उत्तराखंड – पिथौरागढ़ -सनसनी सरयू नदी के किनारे दर्जनों शव पाए गए & Top UK News 27 May 2021

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बुधवार को सरयू नदी के किनारे दर्जनों शव पाए गए.  समाचार एजेंसी एएनआई ने उत्तराखंड में सरयु नदी में शवों के पाए जाने की खबर जारी करते हुए बताया कि स्थानीय लोग इस घटना से बेहद डरे हुए हैं. क्योंकि जहां लाशें मिली हैं, वहां से जिला मुख्यालय सिर्फ 30 किलोमीटर दूर है. पिथौरागढ़ में पीने के पानी की सप्लाई के लिए नदी से ही पानी लिया जाता है. लोगों को आशंका है कि नदी में शव मिलने के बाद पानी के दूषित होने से संक्रमण और तेजी से फैल सकता है. # यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ऋषन्दे महर ने बताया कि सरयू घाट पम्पिंग योजना से पिथौरागढ़ क्षेत्र के अधिकांश गांवों में पानी की सप्लाई दी जाती है। जहां अधजले शव तैरते नजर आ रहे हैं, उसी स्थान पर कोरोना संक्रमित मरीजों को जलाया जा रहा है।

पिथौरागढ़ में सरयु नदी के किनारे शव मिलने से स्‍थानीय लोगों में दहशत का माहौल है शवों की वजह से लोगों को डर है कि कहीं नदी का पानी दूषित न हो जाए, जो जिले में जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत है.

यूपी के नदियों गंगा और सरयू में अभी तक शवों का मिलना जारी था। इसी बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में सरयू नदीं में शव पाए गए हैं। इससे स्थानीय लोग काफी डर गए हैं। सरयू नदी से ही पिथौरागढ़ जिले के अधिकांश गांवों की पेयजल सप्लाई होती है।

बिहार और यूपी के बाद अब उत्तराखंड में सरयू नदी में लाशें मिलने की बड़ी खबर है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बुधवार को सरयू नदी के किनारे दर्जनों शव पाए गए. माना जा रहा है कि ये शव COVID-19 पॉज़िटिव मरीजों के हैं. कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच गंगा और अन्य कुछ नदियों के किनारों पर शवों के मिलने से पिछले दिनों काफी सनसनी फैल चुकी है. इस बारे में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश समेत कुछ अन्‍य राज्यों से लगातार खबरें आई हैं.

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में बुधवार को लोगों में तब भय, गुस्से और अचंभे का माहौल देखा गया, जब सरयू नदी के किनारे दर्जनों शव तैरते हुए पाए गए. माना जा रहा है कि ये शव COVID-19 पॉज़िटिव लोगों के ही हैं. कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच गंगा और अन्य कुछ नदियों के किनारों पर शवों के मिलने से पिछले दिनों काफी सनसनी फैल चुकी है. इस बारे में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश समेत कुछ अन्‍य राज्यों से लगातार खबरें आई हैं.

ज़िले के लोग इस बात से पहले ही डरे हुए बताए गए हैं कि इस महीने वैसे ही कोरोना संक्रमण के आंकड़े ऑल टाइम सबसे ज़्यादा रहे हैं. दूसरे, स्थानीय लोगों ने इस बात पर भी ऐतराज़ जताया है कि शवों का अंतिम संस्कार ठीक से न किए जाने या खुले में किए जाने से संक्रमण फैलने की रफ्तार और बढ़ सकती है. केंद्र भी नदी में लाशें बहती मिलने की मीडिया रिपोर्ट्स पर चिंता ज़ाहिर करते हुए इन्हें चेतावनी की तरह मान चुका है. लेकिन लाशों के नदी किनारे मिलने पर पिथौरागढ़ प्रशासन का कुछ और ही कहना है!

घाट क्षेत्र में कोविड के मरीज़ों के अंतिम संस्कार के काम को सुपरवाइज़ करने वाले ज़िले के तहसीलदार पंकज चंदोला ने साफ तौर पर कहा कि सरयू नदी में जो लाशें मिली हैं, वो पिथौरागढ़ की नहीं हैं. इसके बाद चंदोला ने यह भी कहा, ‘अभी लाशों की शिनाख्त नहीं हो सकी है और जांच की जा रही है कि ये लाशें कहां से आई हैं.’ गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में लाशें तैरती मिल चुकी हैं. केंद्र ने इन दोनों राज्यों को निर्देश ​भी दिए कि नदियों में लाशें बहाए जाने की प्रैक्टिस को रोका जाए.

विनीता कुमार, पिथौरागढ़ – पिथौरागढ़ की सरयू पम्पिंग योजना की नदी में उतराते अधजले शवों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधजले शवों के नदी में पड़े होने से कोरोना संक्रमण का खतरा मंडराता दिख रहा है।  बता दें कि बीते रोज पिथौरागढ़ सरयू पम्पिंग योजना की नदी में तैरते शव का वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल खड़े किए थे।  स्थानीय ग्रामीण त्रिभुवन सिंह का कहना है कि नदी में अधजली लाशें मिलने से दर्जनों गांवों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का भय बना हुआ है। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीण इलाकों के लोग सरयू नदी के पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं। इससे लोगों में डर बना हुआ है।

अब उत्तराखंड में सरयू नदी में लाशें मिलने की बड़ी खबर है. समाचार एजेंसी एएनआई ने यह खबर जारी करते हुए बताया कि स्थानीय लोग इस घटना से बेहद डरे हुए हैं, क्योंकि जहां लाशें मिली हैं, वहां से सिर्फ 30 किलोमीटर ही दूर ज़िला मुख्यालय है. पीने के पानी की सप्लाई के लिए नदी से ही पानी लिया जाता है. लोगों को आशंका है कि पानी दूषित होने से संक्रमण और तेज़ी से फैल सकता है.

ज़िले के लोग इस बात से पहले ही डरे हुए बताए गए हैं कि इस महीने वैसे ही कोरोना संक्रमण के आंकड़े ऑल टाइम सबसे ज़्यादा रहे हैं. दूसरे, स्थानीय लोगों ने इस बात पर भी ऐतराज़ जताया है कि शवों का अंतिम संस्कार ठीक से न किए जाने या खुले में किए जाने से संक्रमण फैलने की रफ्तार और बढ़ सकती है. केंद्र भी नदी में लाशें बहती मिलने की मीडिया रिपोर्ट्स पर चिंता ज़ाहिर करते हुए इन्हें चेतावनी की तरह मान चुका है.

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