राहुल गांधी के अध्‍यक्ष बनते ही वरुण गांधी के आने की दस्तक ?

सोशल मीडिया ने विकास के गुब्‍बारे को फोड़ दिया # Varun Gandhi May Ditch BJP To Join Cousin Rahul’s Congress: Reports

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “22 सालों का हिसाब, गुजरात मांगे जवाब. गुजरात के हालात पर प्रधानमंत्री जी से दूसरा सवाल: 1995 में गुजरात पर कर्ज़- 9,183 करोड़. 2017 में गुजरात पर कर्ज़-2,41,000 करोड़. यानी हर गुजराती पर 37,000 रुपये का कर्ज़. आपके वित्तीय कुप्रबन्धन व पब्लिसिटी की सज़ा गुजरात की जनता क्यों चुकाए?”
कांग्रेस को गुजरात चुनावों में जीत दिलाने के लिए जी-तोड़ मेहनत में जुटे राहुल गांधी जब सोमनाथ मंदिर पहुंचे तो बीजेपी के निशाने पर आ गए. उनके ‘धर्म’ पर खूब हंगामा हो रहा है लेकिन राहुल मैदान में डटे हुए हैं. वे गुरुवार को फिर से श्री स्वामीनारायण गोपीनाथ जी के मंदिर में दर्शन करने पहुंचे.
गुजरात के बोटाद जिले में स्थित इस मंदिर में ईश्वर के दर्शनों के बाद राहुल गांधी ने एक रैली को भी संबोधित किया. रैली में राहुल ने बेहद जोरदार तरीके से बीजेपी पर सियासी हमला बोला और मोदी सरकार को किसान विरोधी बताया.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में किसानों को मूंगफली और कपास का न्यून्यतम समर्थन मूल्य आज से अधिक दिया जाता था. राहुल गांधी ने किसानों से वादा किया कि अगर गुजरात में कांग्रेस की सरकार आती है तो 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा.

अब कांग्रेस में एक नया आत्‍मविश्‍वास आ गया है. राहुल गांधी अब पप्पू नहीं हैं जैसा कि ट्रेडिशनल और सोशल मीडिया में पेश किया जा रहा था. अब उन्हें अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है, खासकर उनके बर्कले प्रवास के बाद. राहुल को लेकर मेनस्‍ट्रीम टीवी के कवरेज में भी एक बदलाव देखने को मिला है. अब पहले से बेहतर रूप से कवर किया जा रहा है और ज्यादा स्‍पेस भी दी जा रही है. दूसरा बदलाव मोदी की लोकप्रियता में एक निश्चित गिरावट के रूप में सामने आ रही है. उन्‍हें प्रत्‍यक्ष तौर पर नोटबंदी और जीएसटी को लेकर आर्थिक विकास में तेज गिरावट के लिए दोषी ठहराया जा रहा है. तीसरा और सबसे सबसे बड़ा कारण यह है कि मोदी राहुल गांधी, और कांग्रेस तथा उसके गुजरात कनेक्‍शन पर काफी हमला बोल रहे हैं. राहुल और हार्दिक पटेल के गठबंधन ने मोदी को सकते में डाल दिया है और बीजेपी को डिफेंसिव मूड में ला दिया है. मोदी अब अपनी नीतियों पर सफाई देते नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया, जिस पर मोदी की काफी मजबूत पकड़ है, उसी ने उनके विकास के गुब्‍बारे को फोड़ दिया है और वहीं ‘विकास पागल हो गया है’ का संदेश वायरल हो चला है. मोदी को इससे मुकाबले के लिए एक रणनीति बनानी चाहिए थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं रहे और इसी फ्रस्‍टेशन में वह कांग्रेस पर हमला कर रहे हैं.
वही दूसरी ओर राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी वरुण को पार्टी में शामिल कराने मे ज्यादा उत्सुक हैं. प्रियंका गांधी चाहती हैं कि वरुण को पार्टी में सीनियर ओहदा मिले. जिसके लिए पार्टी के टॉप नेताओं के साथ मशविरा किया गया है. पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बाद वरुण गांधी को नंबर 2 की हैसियत वाली कुर्सी मिल सकती है. वरुण गांधी को कांग्रेस में सुपर जनरल सेक्रेटरी बनाया जा सकता है. जिसके लिए सेक्रेटरी जनरल का नया पद बनाया जाएगा. जो बाकी महासचिव और प्रभारियों से ऊपर होगा. वरुण गांधी के लिए भी बकायदा कांग्रेस के संविधान में बदलाव किया जाएगा. कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इस पद को बनाने के लिए प्रस्ताव पास कराया जाएगा.
प्रियंका और वरुण गांधी के बीच रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं. वरुण गांधी और प्रियंका लगातार मिलते रहे हैं. दोनों परिवार इस बात का ख्याल करते रहे कि एक दूसरे के खिलाफ नहीं बोले. बीजेपी की राजनीति में वरुण गांधी सितारे के तौर पर चमके. 2009 में वरुण पीलीभीत से लोकसभा के सांसद बने. बीजेपी में उनको राहुल गांधी के काट के तौर देखा गया. बीजेपी ने वरुण गांधी को पार्टी का महासचिव बनाया. लेकिन वरूण गांधी को उम्मीद थी कि 2014 को चुनाव के बाद उनको कोई अहम पद मिलेगा. लेकिन उनकी मां मेनका गांधी को केन्द्रीय कैबिनेट में जगह मिली. वरूण गांधी ने इसके बाद यूपी चुनाव से पहले पूरे राज्य में बीजेपी के नेता के तौर पर अपने आपको प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया. ये बीजेपी को नागवार गुजरा जिसके बाद पार्टी की तरफ से कहा गया कि अपने आप को इस तरह प्रोजेक्ट ना करे. तभी से वरूण गांधी और बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ीं. बीजेपी ने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में वरूण को कोई खास तवज्जो नहीं दी. जिसके बाद वरूण गांधी की नाराजगी पार्टी को लेकर बढ़ गई. जहां यूपी में बीजेपी की सरकार है वहां वरुण गांधी हाशिए पर हैं. पार्टी में उनकी पूछ कम है क्योंकि बीजेपी के अध्यक्ष के साथ उनके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं है.
2004 के आम चुनाव से पहले बीजेपी के कद्दावर नेता वरुण गांधी बीजेपी में आए थे. उनको बीजेपी में लाने की भूमिका बनाई उस वक्त के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन ने. प्रमोद महाजन ने सबसे पहले वरुण गांधी की सार्वजनिक तौर पर तारीफ शुरू की. मीडिया को भी ये बताया गया कि वरुण किस तरह से राहुल गांधी से ज्यादा सक्षम हैं. वरुण के नॉलेज और उनके कविता रचने की बात भी बताई जाने लगी. लेकिन 2004 का चुनाव वरुण गांधी नहीं लड़ पाए. उस वक्त वरुण की उम्र कम थी. लेकिन वरुण ने बीजेपी के लिए प्रचार किया. वरुण ने पहली बार 1999 में पीलीभीत में अपनी मां मेनका गांधी के लिए प्रचार किया और राजनीति में आने की दस्तक दी.

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