22 अगस्त 2026 शनिवार; भगवान शनिदेव और हनुमान के लिए समर्पित & 23 अगस्त 2026  ‘पवित्रा एकादशी’ या ‘पुत्रदा एकादशी & बगला मुखी पीठ के संस्थापक साधक तथा वरिष्ठ पत्रकार 23 अगस्त को नई दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यक्रम में सम्मानित

सावन में भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो!; By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & President: Bagla Mukhi Peeth Dehradun 9412932030

सूर्योदय: सुबह 05:54 बजे सूर्यास्त: शाम 06:54 बजे

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:26 बजे से सुबह 05:10 बजे तक राहुकाल: सुबह 09:09 बजे से दोपहर 10:46 बजे तक

वैदिक परंपरा में शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनिदेव और संकटमोचन हनुमान जी की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। भाद्रपद मास की दशमी तिथि को दशा माता और भगवान विष्णु के पूजन का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन शनिदेव को सरसों का तेल व काले तिल अर्पित करने तथा सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करने से साढ़ेसाती व ढैया के प्रभावों से मुक्ति मिलती है, कष्टों का निवारण होता है और जीवन में स्थायित्व तथा सफलता प्राप्त होती है।

22 अगस्त शनिवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। इस दिन सूर्य सिंह राशि में, चंद्रमा वृश्चिक राशि में तथा गुरु और बुध कर्क राशि में स्थित रहेंगे। 22 अगस्त शनिवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। इस दिन सूर्य सिंह राशि में, चंद्रमा वृश्चिक राशि में तथा गुरु और बुध कर्क राशि में स्थित रहेंगे।

3 अगस्त 2026, रविवार दिन: रविवार विक्रम संवत: 2083 पक्ष: शुक्ल पक्ष तिथि: एकादशी

23 अगस्त 2026 (रविवार / Sunday) को भाद्रपद (भादों) महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि (पवित्रा / श्रावण पुत्रदा एकादशी) दिन (Day): रविवार (23 अगस्त 2026 / Sunday) आज का सबसे शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त): दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक (यह समय किसी भी नए या महत्वपूर्ण काम को शुरू करने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है)

आज का अशुभ समय (राहुकाल): शाम 05:12 बजे से शाम 06:49 बजे तक (रविवार के दिन राहुकाल सायंकाल के समय रहता है, इस दौरान कोई नया काम, खरीदारी या बड़ा लेन-देन करने से बचें) सुबह की पूजा/ध्यान का समय (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 04:27 बजे से 05:11 बजे तक

23 अगस्त 2026 को पवित्र भाद्रपद (भादों) महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है और दिन रविवार (Sunday) है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘पवित्रा एकादशी’ या ‘पुत्रदा एकादशी’ के नाम से जाना जाता है।

वैदिक परंपरा में एकादशी का व्रत भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है, और रविवार का दिन प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य देव की पूजा का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करने और ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करने से संतान सुख, आरोग्य, मान-सम्मान तथा पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन के सभी पापों का नाश होकर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

23 अगस्त 2026 का पंचांग

  • दिन: रविवार (Sunday)
  • विक्रम संवत: 2083
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • तिथि: एकादशी (पुत्रदा एकादशी)
  • नक्षत्र: मूल (शाम 05:43 बजे तक, तत्पश्चात पूर्वाषाढा)
  • योग: विष्कुम्भ (प्रातः 06:12 बजे तक, तत्पश्चात प्रीति योग)
  • सूर्योदय (दिल्ली): सुबह 05:54 बजे
  • सूर्यास्त (दिल्ली): शाम 06:52 बजे
  • राहुकाल: शाम 05:15 बजे से शाम 06:52 बजे तक.

23 अगस्त 2026, रविवार को भाद्रपद (भादों) मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी तिथि है। रविवार का दिन भगवान सूर्य देव की पूजा तथा एकादशी का दिन भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने और भगवान विष्णु की पूजा कर एकादशी व्रत कथा सुनने से जीवन में सुख, शांति, संतान सुख और उत्तम आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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