EYE DROP;नहीं जाएगी आंखों की रोशनी

#फ्लुइड जेल एक नया पदार्थ #  आई ड्रॉप में यह नया फ्लुइड जेल आंखों की पटल पर डेकोरीन प्राप्त करने के लिए बनाया गया है. 

संक्रमण के कारण आंखों की रोशनी जाने के खतरे से अब बचा जा सकता है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसी दवा विकसित की है जो आंखों की रोशनी बनाए रखने में मदद कर सकती है. आंख की कॉर्निया पारदर्शी होती है, इसलिए इसे श्वेत पटल भी कहते हैं. लेकिन किसी प्रकार का संक्रमण होने या चोट लगने से इस पर दाग या धब्बा पड़ जाने से यह पारदर्शी नहीं रह जाती है, जिससे आंखों की रोशनी प्रभावित होती है. कभी-कभी अंधा होने का भी खतरा बना रहता है.   

 वैज्ञानिकों ने एक आई-ड्रॉप तैयार की है. इसमें फ्लुइड जेल के साथ-साथ जख्म को भरने वाला प्रोटीन डेकोरीन है. वैज्ञानिकों ने बताया कि यह फ्लुइड जेल आंख की पटल की सुरक्षा करने में कारगर है.  अनुसंधान में बताया गया है कि आई-ड्रॉप लेने के कुछ दिनों में इसका असर दिखने लगता है. 

बर्मिघम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता लियाम ग्रोवर ने कहा, “फ्लुइड जेल एक नया पदार्थ है जो ठोस से तरल अवस्था में बदल सकता है. मतलब यह खुद आंख की पटल पर फैल जाता है और उस पर बना रहता है, जिससे धीरे-धीरे आंखों का धुंधलापन समाप्त हो जाता है.” विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एन. लोगान ने कहा कि आई ड्रॉप में यह नया फ्लुइड जेल आंखों की पटल पर डेकोरीन प्राप्त करने के लिए बनाया गया है.  लंदन में मूरफील्ड्स आई हॉस्पिटल में ओप्थाल्मोलॉजिस्ट की सलाहकार एनेग्रेट डाल्मान-नूर ने कहा, “इसमें मुख्य कारण सीधे तौर पर प्रत्यक्ष सूर्य के प्रकाश के संपर्क में कमी की संभावना है. जो बच्चे अधिक पढ़ते हैं, अधिक रूप से कम्प्यूटर, स्मार्टफोन और टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं और जिन्हें बाहर खेलने-कूदने का कम अवसर मिलता है, उनमें यह कमी साफ नजर आती है.”

   अगर स्मार्टफोन या कम्प्यूटर पर घंटों समय बिताते हैं, गेम खेलते रहते हैं, वीडियो देखते हैं या फिर फोटोज़ ही स्लाइड करते रहते हैं तो उनकी आंखों की रोशनी कमजोर पड़ने की संभावना ज्यादा रहती है. मगर चिंता छोड़िए और उन्हें खेलने के लिए बाहर भेजिए. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे हर रोज कम से कम दो घंटे बाहर सूरज की रोशनी में खेलते हैं, तो उनकी आंखें कमजोर होने से बच सकती हैं. आंखों की रोशनी धुंधली होने की इस रोग को मायोपिया कहते हैं. इसमें पास की नजर कमजोर होती है, जिससे पास की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं. इसमें रोशनी आंख द्वारा अपवर्तन के बाद रेटिना के पहले ही प्रतिबिंब बना देता है (न कि रेटिना पर). इस कारण दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब स्पष्ट नहीं बनता (आउट ऑफ फोकस) और चींजें धुंधली दिखती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस परिस्थिति का कारण है आंखों के लिए प्राकृतिक रोशनी की कमी.   

लंदन में मूरफील्ड्स आई हॉस्पिटल में ओप्थाल्मोलॉजिस्ट की सलाहकार एनेग्रेट डाल्मान-नूर ने कहा, “इसमें मुख्य कारण सीधे तौर पर प्रत्यक्ष सूर्य के प्रकाश के संपर्क में कमी की संभावना है. जो बच्चे अधिक पढ़ते हैं, अधिक रूप से कम्प्यूटर, स्मार्टफोन और टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं और जिन्हें बाहर खेलने-कूदने का कम अवसर मिलता है, उनमें यह कमी साफ नजर आती है.”

अभिभावकों के लिए बच्चों को इन उपकरणों के इस्तेमाल से रोकना बड़ा काम है. इसमें विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को जितना हो सके, उतने अधिक समय के लिए बाहर खेलने के लिए लेकर जाएं. इसके साथ ही बच्चों को ओमेगा-3 की डाइट देना जरूरी है. इसके साथ ही उन्हें विटामिन-ए, सी और ई की भी जरूरत होगी, जो उनकी आंखों के लिए अच्छी होगी.  विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें बच्चों की नियमित रूप से आंखों की जांच भी मददगार साबित हो सकती है. 

