23 जुलाई 2026 (गुरुवार) को आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि & 23 जुलाई 2026 को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि है और गुरुवार का दिन है। गुरुवार का दिन भगवान श्री हरि विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इस दिन विष्णु पूजा, पीपल के वृक्ष की पूजा और पीले कपड़ों या चने की दाल का दान करने से ज्ञान, सुख-समृद्धि और भाग्य में वृद्धि होती है। 23 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। यह तिथि सुबह 7 बजकर 4 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस तिथि पर विशाखा नक्षत्र और शुभा योग का विशेष संयोग & ऋतु: वर्षा ऋतु & घर से निकलने से पहले थोड़ा जीरा या दही खाकर निकलें और भगवान विष्णु & केले के वृक्ष की पूजा करें।

श्री हरि विष्णु और मां दुर्गा की कृपा से आपका आज का दिन अत्यंत शुभ और मंगलमय हो; BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob 9412932030.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दसवें और अंतिम दिन दस महाविद्याओं की अंतिम शक्ति मां कमला की साधना की जाती है। ये पूर्णतः धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य, सौंदर्य और समृद्धि की देवी हैं। भगवान विष्णु की शक्ति होने के कारण इनका स्वरूप अत्यंत सौम्य, शांत और वरदायक है। गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन इनकी पूजा करने से जीवन से हर प्रकार की दरिद्रता, आर्थिक संकट और मानसिक अशांति का नाश होता है यह गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन होता है, इसलिए मां कमला की पूजा के बाद अपनी नौ दिनों की साधना की पूर्णता के लिए कपूर से आरती & उन्हें खीर का भोग दें और कुछ उपहार या दक्षिणा देकर विदा करें। सबसे अंत में हाथ जोड़कर दसों महाविद्याओं और मां कमला से नौ दिनों की पूजा में अनजाने में हुई किसी भी भूलचूक के लिए क्षमा याचना ।

23 जुलाई 2026 (गुरुवार) का पंचांग: इस दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (07:04 AM तक, फिर दशमी) है। नक्षत्र विशाखा (अगले दिन 01:43 AM तक) और चंद्रमा तुला राशि में रहेंगे। दिन का शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त) दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक & आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि सुबह 07:04 AM तक रहेगी, जिसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी。 & विशाखा नक्षत्र रात 01:43 AM (24 जुलाई) तक रहेगा & दोपहर 02:09 बजे से शाम 03:52 बजे तक & ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:15 बजे से 04:57 बजे तक & सूर्योदय: सुबह 05:37 AM & सूर्यास्त: शाम 07:18 PM

राहुकाल दिन का वह समय होता है जब नकारात्मक ऊर्जा थोड़ी ज़्यादा मानी जाती है। राहुकाल के समय ही बाहर जाना पड़े, तो थोड़ा सा मीठा खाकर, पानी पीकर और भगवान विष्णु या अपने इष्टदेव का ध्यान करके घर से निकलें।
शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त) यह दिन का सबसे अच्छा और पवित्र समय होता है।