नीतीश कुमार का अगला कदम क्‍या होगा

कोविंद को नीतीश का समर्थन उनके द्वारा हाल में उठाए गए उन हैरत भरे कदमों में से एक है जिसने उनके दल को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन विरोधी गुट से अलग-थलग कर दिया है. जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा, वे समय-समय पर ऐसे विरोधाभासी फैसले लेते हैं, जो उन्हें लगता है कि जनहित में हैं. वह 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में धारा के विपरीत जा रहे हैं, यह बात पिछले महीने तभी साफ हो गई थी जब वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आयोजित विपक्ष के भोज में शामिल नहीं हुए थे जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होनी थी. यही नहीं, इसके अगले दिन वे मॉरिशस के प्रधानमंत्री के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित भोज में शामिल हुए. एक ओर जहां विपक्ष के नेता मिल बैठकर राष्ट्रपति पद के चुनाव पर चर्चा कर रहे हैं वहीं उनमें एक व्यक्ति की गैर मौजूदगी कुछ और ही कहानी कह रही है. ये हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिनका संदेश स्पष्ट है. जदयू अध्यक्ष किसी के इशारे पर नहीं चलते बल्कि वही करते हैं जो उनके मुताबिक उनकी पार्टी के लिए सही है. विपक्ष के कुछ नेताओं ने गुरुवार को नीतीश से बात की, जिनके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के फैसले से कई लोग खफा हैं, हालांकि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता लालू प्रसाद यादव ने वादा किया है कि वे विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को समर्थन देने के लिए नीतीश को मना लेंगे. मीरा उसी राज्य बिहार से हैं और दलित हैं जहां नीतीश वर्ष 2005 से शासन करते आ रहे हैं.

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  राजनैतिक अवसरवाद के ज्‍वलंत उदाहरण है जो अपने नफे नुकसान के लिए मनमाफिक कदम उठाकर अपने साथियों को भी कब हैरान करने की रणनीति के माहिर खिलाडी है, इसमें तत्‍कालीन एनडीए सयोजक तथा केन्‍द्रीय रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाण्‍डीस  उस समय नीतिश कुमार की राजनीतिक उठापटक वाली राजनीती से बडे चिंतित रहते थे, जार्ज पर दबाव डालकर समता पार्टी का विलय शरद यादव वाली जनता दल यूनाइटेड से कराया फिर शरद यादव के साथ राजनीतिक गठजोड कर जार्ज को झटके पर झटके दिये, इसके बाद पार्टी के ही एक नेता दिग्‍विजय को झटके दिये, इसके बाद शरद यादव को झटके दिये इसके बाद भाजपा को हैरान परेशान कर भाजपा को अलविदा कर  लालू से हाथ मिलाया, मोदी के उदय के बाद एक बार फिर भाजपा से पीगे बढानी शुरू की, इसके बाद अगला कदम क्‍या होगा, यह तो समय ही बतायेगा परन्‍तु इतना तय है कि इस बार राजनीति का यह योद्वा जो अपनी हटो बचो की रणनीति से सबको मात देता आया – प्रेसीडेंट के चुनाव में दो नावों पर सवार हो गया है,

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मुख्यमंत्री ने सत्तारूढ़ राजग को ऐसे मुद्दों पर समर्थन दिया है जिनकी विपक्ष ने आलोचना की, मसलन पिछले वर्ष अक्तूबर माह में सर्जिकल स्ट्राइक और नवंबर में उच्च मूल्य वाले करंसी नोटों पर प्रतिबंध का राजग का फैसला. भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल होने के लिए पहले उन्होंने गैर-राजग समूह का साथ छोड़ा और फिर वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजग का साथ छोड़ उसके खिलाफ महागठबंधन बनाया. वर्ष 2012 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में उन्होंने तत्कालीन गठबंधन सहयोगी राजग को तब हैरत में डाल दिया था जब उन्होंने राजग के उम्मीदवार पीए संगमा के खिलाफ संप्रग के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन दिया था. बताया जाता है कि ऐसा उन्होंने मुखर्जी के साथ व्यक्तिगत संबंध होने के कारण किया था.

हालांकि कोविंद को समर्थन देने के मामले में, इसकी वजह जातिगत राजनीति हो सकती है. गौरतलब है कि बिहार में महादलित मतदाता बड़ी संख्या में हैं. राजद विधायक भाई बीरेंद्र ने कहा, नीतीश को अपनी पार्टी या गठबंधन से कोई लेनादेना नहीं है. वे वही करते हैं, जो उनके निजी राजनीतिक हित के लिए अच्छा होता है. विधायक का यह कहना उन अटकलों को मजबूती देता है, जिनमें कहा जाता है कि जदयू और राजद के बीच सबकुछ ठीक नहीं है. लोजपा नेता रामविलास पासवान ने नीतीश से कहा था कि वह एक ही समय में दो नावों की सवारी ना करें और राजग में शामिल हो जाएं, लेकिन ऐसा लगता है कि बिहार के मुख्यमंत्री जब तक चाहेंगे, यही सवारी करते रहेंगे.

बिहार के मुख्य मंत्री और अपने सहयोगी नीतीश कुमर द्वारा एनडीए के राष्ट्रेपति पद के उम्मीऐदवार का समर्थन किए जाने को लेकर उनके सहयोगी और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने एक दिन पहले ही कहा था कि नीतीश ऐतिहासिक भूल कर रहे हैं. अब शुक्रवार को लालू प्रसाद ने कहा है कि पता नहीं क्याा खिचड़ी पकी कि नीतीश आरएसएस की राह चल दिए. उन्होंरने कहा है वह नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के दौरान उनसे मिलेंगे और उनसे इस मुद्दे पर बात करेंगे.

लालू ने कहा, ‘दो दो बैठक में शरीक भी हुए, मैं भी गया था एक बैठक में तो मैं भी गया था. मैंने नीतीश कुमार जी से पूछा था कि क्याक करना है, क्याभ निर्णय है? तो नीतीश जी ने कहा था कि जो सभी लोग कहेंगे उसको मानना है, विपक्ष को एक साथ चलना है. अब एकाएक क्या खिचड़ी पकी कि नीतीश जी की पार्टी जेडीयू ने नाम बोल दिया बीजेपी के उम्मीचदवार का, आरएसएस के उम्मी दवार का नाम ले लिया. जरूर नीतीश जी से बात करेंगे और अपील करेंगे कि इस पर फिर से विचार की, ऐतिहासिक गलती तो आपसे हो गई है.’

गुरुवार को लालू ने कहा था, ‘उनके सहयोगी जदयू द्वारा एनडीए के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद का समर्थन करने का निर्णय ‘एक गलत निर्णय’ है और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनका समर्थन कर ‘ऐतिहासिक भूल’ कर रहे हैं.’

राजद बिहार में नीतीश कुमार के जद यू और कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार में शामिल है. राजद सुप्रीमो ने कहा था कि वह नीतीश कुमार से मामले में पुनवर्चिार करने के लिए कहेंगे लेकिन इससे राज्य सरकार को कोई खतरा नहीं है और जद यू के इस निर्णय के बावजूद गठबंधन जारी रहेगा. लालू ने कहा था कि कि मैंन उनसे ऐतिहासिक गलती नहीं करने के लिए कहूंगा क्योंकि भाजपा उम्मीदवार को समर्थन करने का उनका निर्णय गलत है.’

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