केजरीवाल बनाम केंद्र बनाम उपराज्यपाल बनाम अफसरशाही का चक्रव्यूह

केजरीवाल के धरना पर आज दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. अदालत ने कहा , “धरना देने (केजरीवाल द्वारा) का अधिकार किसने दिया? आप उपराज्यपाल के कार्यालय के भीतर बैठे हैं. अगर यह हड़ताल है तो ये दफ्तर के बाहर होनी चाहिए थी. ” अदालत ने कहा कि आमतौर पर धरना किसी संस्थापन या कार्यालय के बाहर दिया जाता है न कि अंदर.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दिल्ली के दंगल में कूद पड़े हैं. राहुल गांधी ने ट्वीट कर रहा है कि दिल्ली में केजरीवाल और बीजेपी दोनों धरने पर हैं. राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ”दिल्ली के मुख्यमंत्री एलजी ऑफिस में धरना दे रहे हैं. बीजेपी सीएम आवास पर धरना दे रही है. दिल्ली के अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं. अव्यवस्था को खत्म करने के बजाए प्रधानमंत्री ने अराजकता पर आंखें मूंद ली हैं. दिल्ली की जनता इस ड्रामे की शिकार बन रही है.”

सीएम अरविंद केजरीवाल ने रविवार शाम एक दूसरे ट्वीट में पीएम मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि सर, आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म करवा दीजए. केजरीवाल ने ट्वीट किया, ”सर पूरी दिल्ली ही नहीं, पूरा देश अब तो आपसे गुहार कर रहा है. इन आईएएस अफ़सरों की हड़ताल ख़त्म करवा दीजिए और लोगों की तरफ से चुनी हुई सरकार को प्लीज़ काम करने दीजिए. जनता बहुत आहत और अपमानित महसूस कर रही है.”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केंद्र की मोदी सरकार के बीच तनातनी जारी है. केजरीवाल धरना से उठने को तैयार नहीं हैं तो वहीं उप-राज्यपाल अनिल बैजल उनसे मिलने के लिए तैयार नहीं हैं. यानि दिल्ली में राजनीतिक संकट जैसी स्थिति बनी हुई है. इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की दो अहम सहयोगियों शिवसेना और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का केजरीवाल को साथ मिला है.

कांग्रेस के सहयोग से कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने कुमारस्वामी भी केजरीवाल का समर्थन कर चुके हैं. आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के रुख पर निशाना साधा है. आप नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस को निश्चित रूप से सोचना चाहिए जब जब मणिपुर, उत्तराखंड में लोकतंत्र की हत्या हुई सबसे पहले AAP ने कांग्रेस से पहले आवाज़ उठाई. दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या हो रही है और कांग्रेस की यह चुप्पी राजनैतिक इतिहास में काले अक्षरों में लिखी जाएगी.

एलजी अनिल बैजल के आवास पर पिछले आठ दिन से धरने पर बैठे सीएम अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल के धरने पर आज सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि धरने की अनुमति किसने दी? जिसपर दिल्ली सरकार के वकील ने कहा की ये एक निजी फैसला है. हाईकोर्ट ने कहा कि आप किसी के घर में जबरन अंदर बैठकर धरना नहीं दे सकते हैं. जहां पर मुख्यमंत्री धरना दे रहे हैं वह उपराज्यपाल के कार्यालय का हिस्सा है. केजरीवाल के धरना के खिलाफ बीजेपी के नेता विजेंद्र गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी. हालांकि कोर्ट ने अभी इस मामले में कोई निर्देश या नोटिस जारी नहीं किया है.

