25 अक्तूबर 2025;कई योग का निर्माण & विनायक चतुर्थी &गणेश जी की आरती कर पूजा संपन्न करें;भूल चूक के लिए क्षमा मांग सकेगे आप

25 अक्टूबर 2025 दिन शनिवार कार्तिक माह, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि , विनायक चतुर्थी  by chandra shekhar joshi Mob. 9412932030

25 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि पर अनुराधा नक्षत्र और शोभन योग का संयोग बन रहा है। शनिवार को अभिजीत मुहूर्त 11:42-12:27 हैं। राहुकाल सुबह 09:17-10:41 तक । ज्योतिष दृष्टि से 25 अक्टूबर 2025 का दिन खास & शनिदेव को समर्पित शनिवार के दिन कई योग का निर्माण &  इन योग का सीधा प्रभाव & 25 अक्टूबर 2025, शनिवार का दिन है और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी​ तिथि है. आज विनायक चतुर्थी व्रत 

 25 अक्टूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और पंचमी तिथि रहेगी. साथ ही अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, शोभन योग, रवि योग, विडाल योग, वणिज करण और विष्टि करण का निर्माण हो रहा है. हालांकि, शनिदेव को समर्पित शनिवार के दिन किसी भी ग्रह का राशि गोचर नहीं होगा.

हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है. इसी तरह कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विनायक चतुर्थी व्रत रखा जाएगा. इस दिन भक्ति भाव से भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत का संकल्प करने से भगवान गणेश सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और कार्यों में आने वाली बाधाओं का अंत होता है. 

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि पर विनायक चतुर्थी व्रत रखा जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार,  कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 25 अक्टूबर 2025 को देर रात 01:19 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 26 अक्टूबर को सुबह 03:48 बजे होगी. चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन करें और विनायक चतुर्थी के व्रत का संकल्प करें.
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:46 मिनट से 05:37 बजे तक.
विजय मुहूर्त – दोपहर 01:57 मिनट से 02:42 बजे तक.
गोधूलि मुहूर्त – शाम 05:42 मिनट से 06:07 बजे तक.
निशिता मुहूर्त – रात 11:40 मिनट से 12:31 बजे

विनायक चतुर्थी पूजा विधि (Vinayak Chaturthi 2025 Puja Vidhi)
सुबह सवेरे उठें और स्नान करें. 
शुभ मुहूर्त पर पूजा शुरू करें और बप्पा की प्रतिमा चौकी पर स्थापित करें। 
भगवान गणेश का सबसे पहले गंगाजल से अभिषेक करें. 
बप्पा को पीले रंग का वस्त्र अर्पित करें.
सिंदूर और चंदन का तिलक करें.
गणेश जी को फूल अर्पित करें.
बप्पा को दूर्वा चढ़ाएं और मोदक व लड्डू का भोग चढ़ाएं. 
गणेश जी का ध्यान करें और गणेश चालीसा का पाठ करें व मंत्र जाप करें.
गणेश जी की आरती कर पूजा संपन्न करें.भूल चूक के लिए क्षमा मांगे.

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