बदलाव आ सकता है। 

अमेरिका में मार्शल विश्वविद्यालय से डब्ल्यू एलेन हार्डमैन ने बताया कि चुहिया पर किए गए प्रयोग में पाया गया अखरोट के सेवन ने स्तन कैंसर के बढ़ने की गति धीमी हुई और इसका खतरा भी कम हुआ। हार्डमैन ने कहा, ‘‘इस शोध के आधार पर हमारी टीम ने अनुमान लगाया कि अगर किसी महिला में स्तन कैंसर की पुष्टि होती है तो अखरोट के सेवन से उसके जीन व्यवहार में बदलाव आयेगा। इस बदलाव से महिला में स्तन कैंसर फैलने की गति कम होगी और बीमारी से उबरने में मदद मिलेगी।’ 

मात्र 21 दिनो तक अगर अखरोट को दूध के साथ खा लिया, तो कुछ ऐसा हो जायेगा कि आपके होश उड़ जायेंगे 

पहले नैदानिक परीक्षण में स्तन कैंसर से पीड़ित कुछ महिलाओं को प्रतिदिन दो औंस अखरोट खिलाए गए और पाया गया कि अखरोट खाने से उनके जीन व्यवहार में काफी बदलाव हुआ। हार्डमैन ने कहा, ‘‘इन नतीजों से इस अवधारणा को बल मिलता है कि मनुष्यों में अखरोट का सेवन कैंसर बढ़ने की गति कम कर सकता है और मरीज को इस बीमारी से उबरने में मदद मिल सकती है।’

दुनियाभर में लोगों के हो रहे मौत के कारणों में कैंसर प्रमुख कारणों में से एक है। ये 100 से भी अधिक तरह की होती है। दुनियाभर की एक बड़ी आबादी कैंसर के चपेट में है। इसके होने वाले तमाम कारणों में खानपान प्रमुख है। आप जो भी खाते पीते हैं इसका सीधा असर आपकी सेहत पर होता है। हम आपको कुछ खास चीजों के बारे में बताने वाले हैं जिनके सेवन से आप कैंसर के खतरे को कम कर सकेंगी।

Walnut : अखरोट में कई तरह के स्वास्थवर्धक तत्व पाए जाते हैं। कुछ स्टडीज के मुताबिक अखरोट खाने से ब्रैस्ट कैंसर नहीं होता है। इसके अलावा प्रोस्टेट कैंसर में भी ये काफी असरदार होता है। इसके साथ ही डी.एन.ए. की सुरक्षा में भी ये काफी असरदार होता है।

Cranberry : क्रैनबेरिज फाइबर, विटामिन-सी और एंटीऑक्सिडैंट का प्रमुख स्रोत होता है। इससे शरीर में पैदा होने वाले कैंसर के तत्व समाप्त हो जाते हैं।

Apple : सेब कई तरह की बीमारियों में बेहद लाभकारी होता है। इसके एंटीऑक्सिडैंट और एंटी इंफ्लामैट्री गुण कैंसर के खतरे को काफी कम कर देते हैं। खासकर के कोलोरेक्टल कैंसर में ये काफी प्रभावी है। अधिकतर लोग सेब के छिलके को छील कर खाते हैं, पर इससे आपका काफी नुक्सान हो जाता है। अगर आप अपनी ये आदत बदल लें तो आपकी सेहत के लिए ये काफी फायदेमंद हो जाता है। इसके छिलके में बहुत से गुणकारी तत्व होते हैं। कोलोरेक्टल कैंसर के अलावा सेब फेफड़ों, ब्रैस्ट और पेट के कैंसर से भी बचाव करता है।

Blueberry : ब्लू बेरीज में कई तरह के गुणकारी तत्व पाए जाते हैं। इसमें फाइटोकैमिकल, एलैजिक एसिड, युरोलिथिन जैसे कई खास गुण पाए जाते हैं। ये हमारे डी.एन.ए. को हमारे शरीर में मौजूद फ्री रैडिकल्स से सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है। आपको बात दें कि ब्लू बैरीज के सेवन से मुंह, ब्रैस्ट, कोलोन और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम होता है।

Green tea : पुराने समय में कई तरह के रोगों का इवलाज करने के लिए चाय का सहारा लिया जाता था। आपको बता दें कि ग्रीन टी और ब्लॉक टी में कई तरह के फायदेमंद तत्व पाए जाते हैं। स्टडी के मुताबिक, ग्रीन टी के सेवन से शरीर में कोलोन, लिवर, ब्रैस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाएं बन नहीं पाती हैं। वहीं कई दूसरी स्टडी में बताया गया है कि ग्रीन टी फेफड़ों, स्किन और पेट के कैंसर से भी सुरक्षित रखता है।

इसके अलावा

स्वाद में बेहतर अनार सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। कुछ शोध कार्यो के अनुसार यह बात सामने आई है कि अनार सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। शूगर और रक्तचाप को नियंत्रण में रखने से लेकर कैंसर के खतरों से बचाने में भी यह कारगर साबित हुआ है। इस फल को आहार में शामिल कर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

दिल की सेहत का रखे ख्याल : अनार के जूस भरपूर मात्र में एंटीऑक्सीडैंट मौजूद होते हैं जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचाते हैं। यह धमनियों में प्लाक पैदा होने से भी बचाता है और पहले से बने प्लाक का असर भी कम करता है। अनार का सेवन करने से ह्दय संबंधी बीमारियां भी दूर होती हैं।

शुगर पर लगाम : अनार में कैलोरी की मात्र बेहद कम होती है और कोलैस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फैट की मौजूदगी भी न के बराबर होती है। इसलिए ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, ये उन पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है जो वजन को संतुलित रखने का काम करते हैं।

लीवर सुरक्षा : कई शोधकार्यो में यह बात प्रमाणित हो गई है कि अनार में पाए जाने वाले तत्व न केवल लीवर को सुरक्षा प्रदान करते हैं बल्कि लीवर को क्षतिग्रस्त होने पर उसको रिपेयर भी करते हैं।

रक्तचाप पर कंट्रोल : इस गुणकारी फल का जूस रक्त धमनियों में सूजन और घाव पैदा होने का खतरा कम करता है। अनार में प्राकृतिक रूप से एस्पिरिन मौजूद होता है जो खून का थक्का बनने से रोकता है। साथ ही, ये पूरे शरीर में खून का प्रवाह भी बेहतर करता है जिससे रक्तचाप बढ़ने की आशंका कम होने लगती है।

त्वचा के लिए फायदेमंद : अनार का सेवन त्वचा पर बने हुए काले धब्बे मिटाने ओर शरीर के घावों को भी भरने में मददगार साबित होता है।

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