असाध्य बीमारी से ग्रस्त  मृत्यु तुल्य योग इतना प्रबल था – इस संचित पाप कर्म का लेखा जोखा मिटाने स्वयं भोले नाथ पधारे- एक्सएक्लूसिव वास्तविक जीवन वृतांत – हीरो नंबर वन – पूजा पाठ में मेरा यकीन नहीं था

DT 14 JUNE 2023# इस कलयुग मे भी आध्यात्मिक शक्तियां मौजूद है # दिल दहलाने वाली सुपर स्टार की आत्मकथा: भोलेनाथ और गायत्री माता मंत्र ने असाध्य बीमारी ( मिर्गी, कैंसर के अलावा और भी गंभीर बीमारी) से जूझ रहे इस बालक को विश्व का सुपर स्टार , सबसे सुंदर मानव बना कर दीर्घायु बना दिया# अतिशयोक्ति मानने की भूल ना करें स्वयं सुपरस्टार द्वारा बताया व्रतांत:# सिर के बाल झड़ गए थे# एक आइब्रो पूरी झड़ गयी थी। एकदम दुबला पतला इतना कि चल नही पाता था# आवाज बंद होती जा रही थी #पूजा पाठ में मेरा यकीन नहीं था। #एक्सएक्लूसिव वास्तविक जीवन वृतांत : चंद्रशेखर जोशी की कलम से

By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor www.himalayauk.org (Leading Web & Print Media) Publish at Dehradun & Haridwar. Mail; himalayauk@gmail.com Mob. 9412932030

# गोविंदा बीमारी के कारण ढंग से चल-फिर भी नहीं पाते थे # मिर्गी के दौरे पड़ते थे# और असाध्य अलग से हो गई # शरीर लगातार इंजेक्शन लेने की वजह से पूरा नीला पड़ गया था और हाथ से लेकर कूल्हे तक पूरे शरीर मे इंजेक्शन लगवाने के लिए भी जगह नही बची थी# मेरी मां मुझसे फकीर और साधु बाबा की खूब सेवा कराया करती थीं क्योंकि उनका विश्वास था कि एक न एक दिन फकीर बाबा की दुआ से ही मैं ठीक जरूर हो जाऊंगा। इस चक्कर मे मेरी मां मुझसे खूब सेवा कराती थी और मुझे यह काम बिल्कुल पसंद नहीं था।

# इस संचित पाप कर्म का लेखा जोखा मिटाने स्वयं भोले नाथ पधारे#’ भोले नाथ का अखण्ड आशीर्वाद- से बदल गई दुनिया # भोले नाथ फकीर वेष मे आ गए# इस युवक की असाध्य और मृत्यु तुल्य बीमारी को समाप्त कर यशस्वी होने का वरदान दिया था- 48 घण्टे जप करते थे यह# फकीर और मां ने उन्हें 14 से 21 साल की उम्र तक 24 लाख बार गायत्री मंत्र का जाप करने की सलाह दी थी. अब ये भरोसा व विश्वास ही है कि गायत्री मंत्र का जाप पूरा होने के बाद वह बिल्कुल ठीक हो गए और उसके बाद आजतक कभी उतना गंभीर बीमार नहीं हुए #

सिर्फ मेरी कलम से:; चंद्रशेखर जोशी मुख्य संपादक (राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त) हिमालयायूके न्यूज़ पोर्टल एम् दैनिक समाचार पत्र- देहरादून एवं हरिद्वार से प्रकाशित & मुख्य सेवक मां पीतांबरा श्री बगलामुखी

मशहुर फिल्म अभिनेता गोविंदा कहते हैं कि मैं करीब 7 साल का था जब मुझे एक ऐसी बीमारी हुई, जिसकी वजह से मेरे सिर के बाल झड़ गए थे और यहां तक कि एक आइब्रो पूरी झड़ गयी थी। मैं एकदम दुबला पतला हो गया था। मेरी आवाज पर भी इसका बहुत असर पड़ा था # 13 साल की उम्र में एक बीमारी के कारण खुद गोविंदा नहीं चल पाते थे. दरअसल, एक बीमारी के कारण उनकी हड्डियां इतनी कमजोर हो गई थी, वह ढंग से चल भी नहीं पाते थे.# उन्हें मिर्गी का दौरा भी पड़ता था.
# असाध्य बीमारी से ग्रस्त गोविंदा की मृत्यु की खबर भी आई# परंतु भोले नाथ ने तो संचित कर्म का लेखा-जोखा ही बदल दिया था# मृत्यु तुल्य योग इतना प्रबल था कि

5 जनवरी 1994 को खुद्दार की शूटिंग के लिए एक स्टूडियो जाते समय गोविंदा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अभिनेता की कार एक अन्य कार से टकरा गई, और उनके सिर में चोटें आईं। उनका बहुत खून बह रहा था,

