उत्तराखंड में शूटिंग फिल्म ‘परमाणु का पहला पोस्टर जारी

जॉन अब्राहम निर्माता और मुख्य अभिनेता – ‘परमाणु’ का पहला पोस्टर # फिल्म ‘राब्ता’ सिनेमाघरों में रिलीज #मूवी रिव्यू: ‘सचिन: ए बिलियन ड्रीम्‍स’

जॉन अब्राहम ने ट्विटर पर अपनी आगामी फिल्म ‘परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखकरण’ का पहला पोस्टर जारी किया है. फिल्म के पोस्टर में इंडिया का नक्शा बना हुआ है, साथ ही इस नक्शे के ऊपर जॉन अब्राहम की झलक दिखाई दे रही है. जॉन अब्राहम प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही इस फिल्म के निर्माता और मुख्य अभिनेता जॉन अब्राहम ही है. अभिषेक शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में डायना पेंटी और बोमन ईरानी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे.
यह फिल्म परमाणु नगरी पोखरण में 11 और 13 मई 1998 को हुए सिलसिलेवार पांच परमाणु परीक्षणों पर आधारित है. इसके बाद से ही पोखरण विश्व मानचित्र पर एक शक्तिस्थल के रूप में उभरा है. ऐसी खबरें आई थी कि पहले इस फिल्म का नाम ‘शांतिवन’ रखा गया था, लेकिन बाद में फिल्म का नाम बदलकर ‘परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण’ रखा गया.
31 मई को फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी. इसकी जानकारी जॉन अब्राहम ने इंस्टाग्राम पर दी थी. फिल्म की शूटिंग मुंबई, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान में हुई है. आखिरी बार जॉन अब्राहम फिल्म ‘फोर्स 2’ में सोनाक्षी सिन्हा के साथ नजर आए थे. जल्द ही वे ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में अहम किरदार निभाएंगे. आमिर खान भी इस फिल्म में मुख्य भूमिका में हैं.
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फिल्म ‘राब्ता’ आज सिनेमाघरों में रिली
अभिनेता सुशांत सिंह और कृति सेनन स्टारर फिल्म ‘राब्ता’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. इस फिल्म में राजकुमार राव और जिम सर्भ भी मुख्य भूमिकाओं में है. फिल्म में राजकुमार राव 324 साल के वृद्ध का किरदार निभाते नजर आएंगे. फिल्म का निर्देशन दिनेश विजान ने किया है. यह फिल्म पुनर्जन्म पर आधारित है. पिछले महीने सुशांत सिंह राजपूत और कृति सनन की फिल्म ‘राब्ता’ का ट्रेलर ल़ॉन्च होते ही इसपर सुपरहिट तेलुगू फिल्म ‘मगधीरा’ के एक हिस्से की नकल करने का आरोप लगा था. जल्द ही ‘मगधीरा’ के मेकर्स ने हैदराबाद के एक में कोर्ट में 24 मई को ‘राब्ता’ के खिलाफ कॉपीराइट के उल्लंघन का केस दाखिल किया था. मगर ‘राब्ता’ के एक रिलीज के एक दिन पहले, गुरुवार की सुबह दोनों पक्षों में आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट हो गया और अब ‘राब्ता’ अपने तयशुदा शेड्यूल के मुताबिक आज रिलीज हो गई. दिनेश विजन की ‘राब्‍ता’ के साथ सबसे बड़ी दिक्‍क्‍त हिंदी फिल्‍मों का वाजिब-गैरवाजिब असर है. फिल्‍मों के दृश्‍यों, संवादों और प्रसंगों में हिंदी फिल्‍मों के आजमाए सूत्र दोहराए गए हैं. फिल्‍म के अंत में ‘करण अर्जुन’ का रेफरेंस उसकी अति है. कहीं न कहीं यह करण जौहर स्‍कूल का गलत प्रभाव है. उनकी फिल्‍मों में दक्षता के साथ इस्‍तेमाल होने पर भी वह खटकता है. ‘राब्‍ता’ में अनेक हिस्‍सों में फिल्‍मी रेफरेंस चिपका दिए गए हैं. फिल्‍म की दूसरी बड़ी दिक्‍कत पिछले जन्‍म की दुनिया है.’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘राजकुमार राव अपने संवादों में बार-बार इश्‍क के लिए ‘आग का दरिया’ की मिसाल देते हैं, लगता है मिर्जा गालिब ने उनसे उधार लेकर ही कहा होगा… ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है. दीपिका पादुकोण के दीवाने इस फिल्‍म में उनके डांस आयटम के लिए जा सकते हैं। उन्‍हें मादक रूप और सेक्‍सी स्‍टेप्‍स दिए गए हैं.’ फिल्म को वाहियात बताया है. तरन ने अपने वन वर्ड रिव्यू में ट्विटर पर लिखा है कि इस फिल्म की जितनी खराब कहानी है उतनी ही खराब एक्टिंग है और डायरेक्शन भी है. तरन ने इस फिल्म के टेरिबल बताया है.
‘फिल्‍म की पहली कमी हैं कि इसकी कहानी में कोई नयापन नहीं है. इंटरवेल से पहले की फिल्‍म खालिस मोमेंट्स के जरिए आगे बढ़ती है और इंटरवेल के बाद जो कहानी है उसकी पृष्ठभूमि आपको उतनी सच्‍ची नहीं लगती. फिल्‍म के पहले हिस्से में किरदारों के और उनकी लव स्टोरी के साथ जो जुड़ाव आप महसूस करते हैं वो उनकी पिछले जन्म की इश्क की कहानी से नहीं हो पाता जबकि उसमें ये ज्‍यादा जरूरी था, क्योंकि इसी अटूट प्यार के लिए वो दोबारा दुनिया में आए. मध्यांतर के बाद फिल्म थोड़ी सी खिंचती हुई सी लगती है. जिम सरभ का अभिनयथोड़ा फीका लगा वो हिंदी के डायलॉग्‍ज के साथ संघर्ष करते नजर आते हैं. ‘फ्लैशबैक में लोगों के बोले जाने वाले डायलॉग्स काफी कन्फ्यूज करने वाले हैं जिनपर और भी ज्यादा काम किए जाने की जरूरत थी. साथ ही किरदारों को काफी बेस्ट स्टाइल का ट्रीटमेंट दिया गया है, जिसे और बेहतर किया जाना चाहिए था. ये फिल्म टेक्निकली अच्छी है लेकिन एक लव स्टोरी को दर्शाने के लिए जिस तरह के पैशन की जरूरत होती है वो इस फिल्म में नहीं है.

