आप्रवासी भारतीयों की प्रॉक्सी वोटिंग-2019 के लिए खेला दांव फेल

केंद्रीय मंत्र्ािमंडल ने चुनाव संबंधी कानूनों में संशोधन कर विदेशों में रहने वाले भारतीयों को प्रॉक्सी मतदान की सुविधा उपलब्ध करवाने संबंधी प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी। विदेशों में रहने वाले भारतीय मतदान कर सकें इसलिए प्रॉक्सी मतदान को अन्य साधनों के रूप में शामिल करने के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन की जरूरत होगी । वैसे तो अप्रवासी भारतीय और विदेशों में बसे भारतीय उन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान कर सकते हैं जहां उनका पंजीकरण हैं लेकिन इस प्रस्ताव के मुताबिक अब उन्हें प्रॉक्सी के विकल्प के इस्तेमाल की भी इजाजत होगी। यह विकल्प अभी तक सैन्य कर्मियों को ही उपलब्ध है इस मुद्दे पर काम कर रही चुनाव आयोग के विशेषग्यों की एक समिति ने वर्ष 2015 में विदेशों में बसे भारतीयों को प्रॉक्सी मतदान की सुविधा उपलब्ध करवाने की खातिर चुनाव संबंधी कानूनों में संशोधन के लिए कानून मंत्रालय को कानूनी रूपरेखा भेजी थी। आंकड़े बताते हैं कि महज दस हजार से बारह हजार अप्रवासी भारतीयों ने ही मतदान किया क्योंकि वे यहां आने का खर्च नहीं उठाना चाहते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैबिनेट से आप्रवासी भारतीयों की प्रॉक्सी वोटिंग को मंजूरी दिलवा कर 2019 के लिए खेला दांव फेल हो गया है।  यह विकल्प अभी तक सैन्य कर्मियों को ही उपलब्ध है इस मुद्दे पर काम कर रही चुनाव आयोग के विशेषग्यों की एक समिति ने वर्ष 2015 में विदेशों में बसे भारतीयों को प्रॉक्सी मतदान की सुविधा उपलब्ध करवाने की खातिर चुनाव संबंधी कानूनों में संशोधन के लिए कानून मंत्रालय को कानूनी रूपरेखा भेजी थी। आंकड़े बताते हैं कि महज दस हजार से बारह हजार अप्रवासी भारतीयों ने ही मतदान किया क्योंकि वे यहां आने का खर्च नहीं उठाना चाहते थे।  हिमालयायूके-  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैबिनेट से आप्रवासी भारतीयों की प्रॉक्सी वोटिंग को मंजूरी दिलवा कर 2019 के लिए खेला दांव फेल हो गया है। चुनाव आयोग के डाटा के अनुसार, पिछले साल एनआरआई वोटर्स की संख्या 24,348 थी जोकि इस साल बढ़कर 24,507 यानि मोदी सरकार के इस कदम के बाद अगस्त से दिसंबर 2017 के पहले पांच महीनों में केवल 159 एनआरआई वोटर्स ही जुड़े। आप्रवासी भारतीयों को खुश करने के साथ-साथ दक्षिण में भी पार्टी का किला मजबूत करने की सियासी चाल चली है। आप्रवासी भारतीयों में सबसे ज्यादा एन.आर.आई. खाड़ी देशों में हैं। सऊदी अरब में 3 लाख 50 हजार, दुबई 28 लाख, कुवैत 9 लाख 21 हजार और ओमान में 7 लाख 95 हजार के करीब एन.आर.आई. हैं। मिडल ईस्ट में रहने वाले अधिकतर आप्रवासी भारतीय दक्षिण भारत खासतौर पर केरल से हैं। लिहाजा माना जा रहा है कि भाजपा को दक्षिण भारत में भी इसका फायदा हो सकता है। इस सिस्टम के जरिए वोटिंग का अधिकार रखने वाला व्यक्ति अपने विधानसभा अथवा लोकसभा हलके से किसी ऐसे व्यक्ति को नामित करता है जो उसके स्थान पर वोट डालता है। मौजूदा समय में भारत में सुरक्षा बलों के जवान इस व्यवस्था के जरिए वोट करते हैं। यह व्यवस्था यू.के. में भी अपनाई जाती है। आप्रवासी भारतीयों के लिए यह व्यवस्था शुरू करने के लिए 2 तरीके अपनाए जा सकते हैं। इनमें से पहला तरीका विभिन्न देशों में स्थित भारतीय दूतावास में जाकर वोट करेंगे। इसके लिए बैलेट पेपर इलैक्ट्रॉनिक तरीके से भेजे जा सकते हैं जबकि दूसरा तरीका भारत में पहले से सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले मतदान जैसा हो सकता है। इसमें सिर्फ एक ही शर्त होगी कि जिसे वोटिंग का अधिकार दिया जा रहा है वह उसी विधानसभा अथवा लोकसभा क्षेत्र का वोटर हो।

दुनिया भर में भारतीय मूल के करीब 3 करोड़ लोग रहते हैं जिनमें से एक 1 करोड़ 30 लाख लोग एन.आर.आई. हैं। मोदी की इन एन.आर.आई. वोटों पर नजर है। लिहाजा आम चुनाव से 22 महीने पहले कैबिनेट ने प्रॉक्सी वोटिंग को मंजूरी देकर इन आप्रवासी भारतीयों का मन जीतने की कोशिश की है।
दुनिया भर में कुल भारतीय 3,08,43,419
एन.आर.आई.-1,30,08,012
पी.आई.ओ.-1,78,35,407

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