24 जून 2026 सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित &सूर्य और आर्द्रा नक्षत्र (राहु) का यह संयोग, अचानक बड़े बदलाव, 27 नक्षत्रों में जीवनदायी है आर्द्रा नक्षत्र

24 जून 2026 (बुधवार) के पंचांग के अनुसार, आज का दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। आज परिघ योग और चित्रा नक्षत्र का संयोग है। नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) या किसी अन्य बड़े अनुष्ठान की योजना बना रहे हैं, तो  & 24 जून 2026 को बुधवार का दिन है। इस दिन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (शाम 06:12 तक) और चित्रा नक्षत्र (दोपहर 01:59 तक) रहेगा। सूर्योदय सुबह 05:25 बजे और सूर्यास्त शाम 07:23 बजे होगा। राहुकाल दोपहर 12:24 से 02:08 तक रहेगा

By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & Bagla Mukhi Peeth Dehradun 9412932030

27 नक्षत्रों में जीवनदायी माना जाता है आर्द्रा नक्षत्र & आर्द्रा नक्षत्र के अधिष्ठाता देव भगवान शिव के रुद्र स्वरूप हैं. इस अवधि में भगवान शिव, सूर्यदेव, भगवान विष्णु और इंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है. उन्होंने बताया कि “ॐ नमः शिवाय”, महामृत्युंजय मंत्र तथा विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करना, दान-पुण्य करना तथा गौ, ब्राह्मण और साधु-संतों की सेवा करना शुभ फलदायी माना जाता है. खीर, पूड़ी और आम का भोग अर्पित करना भी अत्यंत मंगलकारी माना गया है.

जब सूर्यदेव राहु के आर्द्रा नक्षत्र में कदम रखते हैं, तो यह समय हमारे भीतर छिपी हुई गहरी समझ और अचानक होने वाले सही अहसासों को जगाता है। पूरी तरह से मिथुन राशि के भीतर आने वाला यह नक्षत्र हमारे संवाद, बुद्धि, नई सीख, तकनीकी ज्ञान और नए विचारों को बहुत बल देता है। आर्द्रा नक्षत्र का यह प्रभाव जीवन में बड़ी सफलताएं और तरक्की लेकर आ सकता है, लेकिन इसके साथ ही यह मन में थोड़ी बेचैनी भी बढ़ा सकता है। ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

24 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमि तिथि & 24 जून 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार बुधवार का दिन है (शुक्ल पक्ष, आषाढ़ मास)। इस दिन कोई भी नया और शुभ कार्य करने के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण काम (जैसे- प्रॉपर्टी, व्यापार या पूजा) को शुरू करना बेहद फलदायी 

  • अभिजीत मुहूर्त: दिन में 12:12 PM से 01:00 PM तक (हर प्रकार के शुभ कार्य हेतु सबसे उत्तम) 
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:24 PM से 03:12 PM तक (विजय प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ) 
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:00 AM से 04:45 AM तक (पूजा-पाठ और ध्यान के लिए)
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:00 PM से 07:25 PM तक 

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सूर्य इस नक्षत्र में 22 जून से 6 जुलाई तक विराजमान & महत्व ^ सूर्य और आर्द्रा नक्षत्र (राहु) का यह संयोग करियर और आर्थिक मामलों में अचानक बड़े बदलाव और सफलता

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश विशेष महत्व रखता है. इसे जीवन, ऊर्जा, आरोग्य और प्रकृति के नवजीवन से जोड़कर देखा जाता है. सूर्य 22 जून की रात 8:27 बजे आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 6 जुलाई की रात 9:48 बजे तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. इस अवधि को वर्षा, कृषि और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है

 सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में गोचर के साथ अच्छी वर्षा के संकेत बन रहे हैं. पंचांग गणना के अनुसार जून के अंतिम दिनों और जुलाई के शुरुआती सप्ताह में अच्छी बारिश होने की संभावना है. आर्द्रा से लेकर हस्त नक्षत्र तक की अवधि वर्षा के लिए अनुकूल मानी जाती है. यही समय कृषि गतिविधियों की शुरुआत के लिए भी महत्वपूर्ण होता है.

आर्द्रा नक्षत्र के आरंभ होने पर सनातन धर्मावलंबी घरों में खीर, दाल वाली पूड़ी और आम का विशेष महत्व होता है. इनका भोग भगवान विष्णु को अर्पित कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में खीर का सेवन आरोग्यता प्रदान करता है और आम खाने की भी विशेष परंपरा है.

सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में रहने के दौरान महिलाएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना से खीर बनाकर खिलाती हैं. धार्मिक विश्वास है कि इस नक्षत्र में होने वाली वर्षा में स्नान करने से त्वचा संबंधी कई समस्याओं से राहत मिलती है.

आर्द्रा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में छठा नक्षत्र है. इसका स्वामी राहु माना जाता है और यह मिथुन राशि से संबंधित है. वामन पुराण में आर्द्रा नक्षत्र को भगवान नारायण के केशों में निवास करने वाला बताया गया है. इसी कारण इसे जीवनदायी नक्षत्र की संज्ञा दी गई है. धरती को नमी प्रदान करने और कृषि कार्यों की शुरुआत का आधार बनने के कारण इसका विशेष महत्व माना जाता है

भारत में मानसून की औपचारिक शुरुआत भी इसी कालखंड से मानी जाती है. आर्द्रा नक्षत्र में होने वाली वर्षा को किसानों के लिए अमृत तुल्य माना जाता है. इस बार सूर्य मिथुन राशि में गुरु के साथ युति करेंगे, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ संकेत माना जा रहा है.

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