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मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर सिर्फ खिलाड़ी नहीं बल्कि भावना है…लोगों के भगवान है. सचिन चुप हैं तो  पूरा देश चुप है, अगर सचिन आउट तो इंडिया आउट… यहां क्रिकेट का मतलब ही सचिन तेंदुलकर हैं और अब उनपर बनी फिल्म ‘सचिन: ए बिलियन ड्रीम्‍स’ रिलीज हो गई है. ये फिल्म सिर्फ सचिन के फैंस के लिए ही नहीं बल्कि उन लोगों के लिए भी बड़ा तोहफा है जो उनको तो जानते हैं पर उनकी जिंदगी और संघर्ष के बारे में नहीं…

इसमें सचिन तेंदुलकर अपनी कहानी खुद बताते हैं. ये फीचर फिल्म नहीं है बल्कि एक डॉक्यु-ड्रामा है जिसमें ज्यादातर रीयल फुटेज का इस्तेमाल किया गया है और यही इस फिल्म को और भी खास बनाता है. सचिन तेंदुलकर के बचपन के कुछ सीन्स को सिर्फ फिल्माया गया है जो कुछ मिनट का है लेकिन उसके बाद सब कुछ वास्तविक है. फिल्म में किसी ना किसी के Voice Over के साथ उन वास्तविक सीन्स को दिखाया गया है.

इस फिल्म में सचिन से जुड़े विवादों को बिल्कुल भी नहीं टच किया गया है लेकिन उनकी निजी जिंदगी के छोटे-छोटे और खूबसूरत लम्हों को दिखाया गया है. अपने रूम में म्यूजिक सुनने से लेकर ड्रेसिंग रूम में मस्ती करने तक के ऐसे बहुत सारे वास्तविक फुटेज को यहां दिखाया गया है जिन्हें आपने कभी नहीं देखा होगा.  