आईएएस अधिकारी काम पर लौट जाएं इस मांग के साथ केजरीवाल आज लगातार आठवें दिन उप-राज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर में धरना दे रहे हैं. उनके साथ कैबिनेट सहयोगी भी मौजूद हैं. केजरीवाल के अलावा उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भूख हड़ताल कर रहे हैं. जैन की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

दिल्ली में आठ दिन से एलजी हाउस में जारी केजरीवाल और उनक मंत्रियों का धरना जल्द खत्म हो सकता है. अरविंद केजरीवाल की अपील का आईएएस एसोसिएशन ने स्वागत किया है. एसोसिएशन ने कहा कि हम हमेशा से ही काम कर रहे हैं, सीएम की अपील के बाद उन उनसे बातचीत करने को तैयार हैं. वहीं दूसरी ओर डिप्टी सीएम सिसोदिया ने भी अधिकारियों से बात करने पर सहमति जताई है, हालांकि सिसोदिया ने कहा है कि बातचीत एलजी की मौजूदगी में ही हो. आईएसएस एसोसिएशन ने ट्वीट किया, ”हम मुख्यमंत्री की अपील का स्वागत करते हैं. हम एक बार फिर कहते हैं कि हम पूरे समर्पण और शक्ति के साथ काम पर बने रहेंगे. हम अपनी सुरक्षा और गरिमा के लिए ठोस हस्तक्षेप की उम्मीद करते हैं. हम इस मामले पर मुख्यमंत्री के साथ औपचारिक चर्चा के लिए तैयार हैं.”

डिप्टी सीएम सिसोदिया ने ट्वीट किया, ”अधिकारियों से चर्चा करने में खुशी होगी. दिल्ली सरकार अधिकारियों को सुरक्षित माहौल देने के प्रतिबद्ध है. हालांकि उपराज्यपाल ‘सेवाओं’ और ‘सुरक्षा’ दोनों के प्रमुख हैं. इसलिए बैठक उनकी मौजूदगी में होनी चाहिए जिससे उन विष्यों से संबंधित आश्वासन दिया जा सके.”

उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना ने कहा कि उनके साथ (केजरीवाल) जो हो रहा है वो सही नहीं है. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, ”अरविंद केजरीवाल का ये मूवमेंट अपने आप में अनोखा है. इस मामले पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने खुद अरविंद केजरीवाल से फोन पर बात की है.” उन्होंने बताया, ”उद्धव ठाकरे ने कहा है कि केजरीवाल दिल्ली के लिए अच्छा कर रहे हैं. केजरीवाल की सरकार दिल्ली की चुनी हुई सरकार है. अभी जो कुछ भी दिल्ली में हो रहा है वह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.”

वहीं नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भी केजरीवाल के प्रति हमदर्दी दिखाई है. जेडीयू नेता पवन वर्मा ने कहा, ”मुख्य सचिव के साथ दुर्व्यवहार के बाद, जब सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस बात का आश्वासन दिया था कि दोबारा ऐसा नहीं होगा तो आईएएस अधिकारियों को अब फौरन अपने काम पर लौट जाना चाहिए. उन्हें दिल्ली वासियों के लिए ऐसा करना होगा.” उन्होंने कहा, ”जो अधिकारी निर्वाचित सरकार का सहयोग नहीं कर रहे हैं शायद उन्हें तत्काल राजनीतिक तौर पर कुछ फायदा मिल जाए लेकिन ये हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.”

शिवसेना जहां लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रही है. वहीं जेडीयू भी नोटबंदी, पेट्रोल डीजल की कीमत, विशेष राज्य के दर्जे के मसले पर सरकार से अलग राय रखती रही है. अब इन दोनों दलों ने केजरीवाल का साथ दिया है. जेडीयू और शिवसेना से पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी), एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर (जेडीएस), हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), नेशनल कांफ्रेंस और वामदलों ने केजरीवाल का साथ दिया था.

ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, एचडी कुमार स्वामी और केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने पिछले दिनों केजरीवाल के समर्थन में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि बीजेपी इस संवैधानिक संकट को दूर करे. केंद्र एक चुनी हुई सरकार को परेशान कर रही है. दरअसल, करीब तीन महीने पहले दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई कथित मारपीट के बाद आईएएस अधिकारी हड़ताल पर चले गये थे. केजरीवाल सरकार का आरोप है कि अधिकारी बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. जिससे की कई विधायी कार्य रुके हुए हैं.

 

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