अब तक मुलेठी को सिर्फ खांसी ठीक करने के लिए ही जाना जाता था, लेकिन यहां जानिए इसके और भी फायदों के बारे में. स्वाद में मीठी मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है. इसका इस्तेमाल आंखों के रोग, मुंह के रोग, गले के रोग, दमा, दिल के रोग, घाव के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है. यह बात, कफ, पित्त तीनों दोषों को शांत करके कई रोगों के उपचार में रामबाण का काम करती है. पतंजलि आयुर्वेद हरिद्धार के आचार्य बालकृष्ण बता रहे हैं कैसे. 
मुलेठी के काढे से आंखों को धोने से आंखों के रोग दूर होते हैं. मुलेठी चूर्ण में बराबर मात्रा में सौंफ का चूर्ण मिलाकर एक चम्मच शाम को खाने से आंखों की जलन मिटती है तथा आंखों री रोशनी भी बढ़ती है. मुलेठी को पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर आंखों पर बांधने से आंखों के आसपास लालपन मिट जाता है.
मुलेठी कान और नाक के रोग में भी लाभकारी है. मुलेठी और मुनक्का से पकाए हुए दूध को कान में डालने से कान की बीमारियों में लाभ होता है. 3-3 ग्राम मुलेठी और शुंडी में छह छोटी इलायची, 25 ग्राम मिश्री मिलाकर, काढ़ा बनाकर 1-2 बूंद नाक में डालने से नाक के रोगों में आराम मिलता है.

मुंह के छालों की परेशानी के दौरान मुलेठी के टुकड़े में शहद लगाकर चूसते रहने से लाभ होता है. मुलेठी को चूसने से खांसी और गले का रोग भी दूर होता है. सूखी खांसी में कफ पैदा करने के लिए इसकी 1 चम्मच मात्रा को शहद के साथ दिन में 3 बार चटाना चाहिए. इसका 20-25 मिली काढ़ा शाम को पीने से श्वास नलिका साफ हो जाती है. मुलेठी को चूसने से हिचकी दूर होती है.
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि मुलेठी दिल के रोग में भी लाभकारी है. 3-5 ग्राम तथा कुटकी चूर्ण को मिलाकर 15-20 ग्राम मिश्री युक्त जल के साथ प्रतिदिन नियमित रूप से सेवन करने से हृदय रोगों में लाभ होता है. इसके सेवन से पेट के रोग में भी आराम मिलता है.
त्वचा रोग भी यह लाभकारी है. पिंपल्स पर मुलेठी का लेप लगाने से वे जल्दी ठीक हो जाते हैं. मुलेठी और तिल को पीसकर उससे घी मिलाकर घाव पर लेप करने से घाव भर जाता है.

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शावर जेल से शॉवर करना आपको काम के बाद और अधिक ताज़ा बनाता है। कई लोग बाजार में उपलब्ध शावर जेल का उपयोग करते हैं। बाजार में उपलब्ध अधिकांश शावर जेल में केमिकल होते हैं, जो साइड इफेक्ट्स का कारण बन सकते हैं। इन शावर जेल के अत्यधिक उपयोग से रूखापन और अन्य त्वचा से संबंधित समस्याएं हो सकती है। त्वचा से संबंधित समस्याओं को रोकने के लिए, आप घर पर शावर जेल भी तैयार कर सकते हैं। जैतून के तेल की मदद से घर पर शावर जेल तैयार कर सकते हैं। जैतून एक उत्कृष्ट मॉइश्चराइजर के रूप में काम करता है और यह त्वचा को अच्छी तरह से पोषण प्रदान कर सकता है। जैतून के तेल में मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को नुकसान से बचाते हैं और समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षणों को भी कम करते हैं।

घर पर जैतून के तेल की मदद से कैसे शावर जेल बनाएं

  • शहद जैतून का तेल लिक्वीड कैस्टाइल सोप
  • एसेंशियल ऑयल्स
  • कैसे बनाए

घर पर शावर जेल बनाने के लिए शहद की जरूरत होती है

शहद त्वचा से संबंधित लाभों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यह त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो त्वचा संक्रमण को रोकते हैं। अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए कच्चे शहद का उपयोग करें।

जैतून का तेल: 
जैतून में पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। बेहतर परिणाम के लिए अतिरिक्त जैतून का तेल का प्रयोग करें।

लिक्वीड कैस्टाइल सोप:
घर का बना शावर जेल में उपयोग करने के लिए यह साबुन आवश्यक है। यह साबुन शावर जेल के क्लिंजिंग गुण को बढ़ाता है।

एसेंशियल ऑयल्स: 
आप एसेंशियल ऑयल चुन सकते हैं। एसेंशियल ऑयल शावर जेल के सुगंध को बढ़ाता है। हालांकि, एसेंशियल ऑयल की अतिरिक्त मात्रा को ना जोड़ें।

कैसे बनाएं: 
घर का बना शावर जेल बनाने के लिए, इन सभी अवयवों को एक कटोरे में मिलाएं। सभी सामग्री ठीक से मिलाएं और इसे जार में डाल दें। जार को गर्मी और सूरज की रोशनी से दूर रखें। यह शावर जेल लंबे समय तक रहता है। heena for hairs: बालों को अधिक मुलायम और चमकदार बनाने के लिए मेंहदी में क्या मिलाएं ]

बाजार आधारित शावर जेल का उपयोग करने के बजाय, आप घर पर शावर जेल तैयार कर सकते हैं। शावर जेल शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान करता है।

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