फैंस की दिलचस्पी अपने सुपरस्टार या आइकन के व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानने की होती है और यहां पर सचिन की उनके परिवार और दोस्तों के साथ रिलेशनशिप को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है. इसमें सचिन बताते हैं कि उनके भाई के साथ उनकी बॉन्डिंग ऐसी है कि वो पिच पर तो अकेले दिखते थे लेकिन मानसिक रूप से उनके भाई हमेशा ही उनके साथ होते थे. पत्नी अंजलि से मिलने की कहानी तो सभी को पता है लेकिन ये फिल्म देखकर पता चलता है कि सचिन की पत्नी होना इतना आसान नहीं है. सचिन परिवार को बिल्कुल समय नहीं दे पाते थे. इसमें अंजलि बताती है कि ‘हम सभी ने ये स्वीकार कर लिया था कि सचिन के लिए क्रिकेट पहले है और हम सब बाद में…’  ऐसी बहुत सी इमोशनल बातें हैं जो इस डॉक्युड्रामा को देखते समय आपको बांधे रखती हैं.

इस फील्म में सचिन के पूरे करियर को एक क्रॉनोलोजी में दिखाया गया है जिसे देखते वक्त कहीं भी कन्फ्यूजन नहीं होती है. सिनेमाहॉल में सचिन के मैच का सीन जब आता है तो हर फैन फिर से ‘सचिन…सचिन’ चिल्लाने लगता है और सीटियां बजती हैं.

इस फिल्म की तुलना पहले से ही महेंद्र सिंह धोनी पर बनी फिल्म से हो रही थी  लेकिन यहां ये समझ लेना जरूरी है कि ‘धोनी: द अनटोल्ड’ एक फीचर फिल्म थी जिसे पूरी तरह मसाला बनाकर दिखाया गया था. ‘धोनी: द अनटोल्ड’ पूरी तरह फिल्मी थी जिसमें शायद ही कुछ ऐसा था जो अनटोल्ट हो. लेकिन यहां इस डॉक्यु ड्रामा में ऐसी बहुत सी बातें हैं जो आपने पहले ना देखी होंगी ना सुनी होंगी.  

चिन की जिंदगी के उन उतार चढ़ाव के बारे में दिखाया गया है जिसके बारे में आपने अखबार में पढा़ और टीवी में देखा है लेकिन उसे लेकर खुद सचिन क्या सोचते हैं इस बारे में आपको नहीं पता. जैसे जब सचिन के करियर का ग्राफ बहुत ऊपर जा रहा था और उन्होंने एड फिल्में करनी शुरू की तो ऐसा कहा गया है कि वो पैसे की तरफ भाग रहे हैं. इस पर खुद सचिन यहां कहते हैं कि ‘परिवार को सिक्योर करने के लिए पैसों की जरूरत होती है.’ जब सचिन को कैप्टन पद से हटा दिया गया था. उस बारे में वो बताते हैं कि ‘बुरा तो लगता है.. लेकिन आप मुझसे कैप्टन पद छीन सकते हो क्रिकेट नहीं…’. सचिन अपने बुरे लम्हों को बताते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. कई बार ऐसा हुआ कि सचिन डिप्रेशन की तरफ जा रहे थे उस दौरान उन्होंने क्या किया? कई बार जब वो लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते थे तो वो उस स्थिति को कैसे हैंडल करते थे? ऐसी बहुत सी बाते इस फिल्म में आपको देखने को मिलेंगी.

ये डॉक्यु-ड्रामा है लेकिन इतने बेहतरीन तरीके से बनाया गया है कि दो घंटे 20 मिनट की फिल्म में आप कहीं भी बोर नहीं होते हैं. इसे देखते वक्त आप सचिन के साथ हसेंगे भी और उनके साथ रोएंगे भी. इसे एक इमोशनल टच दिया गया है जिसमें से कोई भी फैन निकलना नहीं चाहेगा. फिल्म के आखिर में सचिन के रिटायरमेंट की स्पीच को इस तरीके से दिखाया गया है कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

यहां पर आपको ये देखने को मिलेगा कि जब कोई बड़ा स्टार देश की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता तो उसकी फैमिली को भी उसकी कीमत चुकानी पड़ती है. इसके शिकार स्कूल में बच्चे होते हैं तो वहीं परिवार को भी हर तरफ ताने सुनने को मिलते हैं. हमारे देश में यही होता है कि जब हम किसी क्रिकेटर की परफॉर्मेंस से खुश होते हैं तो उसके नाम के नारे लगाते हैं लेकिन जब नाराज होते हैं और उसका पुतला फूंकने और उसके घर पर पत्थर फेंकने से भी बाज नहीं आते. यहां सचिन इस बारे में बताते हैं कि 2007 वर्ल्डकप में मिली हार के बाद उन्हें भारत में ऐसा नज़ारा देखने को मिला जैसे टीम कोई अपराध करके लौटी  हो.

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