25 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी & 25 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। जिसमें निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। शास्त्रों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस तिथि पर स्वाति नक्षत्र औरशिव योग का विशेष संयोग बनने वाला है। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर तुला राशि में होंगे, जिसके स्वामी शुक्र देव होते हैं।
गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति देव और जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए परम फलदायी माना जाता है। आज के दिन निर्जला एकादशी और यौम-ए-अशुरा मनाया जा रहा है।
शुद्ध ज्येष्ठ मास का गुरुवार है और आज बड़ी ‘निर्जला एकादशी’ है, इसलिए आज भगवान विष्णु को पीले फल, पीले फूल या चने की दाल और गुड़ का भोग लगाएं। आज के दिन केले के वृक्ष के पास शुद्ध घी का दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे भाग्य का साथ मिलता है, शिक्षा और करियर में उन्नति होती है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
आज शुद्ध ज्येष्ठ मास का गुरुवार है और आज बड़ी ‘निर्जला एकादशी’ है, इसलिए आज भगवान विष्णु को पीले फल, पीले फूल या चने की दाल और गुड़ का भोग लगाएं। आज के दिन केले के वृक्ष के पास शुद्ध घी का दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे भाग्य का साथ मिलता है, शिक्षा और करियर में उन्नति होती है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
25 जून 2026
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
शक संवत: 1948 (परावभ)
महीना: शुद्ध ज्येष्ठ मास (शुक्ल पक्ष)
तिथि: एकादशी
नक्षत्र: स्वाति नक्षत्र- रात 02:32 (26 जून) तक (इसके बाद विशाखा नक्षत्र प्रारंभ)
योग: शिव योग- शाम 04:55 तक (इसके बाद सिद्ध योग)
करण: तैतिल- सुबह 11:11 तक (इसके बाद गर करण रात 11:43 तक)
सूर्योदय: सुबह 05:25 एएम
सूर्यास्त: शाम 07:22 पीएम
चंद्रराशि: तुला राशि (दिन-रात)
आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
यदि आप आज कोई नया व्यवसाय, धार्मिक कार्य, स्वर्ण आभूषणों की खरीदारी या बड़ा निवेश करना चाहते हैं, तो इन शुभ समयों का उपयोग कर सकते हैं:
अभिजित मुहूर्त (दिन का सबसे श्रेष्ठ समय): दोपहर 11:55 से दोपहर 12:51 तक।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:04 से सुबह 04:44 तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 से दोपहर 03:41 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:22 से शाम 07:43 तक।
राहुकाल: दोपहर 02:09 से शाम 03:54 तक (गुरुवार को दोपहर के बाद राहुकाल होता है, इस दौरान शुभ कार्यों से बचें