9 जून 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय बदलाव लेकर आएगा & ज्येष्ठ माह का छठा बड़ा मंगल: बुढ़वा मंगल,11 जून 2026, गुरुवार- परम एकादशी

पंचांग 9 जून 2026 के अनुसार आज का दिन मंगलवार, कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज राहुकाल शाम 03:49 से 05:34 बजे तक रहेगा & 9 जून को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि मंगलवार का दिन है। नवमी तिथि मंगलवार को देर रात 2 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। 9 जून को सुबह 8 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, उसके बाद आयुष्मान योग लग जायेगा। साथ ही मंगलवार को सुबह 9 बजकर 40 मिनट तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, उसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा। इसके अलावा 9 जून को पंचक है। 9 जून को ज्येष्ठ माह का छठा बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल) है। 

  • अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की नवमी- 9 जून 2026 को देर रात 2 बजकर 35 मिनट तक
  • प्रीति योग- 9 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, उसके बाद आयुष्मान योग लग जायेगा
  • पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र- 9 जून 2026 को सुबह 9 बजकर 40 मिनट तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, उसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा
  • 9 जून 2026 विशेष-  ज्येष्ठ माह का छठा बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल)
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:34 ए एम से 05:17 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:11 पी एम से 01:04 पी एम
  • विजय मुहूर्त – 02:50 पी एम से 03:43 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:14 पी एम से 07:36 पी एम
  • सूर्योदय- सुबह 5:21 बजे  सूर्यास्त- शाम 7: 17 बजे

 बुध ग्रह 11 जून को आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेस कर जाएंगे। बुध का यह नक्षत्र परिवर्तन 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। 8 जून तक बुध पुनर्वसु नक्षत्र में ही गोचर करते रहेंगे और उसके बाद पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। 11 जून से 8 जुलाई तक का समय कुछ राशियां के लिए बेहद शुभ

9 से 23 जून के बीच _ कालसर्प योग को ज्योतिष शास्त्र के घातक योगों में से एक माना जाता है। इस योग के साथ पैदा हुए लोगों के जीवन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यह योग तब बनता है जब कुंडली के 7 मुख्य ग्रह राहु-केतु के बीच फंस जाते हैं। ऐसी ही स्थिति 9 से 23 जून के बीच भी बनेगी। चंद्रमा जब मीन से निकलकर कुंभ में जाएंगे तो सिंह में बैठे केतु और कुंभ में बैठे राहु के बीज सभी ग्रह आ जाएंगे। ऐसे में कालसर्प योग के प्रभाव से कुछ राशियों को जीवन में उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ सकता है। 

पंचाग के अनुसार, 9 जून 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय बदलाव लेकर आएगा। कृष्ण पक्ष नवमी से शुरू होकर रात के बाद दशमी में बदल जाएगा। चंद्रमा मीन राशि में पूरे दिन रहेगा, यह समय शांत रहने, सोच-समझकर काम करने और जल्दबाजी से बचने का संकेत है। 9 जून को कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह से प्रारंभ होकर रात 2:35 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। नवमी तिथि को शक्ति और साधना से जुड़ा माना जाता है, जबकि दशमी नए कार्यों के शुभारंभ और आगे बढ़ने का संकेत देती है। नक्षत्र की बात करें तो सुबह 9:39 बजे तक पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र प्रारंभ होगा। यह नक्षत्र शांत स्वभाव और गहन चिंतन से जुड़ा माना जाता है। इसलिए यह दिन सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दिन सुबह 8:18 बजे तक प्रीति योग रहेगा, जिसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। आयुष्मान योग को शुभ तथा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। वहीं करणों में पहले तैतिल, फिर गर और उसके बाद वणिज करण रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ये करण कार्यों की गति और उनके परिणामों को प्रभावित करते हैं।

11 जून 2026, गुरुवार को पड़ने वाली ‘परमा एकादशी’ (पुरुषोत्तम या अधिकमास एकादशी) हर तीन साल में एक बार आती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत है, जिसके पालन से सभी पापों का नाश होता है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जून 2026 को देर रात 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी और 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 4 बजकर 2 मिनट से लेकर 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. वहीं सुबह 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा. इसके बाद दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से दोपहर 3 बजकर 36 मिनट तक विजय मुहूर्त बन रहा है. 11 जून 2026 को परमा एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है जो कि पूरे दिन रहेगा.

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है. 11 जून को परमा एकादशी व्रत रखा जाएगा और 12 जून को व्रत का पारण किया जाएगा. पंचांग के अनुसार व्रत का समय सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.

परमा एकादशी अधिकमास में आती है और अधिकमास यानि मलमास तीन साल में एक बार आता है. इसलिए परमा एकादशी व्रत तीन साल में एक बार पड़ता है और ऐसे में इस व्रत का पुण्य अन्य एकादशी की तुलना में तीन गुना बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत रखने वाले जातक का 100 यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है. परमा का अर्थ है सबसे उत्तम, यानि परमा एकादशी सभी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ व उत्तम है. इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्रा​प्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति दिलाता है.

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