बचपन में हुई अपनी एक गंभीर बीमारी के बारे में भी गोविंदा ने इस मौके पर खुलासा किया। वह कहते हैं, ‘जब मैं सात वर्ष का था तो बहुत बीमार रहता था, मेरे सारे दांत गिर गए थे। पूरे बाल झड़ गए। इलाज के दौरान शरीर का कोई ऐसा अंग नहीं बचा जहां इंजेक्शन न लगा हो। डॉक्टर सोच रहे थे कि अब किस जगह इंजेक्शन लगाऊं। उस समय मेरी तोतली आवाज निकल रही थी। 13 साल की उम्र तक ऐसे ही रहा। मैंने डॉक्टर से पूछा, डॉक्टर साहब क्या लगता है मैं जिन्दा तो रहूंगा ना? उन्होंने बोला, अरे गोविंदा, तू तो स्टार बनेगा, तुझे दुनिया देखेगी। शायद उस समय उनके जिह्वा पर सरस्वती बैठी थी।’

हम ईश्वर पर बहुत विश्वास करते है और दूसरे डॉक्टर पर इतना विश्वास करते हैं कि उनको अपना शरीर सौंप देते हैं। डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप इसलिए माना जाता है

स्वय गोविंदा ने एक अनजान फकीर का सुनाया। , ‘जब 13 वर्ष का हुआ तो एक फकीर आए और उन्होंने पानी पीने के लिए मांगा। उस समय रोजा का समय चल रहा था तो कोई उन्हें पानी नहीं दे रहा था। मैं उनके लिए पानी और खाना लेकर आया। उनकी आवाज मुझे बहुत सुरीली लगी। मुझे लगा जरूर इनको कोई इल्म है। उसके बाद 14 साल से लेकर 21 साल तक मुझे किसी न किसी रूप में वह मिलते रहे।’ गोविंदा का मानना है कि मां के आशीर्वाद और साधु महात्माओं की सेवा से ही उन्हें कामयाबी मिली।
बीमार बालक को फकीर वेश मे स्वय भोले नाथ दर्शन देने आ गए थे#

गोविंदा बताते हैं एक बार मेरी मां ने जंगल में मुझे एक फकीर की सेवा करने भेज दिया था। उस फकीर ने सुबह 6:30 बजे से दोपहर के 1:30 बजे तक मुझसे लगातार अपने पैर दबवाए। मैं थक गया और मैंने उस बाबा के सिर में गुस्से में टपली मारी कि तुम को तरस नहीं आता। एक तो मेरी वैसे ही तबीयत ठीक नहीं है ऊपर से तुम मुझसे सुबह से काम करा रहे हो और मैं गुस्सा होकर वहां से चला गया। अब मुझे लगा यह बाबा मुझसे नाराज हो गया होगा क्योंकि मैंने उसके सर पर टपली मारी थी पर जब यह बात मैंने अपनी मां को बताई तो मेरी मां भी गुस्सा हो गयी और उन्होंने मुझे उस बाबा से माफी मांगने को कहा और मेरी मां मुझे उसी बाबा के पास मुझे लेकर गई।

अब मुझे वापस आया देख कर उस बाबा ने मेरी मां से कहा कि गोविंदा किसी चीज में विश्वास नहीं करता, लेकिन आज मैं इसके शरीर से इसकी बीमारी निकालकर दिखाऊंगा उसको जो दौरे पड़ते हैं अब नहीं पड़ेंगे। फिर क्या था वाकई उस बाबा ने जो इलाज बताया मैं उससे ठीक हो गया और यह मैंने खुद महसूस किया है और देखा है। इसलिए मैं यह कहानी आपको बता रहा हूं कि जिंदगी में सारा खेल ही विश्वास का है अगर आप किसी दवाई को इस विश्वास से खाते हैं क्या ठीक हो जाएंगे तो यकीन मानिए आधा काम आपके विश्वास ने कर ही दिया है पर आपको ठीक होना ही है इसलिए जिंदगी में चाहे जो हो जाये विश्वास जरूर बनाये रखिएगा।

गोविंदा का जन्म एक हिंदू खत्री परिवार में 21 दिसंबर 1963 को पूर्व अभिनेता अरुण (उर्फ अरुण कुमार आहूजा) और गायिका-अभिनेत्री निर्मला देवी के घर हुआ था।

उनका पहला एल्बम, गोविंदा, 1998 में रिलीज़ हुआ था। [78] नवंबर 2013 में गोविंदा ने अभिनेत्री पूजा बोस के साथ अपना दूसरा एल्बम गोरी तेरे नैना जारी किया। गोविंदा ने गीत भी लिखे। वह हसीना मान जाएगी (1999) में “आई लव यू बोल दाल” गीत के गीतकार हैं।

1999 में, बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन पोल में गोविंदा को मंच या स्क्रीन का दुनिया का दसवां सबसे बड़ा सितारा चुना गया था। जुलाई 2016 में, उन्हें मुंबई में इंडिया लीडरशिप कॉन्क्लेव में दशक के अभिनेता के रूप में मान्यता दी गई थी।

गोविंदा को 12 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार नामांकन और 4 ज़ी सिने पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्हें हसीना मान जाएगी (1999) के लिए कॉमिक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार और साजन चले ससुराल (1996) के लिए फिल्मफेयर विशेष पुरस्कार भी मिला है।

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