18 जुलाई 2026 शनिवार हनुमान जी और शनि देव की पूजा का विशेष विधान, पीपल के नीचे दीपक & घोर संकटों से मुक्ति चाहते हैं, तो गुप्त नवरात्रि के दौरान..

18 जुलाई 2026 (शनिवार) के पंचांग के अनुसार, आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि & आज से सौर श्रावण (Solar Sawan) महीने की शुरुआत &  18 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। इस तिथि पर पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र और वरीघा योग का विशेष संयोग बनेगा। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर सिंह राशि में है, जिसके स्वामी सूर्यदेव होते हैं।  सूर्योदय: सुबह 05:34 सूर्यास्त: शाम 07:20 & अत्यंत उग्र और शक्तिशाली मानी जाती हैं, BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob 9412932030

आध्यात्म क्षेत्र में मेरी उपलब्धियां: अन्य क्षेत्रों में भी लंबी फेहरिस्त है:

Award : Sanatan Dharma Journalist of The Year 2026 अवॉर्ड: सनातन धर्म जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर , नई दिल्ली में सम्मानित

Awardy : Aadi Guru shankaracharya Sanatani Sewa Puruskar आदि गुरु शंकराचार्य सनातनी सेवा पुरस्कार, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक जी द्वारा सम्मानित &

Mahamai Peetambra shree Bagla Mukhi Shakti Peeth Dehradun Uttrakhand

&

#President Uttrakhand: Rastriya shashkat Hindu Maha Sangh ( राष्ट्रीय सशक्त हिन्दू महासंघ, )

Rashtriya Saint Suraksha Parishad (HQ Gujrat) राष्ट्रीय संत सुरक्षा महापरिषद

मुख्यालय:

Nanda Devi Enclave Banjara Wala Dehradun Uttarakhand Mob 9412932030

 शनिवार के दिन पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। शनि दोष, ढैय्या या साढ़ेसाती से मुक्ति के लिए आज शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी

दूसरा दिन (द्वितीया): मां तारा-  ऐं ऊँ ह्रीं क्रीं हूं फट्। भोग: भोग: सफेद रंग के पेड़े, रसगुल्ले, गाढ़ा किया हुआ गाय का दूध, गुड़, मखाना, खीर और नारियल। फूल: इन्हें नीलकमल और श्वेत पुष्प पसंद हैं।

तीसरा दिन (तृतीया): मां त्रिपुर सुंदरी (ललिता/षोडशी)-

पूजा लाभ: ऐश्वर्य, सौंदर्य, निखरे रूप और सुखी दांपत्य जीवन के लिए।

श्री ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं क्रीं कए इल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।

सरल मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरायै नम:।
भोग: पंचामृत, पंचमेवा, सूजी का हलवा, मीठी खीर, फलों के रस और शुद्ध घी के मिष्ठान।
फूल: माँ ललिता को गुलाब और चमेली के फूल पसंद हैं।

 चौथा दिन (चतुर्थी): मां भुवनेश्वरी-

पूजा लाभ: भूमि, भवन, भौतिक सुख और चंद्रमा जनित दोषों की शांति के लिए।

मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।

सरल मंत्र: ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नम:।
भोग: केसर युक्त खीर और मावे के पेड़े, पंचमेवा और दूध से बनी मिठाई।

फूल: इस माता को लाल गुड़हल, कमल और सुगंधित पीले पुष्प पसंद हैं।

5. पांचवां दिन (पंचमी): मां त्रिपुर भैरवी-

पूजा लाभ: तंत्र बाधा, नजर दोष और भूत-प्रेत आदि के भय को नष्ट करने के लिए।

मंत्र: ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा।

सरल मंत्र: ह स: हसकरी हसे।’
भोग: मीठी पूरी या गुड़ से बनी खीर, उड़द की बनी सामग्री, तीखे और नमकीन व्यंजन।
फूल: इन्हें लाल रंग के फूल और लाल कनेर बहुत पसंद हैं।

6. छठा दिन (षष्ठी): मां छिन्नमस्ता-

पूजा लाभ: कोर्ट-कचहरी, मुकदमे में विजय, राहु दोष मुक्ति और तीव्र वशीकरण के लिए।

मंत्र: श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा:।
भोग: मालपुआ या उड़द की दाल की कचौरी, लाल फल और लाल मिठाई।

फूल: माँ भैरवी को गेंदा और कनेर के फूल पसंद हैं।

सातवां दिन (सप्तमी): मां धूमावती-

पूजा लाभ: दरिद्रता, रोग, शोक और जीवन के सभी दुखों के नाश के लिए।

मंत्र: धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।
भोग: उड़द दाल के वड़े, कचौरी या भुने हुए चने, नमकीन और तीखे खाद्य पदार्थ, बेसन के पकोड़े, और काले चने।

फूल: इन्हें सूखे फूल, अपराजिता और अमलतास के फूल पसंद हैं।

8. आठवां दिन (अष्टमी): मां बगलामुखी-

पूजा लाभ: शत्रुओं के स्तंभन (वाणी व बुद्धि रोकने), वाद-विवाद में जीत और मंगल दोष के लिए।

मंत्र: ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिव्हा कीलय, बुद्धिं विनाश्य ह्रीं ॐ स्वाहा।

भोग: केसरिया भात, बेसन के लड्डू या कढ़ी, पीले रंग के मिष्ठान, बेसन से बनी चीजें और केसर।
फूल: माँ पीतांबरा को पीले रंग के फूल, जैसे पीला गेंदा या पीला कनेर पसंद हैं।

9. नौवां दिन (नवमी): मां मातंगी-

पूजा लाभ: कला, संगीत, गृहस्थ सुख और आकर्षण शक्ति बढ़ाने के लिए।

मंत्र: ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी फट् स्वाहा।
भोग: मीठा गुड़ भात, दही-भात, विभिन्न प्रकार के अन्न, फल, खीर और घर में बना सात्विक भोजन।

फूल:माँ मातंगी को पलाश, चमेली के पुष्प और बेलपत्र पसंद हैं।

9. नौवां दिन (नवमी): मां कमला-

पूजा लाभ: अटूट धन-धान्य, समृद्धि, वैभव और लक्ष्मी कृपा पाने के लिए।

मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।

सरल मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमलायै नम:।
भोग: मखाने की खीर, मिश्री-मावा या नारियल की बर्फी, शहद, मखाने और सफेद मिष्ठान।
फूल: इन्हें गुलाबी और लाल कमल पसंद हैं।

विशेष बात: चूंकि महाविद्याएं 10 हैं और नवरात्रि के दिन 9 होते हैं, इसलिए नवमी तिथि (नौवें दिन) को दो देवियों—मां मातंगी और मां कमला की साधना एक साथ या अलग-अलग पहर में करने का विधान है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन यानी पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी मां त्रिपुर भैरवी हैं आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में पर्व के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की आराधना की जाती है। मां भुवनेश्वरी को दस महाविद्याओं में चतुर्थ स्थान प्राप्त है। वे संपूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री, जगतजननी और ब्रह्मांड की स्वामिनी मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि उनकी कृपा से साधक को सुख-समृद्धि, यश, ऐश्वर्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार मां भुवनेश्वरी समस्त लोकों की रक्षा करने वाली शक्ति हैं। तंत्र साधना में भी मां भुवनेश्वरी की विशेष महिमा का वर्णन मिलता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान उनकी उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।  मां भुवनेश्वरी को नारियल, मौसमी फल, पेड़े, या किसी सफेद मिठाई अथवा खीर का भोग लगाएं। इसके बाद मां भुवनेश्वरी की आरती करें और पूजा में अनजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा याचना करें।

इन्हें ‘भैरवी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये तमोगुण और ब्रह्मांड के विनाशक तत्वों को नियंत्रित करती हैं, लेकिन अपने भक्तों के लिए वे अभय वरदान देने वाली करुणामयी मां हैं। मां त्रिपुर भैरवी का स्वरूप अत्यंत ओजस्वी, विनाशक और साथ ही भक्तों के लिए परम कल्याणकारी माना गया है। इनकी कृपा से साधक के भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा तथा मानसिक अशांति दूर होती है और जीवन में आत्मविश्वास तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि पर विधि-विधान से मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से साधना शीघ्र सिद्ध होती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 

जीवन के घोर संकटों, कर्ज, बीमारी या शत्रुओं से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो गुप्त नवरात्रि के दौरान….. संकट को हरने और माता की शरण में आए भक्त की रक्षा करने के लिए अचूक माना गया है। मां भुवनेश्वरी को संतान सुख, कर्ज से मुक्ति और मान-सम्मान दिलाने वाली देवी माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में इनकी पूजा करने से वाणी में मधुरता और व्यक्तित्व में एक विशेष आकर्षण आता 

‘शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते॥’

नवार्ण मंत्र ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक ; ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।’

‘ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः’ या ‘ह्रीं’ का रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से कम से कम 108 बार जप करें।

माता का रंग उदीयमान सूर्य यानी सुबह के लाल सूर्य की तरह लाल है। उनके चार हाथ हैं, जिनमें वे विद्या/ ज्ञान, वरद मुद्रा, अभय मुद्रा और एक माला धारण किए हुए हैं। मां त्रिपुर भैरवी के तीन नेत्र हैं और वे मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करती हैं। लाल वस्त्र और लाल फूलों की माला माता को अत्यंत प्रिय है।

मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर का डर, डिप्रेशन और मानसिक तनाव पूरी तरह खत्म हो जाता है। यह साधना कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय दिलाने, शत्रुओं के प्रभाव को कम करने और वाक-सिद्धि प्राप्त करने के लिए अचूक मानी जाती है। गृहस्थ जीवन में आ रही बाधाएं भी इस पूजा से दूर होती हैं।

गुप्त नवरात्रि की पूजा आधी रात या निशिथ काल में करना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है, हालांकि गृहस्थ लोग इसे सुबह भी कर सकते हैं। पंचमी तिथि के दिन मां त्रिपुर भैरवी को खीर, शहद, हलवा या लाल रंग की मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।  आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि मां त्रिपुर भैरवी की साधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप और आराधना करने से साधक को साहस, आत्मबल, आध्यात्मिक ऊर्जा तथा जीवन की बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। मां त्रिपुर भैरवी अपने भक्तों को निर्भयता, सफलता और दिव्य शक्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

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